किसानों को लगेगा तगड़ा झटका! इस लोन पर सब्सिडी घटा सकती है सरकार; कितना बढ़ेगा बोझ?
किसानों के लिए यह खबर किसी अलर्ट से कम नहीं है। सरकार KCC के तहत मिलने वाली सस्ते लोन के नियमों में एक बहुत बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है।
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सरकार के इस एक फैसले से महंगा हो सकता है आपका लोन!
HighLights
KCC ब्याज सब्सिडी में 0.50% कटौती की तैयारी।
किसानों के लिए KCC लोन महंगा होने की आशंका।
वित्त मंत्रालय और बैंकों के बीच अंतिम दौर की बातचीत।
नई दिल्ली: क्या आपके पास भी किसान क्रेडिट कार्ड (Kisan Credit Card) है? अगर हां तो यह खबर आपके लिए किसी अलर्ट से कम नहीं है। मोदी सरकार KCC के तहत मिलने वाली सस्ते लोन के नियमों में एक बहुत बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। खबर है कि सरकार किसान क्रेडिट कार्ड पर दी जाने वाली 'इंटरेस्ट सबवेंशन' (Interest Subvention - यानी ब्याज पर मिलने वाली छूट) को काटने की योजना बना रही है।
क्या है सरकार का नया प्लान?
रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के तहत बांटे जाने वाले शॉर्ट-टर्म कृषि लोन पर इंटरेस्ट सब्सिडी को 50 बेसिस प्वाइंट्स (0.50%) तक कम करने के लिए बैंकों के साथ गहन बातचीत कर रही है। सीधे शब्दों में कहें तो, सरकार बैंकों को अपनी जेब से जो पैसा भरपाई के रूप में देती थी, अब उसमें से 0.50% की कटौती करना चाहती है।
'इंटरेस्ट सब्सिडी' क्या बला है?
KCC के जरिए किसानों (Farmers) को 3 लाख रुपये तक का लोन 7% सालाना ब्याज पर मिलता है। अगर किसान समय पर लोन चुका देता है, तो उसे 3% की अतिरिक्त छूट (Prompt Repayment Incentive) मिलती है। यानी किसान के लिए ब्याज दर सिर्फ 4% रह जाती है। अब चूंकि बैंक किसानों को इतने सस्ते में लोन दे रहे हैं, तो उनके नुकसान की भरपाई कौन करेगा? यहीं एंट्री होती है सरकार की। सरकार बैंकों को नुकसान से बचाने के लिए अपनी तरफ से 1.5% से 2% तक का 'इंटरेस्ट सबवेंशन' (सब्सिडी) देती है।
अब क्या होगा?
अगर सरकार बैंको को दी जाने वाली सब्सिडी में 0.50% की कटौती कर देती है, तो यह पैसा लॉस में नहीं जाएगा इसे निकालने के दो रास्ते हैं:
1. सरकार बैंकों पर दबाव डाले कि वह इस 0.50% का नुकसान खुद बर्दाश्त करें और अपने मुनाफे (मार्जिन) को कम करें।
2. अगर बैंक यह बोझ उठाने से मना कर देते हैं, तो मजबूरन किसानों के लिए KCC लोन पर ब्याज दरें बढ़ा दी जाएंगी। यानी जो लोन 4% पर मिलता था, वो थोड़ा महंगा हो सकता है।
फिलहाल वित्त मंत्रालय और सरकारी बैंकों के टॉप मैनेजमेंट के बीच इस मुद्दे पर बातचीत अंतिम दौर में है। बैंक अपनी तरफ से इस कटौती को टालने या कम करने की कोशिश कर रहे हैं।
