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    क्रूड ऑयल, LNG से PNG तक, सब हो रहा खत्म! युद्ध से सप्लाई पर बड़ा संकट; पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस, क्या-क्या होगा महंगा?

    Updated: Thu, 05 Mar 2026 02:40 PM (IST)

    Middle East War Impact: मिडिल ईस्ट युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बाधित होने से भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा संकट आ गया है। ए ...और पढ़ें

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    नई दिल्ली| मिडिल ईस्ट युद्ध का असर भारत पर गहराने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz closure India) में जहाजों की आवाजाही बाधित होने से LNG, गैस और कच्चे तेल की सप्लाई पर बड़ा संकट (Iran war impact on India oil prices) खड़ा हो गया है।

    हालात ऐसे हैं कि पेट्रोल से लेकर रसोई गैस, पाइप्ड गैस (PNG) और उद्योगों तक ऊर्जा की पूरी सप्लाई चेन दबाव में आ गई है। अगर तनाव लंबा चला तो भारत में ईंधन महंगा होने और कई उद्योगों के प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

    LNG सप्लाई को सीधा झटका

    भारत की सबसे बड़ी लिक्विफाइड नेचुरल गैस यानी एलएनजी (LNG) आयातक कंपनी पेट्रोनेट LNG ने अपने प्रमुख सप्लायर कतर एनर्जी (Qatar Energy force majeure LNG India) को फोर्स मेज्योर नोटिस जारी किया है।

    इसके साथ ही कंपनी ने अपने खरीदारों गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिडेट (GAIL), इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और भारत पेट्रोलियम (BP) को भी फोर्स मेज्योर की सूचना दी है।

    कतर एनर्जी ने भी संकेत दिया है कि युद्ध की वजह से उसे LNG उत्पादन रोकना पड़ सकता है। इसका मतलब साफ है कि भारत को मिलने वाली गैस सप्लाई (Middle East conflict India gas supply) में कटौती हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक संभावित कमी को देखते हुए भारत में कुछ सेक्टरों को गैस सप्लाई पहले ही घटा दी गई है।

    बड़ा सवालः फोर्स मेज्योर क्या होता है?

    फोर्स मेज्योर कॉन्ट्रैक्ट की एक ऐसी शर्त होती है जिसमें युद्ध, प्राकृतिक आपदा, दंगे या महामारी जैसे असाधारण हालात में कंपनियां अपनी सप्लाई की जिम्मेदारी से अस्थायी रूप से मुक्त हो सकती हैं। इस मामले में इसका मतलब है कि कतर भारत को तय मात्रा में LNG देने में असमर्थ हो सकता है और पेट्रोनेट भी अपने ग्राहकों को गैस नहीं दे पाएगा।

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    भारत की गैस जरूरत पर बड़ा खतरा

    भारत अपनी प्राकृतिक गैस जरूरत का लगभग आधा हिस्सा LNG आयात से पूरा करता है। इसमें भी आधे से ज्यादा LNG कतर और UAE से आता है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है।

    यह 22 मील का संकरा समुद्री रास्ता ईरान और ओमान के बीच स्थित है और वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है। दुनिया के लगभग 20% तेल और LNG का कारोबार इसी रास्ते से होता है।

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    जहाजों की आवाजाही लगभग ठप

    ईरान ने चेतावनी दी है कि होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर हमला किया जा सकता है। कुछ जहाजों पर हमले की खबरों के बाद बीमा कंपनियां, ट्रेडिंग हाउस और शिपिंग कंपनियां जोखिम लेने से बच रही हैं। नतीजा यह हुआ कि इस मार्ग से समुद्री ट्रैफिक लगभग ठप हो गया है। इसी वजह से LNG और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है।

    कतर ने रोका LNG उत्पादन

    ईरान के हमलों के बाद कतर की कुछ गैस सुविधाएं भी निशाने पर आईं। इसके बाद कतर ने अस्थायी तौर पर LNG उत्पादन रोक दिया। इससे भारत समेत कई देशों के लिए गैस सप्लाई पर बड़ा खतरा पैदा हो गया है।

    भारत के पास कितने दिन का स्टॉक

    भारत के पास फिलहाल कच्चे तेल और ईंधन का स्टॉक 6 से 8 हफ्ते का बताया जा रहा है। लेकिन LNG के मामले में स्थिति उतनी मजबूत नहीं है क्योंकि गैस का बड़े पैमाने पर स्टॉक करना मुश्किल होता है।

    पेट्रोलियम मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक अगर कतर का उत्पादन 7 से 10 दिन में बहाल हो जाता है तो स्थिति संभाली जा सकती है। लेकिन अगर संकट लंबा चला तो भारत को सप्लाई मैनेजमेंट और वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करनी पड़ेगी।

    उद्योगों को गैस सप्लाई में कटौती

    इंडस्ट्री सूत्रों के अनुसार संभावित कमी को देखते हुए GAIL ने कुछ सेक्टरों में गैस सप्लाई 40% तक घटा दी है। आगे हालात बिगड़ने पर ऐसे उद्योगों की सप्लाई और घटाई जा सकती है जो दूसरे ईंधन पर भी काम कर सकते हैं।

    CNG और PNG पर भी असर संभव

    सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के संगठन ACE ने भी चेतावनी दी है कि LNG सप्लाई कम होने से CNG और पाइप्ड गैस की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। हालांकि घरेलू गैस उत्पादन से CNG और घरेलू PNG की सप्लाई का बड़ा हिस्सा आता है, लेकिन कुल मांग का करीब 43% हिस्सा आयातित LNG से पूरा होता है।

    ACE ने GAIL के चेयरमैन दीपक गुप्ता को पत्र लिखकर कहा है कि गैस की निरंतर उपलब्धता पर स्पष्टता दी जाए ताकि देशभर में छोटे उपभोक्ताओं तक ऊर्जा सप्लाई जारी रखी जा सके।

    क्रूड ऑयल 200 डॉलर तक जाने की चेतावनी

    इससे पहले ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड के जनरल इब्राहिम जब्बारी ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान के मुख्य ठिकानों पर हमला हुआ तो पूरे क्षेत्र के आर्थिक केंद्रों को निशाना बनाया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया गया है और तेल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है।

    तनाव बढ़ने के बाद ब्रेंट क्रूड 85 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जो जुलाई 2024 के बाद पहली बार है।

    भारत में क्या-क्या हो सकता है महंगा?

    अगर तेल 200 डॉलर तक पहुंचता है तो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमत 200 रुपए प्रति लीटर के आसपास जा सकती है। तेल महंगा होने का असर सिर्फ ईंधन तक सीमित नहीं रहेगा। ट्रांसपोर्ट महंगा होगा, जिससे दूध, सब्जी, रोजमर्रा का सामान और निर्माण लागत सब पर असर पड़ेगा।

    यानी मिडिल ईस्ट का युद्ध अब धीरे-धीरे भारत की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब तक पहुंचने लगा है। अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो ऊर्जा संकट और महंगाई दोनों का खतरा और बढ़ सकता है।

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