सर्च करे
Home
फोकस
विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

गन्ना क्रशिंग के नए सीजन से पहले मिलों के सामने नई समस्या, 100 फीसदी मजदूरी बढ़ाने की मांग! पेराई रोकने की चेतावनी

Published: Tue, 22 Sep 2026 12:47 PM (IST)

महाराष्ट्र में गन्ना पेराई सत्र शुरू होने से पहले ही चीनी मिलों के सामने नई समस्या खड़ी हो गई है, ...और पढ़ें

गन्ना पेराई से पहले मजदूरों की समस्या

गन्ना पेराई से पहले मजदूरों की समस्या

HighLights

  1. गन्ना मजदूरों ने 100% मजदूरी और ढुलाई दरें मांगी।

  2. मांगें पूरी न होने पर पेराई रोकने की चेतावनी दी।

  3. जल्दी पेराई से किसानों को रिकवरी घटने का डर।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| देश में चीनी की महंगाई और सप्लाई पर समस्या के बीच केंद्र सरकार ने समय से पहले क्रशिंग शुरू करने के निर्देश दिए थे। हालांकि समय से पहले पेराई शुरू करने के निर्णय के बीच मिलों के सामने नई समस्या देखने को मिल रही है। महाराष्ट्र में राज्य सरकार ने इस साल का गन्ना पेराई सत्र 15 अक्टूबर से शुरू करने का फैसला किया है।

जब राज्य भर की चीनी मिलें आने वाले पेराई सीजन की तैयारी कर रही हैं, तो दूसरी तरफ गन्ना मजदूरों ने मजदूरी बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि कटाई और ढुलाई की दरों में 100 फीसदी की बढ़ोतरी किए बिना वह काम नहीं करेंगे। इसके अलावा किसान संगठन पेराई सीजन जल्दी शुरू करने का यह कह कर विरोध कर रहे हैं कि इससे रिकवरी दर कम होगी जिससे किसानों का नुकसान होगा।

क्रशिंग रोकने की चेतावनी

गन्ना कटाने और पेराई में काम करने वाले मजदूरों ने वेतन और दरों को दोगुना करने की मांग उठाई है। इसने गन्ना काटने और ढोने के साथ-साथ बैलगाड़ियों, कार्ट सेंटरों, मिनी-ट्रैक्टरों, ट्रकों और गन्ना ढोने में इस्तेमाल होने वाले अन्य साधनों की दरों में भी 100% बढ़ोतरी की मांग है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक महाराष्ट्र में गन्ना काटने और ढोने वाले मजदूरों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक संगठन ने चीनी मिलों को चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगे पूरी नहीं की गईं, तो क्रशिंग का काम रुक सकता है।

सुरक्षा बीमा की भी मांग

वेतन और संसाधनों में बढ़ोतरी के साथ ही मजदूर संगठन ने अनिवार्य बीमा कवर की मांग भी की है। उनका कहना है कि गन्ना कटाई के दौरान किसी दुर्घटना में मरने वाले मजदूर के परिवार को कम से कम ₹10 लाख का मुआवजा दिया जाए। नए वेतन समझौते पर बातचीत में न केवल कटाई और ढुलाई की दरें शामिल होनी चाहिए, बल्कि मजदूरों और उनके परिवारों की सामाजिक सुरक्षा और वित्तीय सुरक्षा भी शामिल होनी चाहिए।

ये भी पढ़ें: कभी पुर्जे-पुर्जे के लिए विदेशों पर निर्भर था भारत, आज चीन को बेच रहा 9.61 अरब डॉलर के इलेक्टॉनिक्स उत्पाद

जल्दी पेराई करने से घटेगी रिकवरी

दूसरी ओर माना जा रहा है अगर पेराई सीजन जल्दी शुरू किया जाता है, तो गन्ने की रिकवरी 1 से 1.5 प्रतिशत तक घट सकती है। इससे किसानों को प्रति टन करीब ₹500 तक का नुकसान होने की आशंका है। मीडिया में छपी रिपोर्ट्स की मानें तो चीनी की न्यूनतम बिक्री कीमत (MSP) बढ़ाकर ₹5,000 करने और एथेनॉल की कीमत में ₹70 रुपये की बढ़ोतरी करने सहित विभिन्न मांगों को लेकर 10 अक्टूबर को गन्ना परिषद आयोजित की जाएगी। इसी परिषद में आगे के आंदोलन पर भी बात होनी है।