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मोदीनगर तो सब जानते हैं, मगर ओखला की 'मोदी मिल्स' का मालिक कौन? यहां से दिल्ली में घर-घर तक पहुंचता था आटा!

Published: Thu, 03 Sep 2026 10:15 AM (IST)Updated: Sun, 06 Sep 2026 10:54 AM (IST)

दिल्ली की प्रसिद्ध मोदी फ्लोर मिल्स का इतिहास 1936 में राय बहादुर गूजरमल मोदी ने शुरू किया था। यह मिल ...और पढ़ें

कितना पुराना है मोदी मिल्स का इतिहास?

कितना पुराना है मोदी मिल्स का इतिहास?

HighLights

  1. गूजरमल मोदी ने 1936 में दिल्ली की मोदी फ्लोर मिल्स की नींव रखी

  2. ओखला में स्थित, कभी दिल्ली की सबसे बड़ी आटा मिल थी

  3. वर्तमान में उमेश मोदी ग्रुप द्वारा संचालित, आटा, मैदा, सूजी की सप्लाई

नई दिल्ली। अगर आप दिल्ली-नोएडा, मेरठ, बागपत या मुजफ्फनगर में रहते हैं या कभी इन रास्तों से देहरादून-मसूरी की तरफ गए हैं, तो आप ऐतिहासिक शहर मोदीनगर के बारे में जरूर जानते होंगे। मोदीनगर का इतिहास (Modinagar History) काफी दिलचस्प है। मोदी ग्रुप के फाउंडर गूजरमल मोदी (Gujarmal Modi) थे, जिनके नाम पर इस सिटी का नाम मोदीनगर पड़ा।
ये तो हुई मोदीनगर की बात, मगर दिल्ली में मौजूद है मोदी आटा मिल्स (Modi Flour Mills)। शायद आप नहीं जानते होंगे कि इसका मालिक कौन है और किसने इसकी शुरुआत की। आइए इस ऐतिहासिक मिल्स का इतिहास भी जानते हैं।

ओखला में है मोदी मिल्स

दिल्ली (ओखला) में स्थित प्रसिद्ध 'मोदी मिल्स' (Modi Flour Mills) के असली मालिक देश का जाना-माना औद्योगिक घराना मोदी ग्रुप (गूजरमल मोदी का परिवार) हैं। वर्तमान में इस मिल का संचालन मुख्य रूप से उमेश कुमार मोदी (Umesh Kumar Modi) और उनके परिवार से जुड़े बोर्ड (जैसे सुरेश कुमार मोदी) के हाथों में है।

कितना पुराना है इतिहास?

इस मिल (Modi Flour Mills) की नींव राय बहादुर गूजरमल मोदी ने साल 1936 में रखी थी। एक जमाने में यह दिल्ली की सबसे बड़ी आटा मिलों में से एक थी, जो पूरी दिल्ली में आटा, मैदा और सूजी की सप्लाई करती थी।
मोदी फ्लोर मिल्स शहर की रोजमर्रा की जिंदगी में एक अहम भूमिका निभाती थी। यह राजधानी भर के घरों, बेकरियों और रेस्टोरेंट में ताजा आटा सप्लाई करती थी।

लोकेशन और पहचान

यह मिल दक्षिण दिल्ली के ओखला इंडस्ट्रियल एरिया (फेज-3) में स्थित है। दिल्ली में रहने या सफर करने वाले लोग इसे 'मोदी मिल फ्लाईओवर' या बस स्टैंड के लैंडमार्क के नाम से अच्छी तरह जानते हैं।

कैसे होता था काम?

समय के साथ मोदी मिल्स की चमक फीकी पड़ती गई। वरना एक समय था जब पूरे उत्तर भारत से रोज इन मिल्स में हजारों टन गेहूं पहुंचता था। फिर उसकी सफाई, पिसाई और पैकिंग होती और उसे दिल्ली और आस-पास के इलाकों में भेजा जाता।
आज भी यहां से मैदा, सूजी/रवा और पशु आहार (चोकर) की सप्लाई होती है। ओखला इंडस्ट्रियल एस्टेट स्थित मोदी फ्लोर मिल के पास अपने ग्राहकों की अलग-अलग जरूरतों को पूरा करने के लिए कई तरह के प्रोडक्ट्स और/या सर्विसेज उपलब्ध हैं।

पारिवारिक बंटवारा

1989 में जब मोदी परिवार के बिजनेस साम्राज्य का बंटवारा हुआ, तब अलग-अलग कंपनियों की कमान गूजरमल मोदी के बेटों और भाइयों में बंट गई। दिल्ली की यह मोदी फ्लोर मिल्स मुख्य रूप से उमेश मोदी ग्रुप के नियंत्रण वाले हिस्से में आई।

मोदी ग्रुप की शुरुआत कैसे हुई?

गुजरमल मोदी 9 अगस्त 1902 को जन्मे थे। वे एक भारतीय उद्योगपति थे। 1932 में गूजरमल ने अपने भाई केदार नाथ के साथ मिलकर 'मोदी ग्रुप' ऑफ कंपनीज की शुरुआत की। उन्होंने औद्योगिक शहर मोदीनगर की स्थापना की, जिसका नाम तब बेगमाबाद था।
मोदीनगर में एक चीनी मिल के साथ मोदी ग्रुप की शुरुआत हुई, जो बाद में अलग-अलग सेक्टर्स में फैल गया।

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