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2030 का भारत: इन 6 सेक्टर में आएगी क्रांति, जेफरीज का बड़ा दावा, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल हुए गदगद!

Published: Thu, 10 Sep 2026 09:29 PM (IST)

जेफरीज की रिपोर्ट 'इंडियाज न्यू इंडस्ट्रियल रिवोल्यूशन' के अनुसार, 2030 तक भारत में छह प्रमुख सेक्टर - स्पेस, सेमीकंडक्टर, डेटा ...और पढ़ें

जेफरीज रिपोर्ट: भारत में नई औद्योगिक क्रांति के 6 सेक्टर।

जेफरीज रिपोर्ट: भारत में नई औद्योगिक क्रांति के 6 सेक्टर।

HighLights

  1. जेफरीज रिपोर्ट: भारत में नई औद्योगिक क्रांति के 6 सेक्टर।

  2. स्पेस, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर में भारी निवेश और वृद्धि।

  3. इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर, एयरोस्पेस विनिर्माण में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका की दिग्गज ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने भारत को लेकर एक रिपोर्ट जारी की है। फर्म ने इस रिपोर्ट का टाइटल 'इंडियाज न्यू इंडस्ट्रियल रिवोल्यूशन' रखा है। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म के अनुसार, भारत में इंडस्ट्रियल ग्रोथ का अगला दौर छह ऐसे सेक्टर से आ सकता है जिन्हें नया निवेश और पॉलिसी सपोर्ट मिल रहा है।

ये सेक्टर हैं - स्पेस, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर मैन्युफैक्चरिंग और एयरोस्पेस। यही 6 सेक्टर 2030 के भारत को पूरी तरह बदल देंगे। 2030 का भारत कुछ और ही होगा। अमेरिकी ब्रोकरेज फर्म जेफरीज की इस रिपोर्ट को भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर भी शेयर किया है। अब आइए जानते हैं कि आखिर कौन से 6 सेक्टर 2030 के भारत की पहचान होंगे, जिसके बारे जेफरीज ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है।

अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत लिखेगा नई कहानी

ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा की भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जिसके पास स्पेस के क्षेत्र में दुनिया भर में मुकाबला करने लायक क्षमताएं हैं। भारत में प्राइवेट सेक्टर भी अब स्पेस के क्षेत्र में तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है। सरकार द्वारा 2020 में प्राइवेट कंपनियों के लिए खोल गए दरवाजे का असर दिखने लगा है। 2030 में भारत के स्पेस सेक्टर की अर्थव्यवस्था 5 गुना बढ़ाकर 40 से 45 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगी।

जेफरीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि भारतीय स्टार्टअप्स शुरुआती इनोवेशन से आगे बढ़कर कमर्शियल काम की ओर बढ़ रहे हैं। इनमें स्काईरूट (जुलाई में ऑर्बिटल लॉन्च), पिक्सेल (हाई-रिज़ॉल्यूशन ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट), अग्निकुल (3D-प्रिंटेड रॉकेट इंजन) और दिगंतरा (सर्विलांस सैटेलाइट) जैसी कंपनियां शामिल हैं।

सेमीकंडक्टर में इंसेंटिव प्लान बनेगा गेम चेंजर

वहीं, भारत का सेमीकंडक्टर सेक्टर भी तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है। जेफरीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि भारत अब पॉलिसी और प्लानिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर काम कर रहा है। यही कारण है कि सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में 20 अरब डॉलर के निवेश से चिप फैब (chip fab) बन रहा है और कई OSAT प्रोजेक्ट्स में प्रोडक्शन शुरू हो रहा है।

जेफरीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इतना ही नहीं भारत सरकार का 13 अरब डॉलर का नया इंसेंटिव प्लान इस इकोसिस्टम को और बढ़ाएगा और चिप डिजाइन समेत वैल्यू एडिशन को बढ़ावा देगा। हालांकि सप्लाई चेन की गहराई, टैलेंट और ग्लोबल कॉम्पिटिशन अभी भी चुनौतियां बनी हुई हैं, लेकिन हमारा मानना है कि भारत एक भरोसेमंद सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की नींव रख रहा है।

डेटा सेंटर्स में आ सकता है $45 बिलियन का निवेश

जेफरीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि भारत के डेटा सेंटर्स निवेश के सबसे बड़े मौकों में से एक हो सकते हैं। पिछले पांच सालों में भारत की कोलोकेशन डेटा सेंटर क्षमता लगभग 5 गुना बढ़कर 2 GW हो गई है।

ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि उसे उम्मीद है कि पॉलिसी सपोर्ट और हाइपरस्केलर की बढ़ती मांग के कारण अगले 5 साल में यह क्षमता और 5 गुना बढ़कर ~10GW हो जाएगी। और इस क्षेत्र में 45 बिलियन डॉलर का निवेश आ सकता है।

सिर्फ असेंबल नहीं मैन्यूफैक्चरिंग में भी बढ़ रही है भागीदारी

अमेरिकी ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने कहा की पहले भारत की पहचान ये थी कि वह दूसरे देशों से पार्ट्स लाकर अपने यहां असेंबल करता था। लेकिन अब कहानी बदल रही है। भारत अब खुद पार्ट्स बनाने पर जोर दे रहा है। यानी मैन्यूफैक्चरिंग से लेकर असेंबलिंग तक सबकुछ यहीं हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार अभी मोबाइल पार्ट्स में घरेलू वैल्यू एडिशन 20 प्रतिशत से कम है। जेफरीज़ का अनुमान है कि अगले छह सालों में यह आंकड़ा लगभग 50 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा।

सोलर पावर भारत का नया एक्सपोर्ट गेम है?

जेफरीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि भारत पहले से ही लगभग किसी भी दूसरे देश की तुलना में ज्यादा सोलर सेल बनाता है। यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोलर PV मैन्युफैक्चरर है। लगभग 35 गीगावाट सेल कैपेसिटी पहले से ही काम कर रही है। 100 गीगावाट की कैपेसिटी पर अभी काम चल रहा है। जेफरीज का अनुमान है कि 2030 तक पूरी सोलर वैल्यू चेन का 90 प्रतिशत हिस्सा भारत में ही तैयार हो जाएगा।

एयरोस्पेस में चुपके से भारत लगा रहा लंबी छलांग

बोइंग और एयरबस सिर्फ दूसरी जगहों पर बने विमान ही नहीं उड़ातीं। वे हर साल भारत से 1.4 से 1.6 अरब डॉलर के पार्ट्स भी खरीद रही हैं। ऐसा क्यों है? भारत को लागत के मामले में फ़ायदा मिलता है। साथ ही, यहा इसके लिए जरूरी इंजीनियरिंग टैलेंट भी मौजूद है। जब दुनिया भर में एयरोस्पेस सप्लाई चेन बढ़ती माँग को पूरा करने में संघर्ष कर रही हैं, तब भारतीय कंपनियाँ दुनिया भर की बड़ी OEM और टियर-1 कंपनियों के लिए सप्लायर के तौर पर आगे आ रही हैं।

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