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    JP Associates Case में अनिल अग्रवाल की वेदांता की 'गुगली', सीधे CoC को किया चैलेंज; NCLAT में फंसा पेंच!

    Updated: Thu, 23 Apr 2026 09:45 AM (GMT+05:30)

    वेदांता लिमिटेड ने जयप्रकाश एसोसिएट्स (JP Associates) के लिए अदाणी एंटरप्राइजेज को सफल बोलीदाता चुने जाने पर सवाल उठाए हैं, आरोप है कि कर्जदाताओं की स ...और पढ़ें

    वेदांता ने JP Associates खरीद मामले में CoC पर उठाए सवाल

    वेदांता ने JP Associates खरीद मामले में CoC पर उठाए सवाल

    HighLights

    1. वेदांता ने अदाणी की बोली प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

    2. कर्जदाताओं की समिति पर पारदर्शिता की कमी का आरोप।

    3. NCLAT ने वेदांता की याचिकाओं पर आदेश सुरक्षित रखा।

    भाषा, नई दिल्ली। JP Associates Case: खनन कंपनी वेदांता लिमिटेड (Vedanta Limited) ने कर्ज में डूबी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JLL) के लिए अदाणी एंटरप्राइजेज को सफल बोलीदाता चुने जाने की प्रक्रिया पर बुधवार को एक बार फिर सवाल उठाए। जेपी एसोसिएट्स केस में यह एक तरह का नया मोड़ है।

    वेदांता लिमिटेड की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिजीत सिन्हा ने अपनी जवाबी दलील में कहा कि कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर कर्जदाताओं की समिति (CoC) से स्पष्टता आनी जरूरी है।

    उन्होंने कहा, "मेरे हिसाब से, इस मामले में सीओसी ने पारदर्शिता और स्पष्ट प्रक्रिया का पालन नहीं किया है।"

    NCLAT ने सुरक्षित रखा आदेश

    इसके साथ ही सिन्हा ने आरोप लगाया कि सीओसी ने अधिकतम मूल्य हासिल करने के लिए अपनाई गई अपनी ही प्रक्रिया को छोड़ दिया है। राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) ने अदाणी एंटरप्राइजेज की बोली को चुने जाने के खिलाफ दायर वेदांता लिमिटेड की दो याचिकाओं पर बुधवार को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।

    एनसीएलएटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अशोक भूषण और तकनीकी सदस्य बरुण मित्रा की दो-सदस्यीय पीठ ने वेदांता, समाधान पेशेवर (रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल), कर्जदाताओं की समिति (सीओसी) और अन्य पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। इसके साथ ही न्यायाधिकरण ने दोनों पक्षों को दो दिन के भीतर लिखित दलीलें दाखिल करने को कहा।

    CoC के मूल्यांकन पर वेदांता ने उठाए सवाल

    मामले की सुनवाई के दौरान वेदांता के वकील ने कर्जदाताओं द्वारा अपनाए गए मूल्यांकन मानदंडों पर सवाल उठाया। कर्जदाताओं ने अदाणी एंटरप्राइजेज की 14,535 करोड़ रुपये की बोली को मंजूरी दी थी, जबकि वेदांता की 17,926 करोड़ रुपये की बोली को खारिज कर दिया गया था।

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    सिन्हा ने सीओसी द्वारा अपनाई गई मूल्यांकन प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह केवल एक जरिया है और इसके आधार पर किसी बाध्यकारी समझौते का विकल्प नहीं तैयार किया जा सकता।

    उन्होंने कहा कि इस मामले में निर्धारित मानदंड सामूहिक थे लेकिन बाद में अचानक बदलाव किया गया, जबकि शुरुआत में निर्णय शुद्ध वर्तमान मूल्य (NPV) और अग्रिम भुगतान जैसे पहलुओं पर आधारित होना था।

    सिन्हा ने उच्चतम न्यायालय और एनसीएलएटी के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि ‘व्यावसायिक सूझबूझ’ का इस्तेमाल ठोस आधार पर होना चाहिए और यह रिकॉर्ड में दिखना भी चाहिए। उन्होंने कहा, "अगर 76,000 करोड़ रुपये की दिवाला प्रक्रिया एक ही बैठक में पर्याप्त विचार-विमर्श के बगैर पूरी हो जाती है, तो इससे गलत संदेश जाता है। ऐसा नहीं हो सकता कि हर बात को ‘व्यावसायिक सूझबूझ’ कहकर सही ठहरा दिया जाए।"

    उन्होंने दिवाला प्रक्रिया के दौरान मूल्यांकन लीक होने के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि किसी ठोस दस्तावेज या हलफनामे के बगैर इस तरह के गंभीर आरोप नहीं लगाए जाने चाहिए। इससे पहले 24 मार्च को एनसीएलएटी ने वेदांता समूह की उस याचिका पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया था, जिसमें राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) के 17 मार्च के आदेश को चुनौती दी गई थी।

    अदाणी की बोली को मिली थी मंजूरी

    हालांकि एनसीएलएटी ने कहा था कि अंतिम फैसला अपील के परिणाम पर निर्भर करेगा। एनसीएलटी ने अपने आदेश में JP Associates के अधिग्रहण के लिए अदाणी समूह की तरफ से लगाई गई बोली को मंजूरी दी थी। वेदांता ने इस आदेश को उच्चतम न्यायालय में भी चुनौती दी थी लेकिन शीर्ष अदालत ने रोक देने से इनकार कर दिया।

    हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश दिया कि Jaiprakash Associates Limited की निगरानी समिति कोई भी बड़ा नीतिगत निर्णय लेने से पहले न्यायाधिकरण की अनुमति ले।

    अदाणी एंटरप्राइजेज ने जेएएल के लिए लगाई बोली में वेदांता लिमिटेड और डालमिया भारत को पीछे छोड़ते हुए जीत हासिल की। अदाणी एंटरप्राइजेज को कर्जदाताओं के सर्वाधिक 89 प्रतिशत मत मिले थे। जेपी समूह (JP Group) की प्रमुख कंपनी JAL को 57,185 करोड़ रुपये कर्ज के भुगतान में चूक के बाद जून, 2024 में कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया में शामिल किया गया था।

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