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Pepe, Levis को टक्कर देने वाला मुफ्ती ब्रांड, सिर्फ ₹10 हजार से इस शख्स ने की शुरुआत; आज कितना बड़ा कारोबार?

Published: Wed, 23 Sep 2026 12:55 PM (IST)

Success Story: कमल खुशलानी ने 1998 में मात्र ₹10,000 के उधार से मुफ्ती ब्रांड की शुरुआत की, जिसने विदेशी ब्रांड्स को चुनौती दी।

सिर्फ ₹10 हजार से इस शख्स ने की शुरुआत

सिर्फ ₹10 हजार से इस शख्स ने की शुरुआत

HighLights

  1. कमल खुशलानी ने ₹10,000 से मुफ्ती ब्रांड शुरू किया।

  2. विदेशी ब्रांड्स को टक्कर देकर भारतीय फैशन में जगह बनाई।

  3. आज मुफ्ती का कारोबार ₹498 करोड़ से अधिक का है।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली: 90 के दशक में जब भारत में जींस और कैजुअल वियर का मतलब सिर्फ Levi's, Lee और Wrangler जैसे विदेशी ब्रांड्स हुआ करता था, तब एक भारतीय युवा ने इस विदेशी दबदबे को चुनौती देने की ठानी। बिना किसी फैशन डिग्री और भारी-भरकम पूंजी के, इस शख्स ने महज ₹10,000 उधार लेकर एक ऐसा ब्रांड खड़ा कर दिया, जो आज देश के युवाओं की पहली पसंद बन चुका है। यहां बात हो रही है मुफ्ती (Mufti) ब्रांड के फाउंडर कमल खुशलानी (Kamal khushlani) की जिन्होंने 0 से शुरू करके करोड़ों का फैशन साम्राज्य खड़ा कर दिया।

संघर्ष के शुरुआती दिन

कमल खुशलानी का बचपन काफी संघर्षों में बीता। जब वह महज 19 साल के थे, तब उन्होंने अपने पिता को खो दिया। परिवार की जिम्मेदारी और कुछ बड़ा करने की चाहत में उन्होंने फैशन इंडस्ट्री में कदम रखने का फैसला किया। लेकिन उनके पास न तो पैसे थे और न ही कपड़ों के बिजनेस का कोई अनुभव।

साल 1998 में, कमल ने अपनी एक रिश्तेदार से महज 10,000 रुपये उधार लिए और चंकी प्रिंट वाले शर्ट्स बनाने का काम शुरू किया। शुरुआती दिनों में वह खुद एक भारी भरकम बैग में शर्ट्स भरकर अपनी बाइक से मुंबई के अलग-अलग बुटीक और दुकानों में जाते थे। उन्होंने हार नहीं मानी और धीरे-धीरे दुकानदारों को उनके डिजाइन्स पसंद आने लगे।

नाम मुफ्ती (Mufti) ही क्यों रखा?

अक्सर लोग मुफ्ती नाम सुनकर इसे कोई विदेशी या मध्य-पूर्वी ब्रांड समझ लेते हैं। लेकिन कमल ने यह नाम बहुत सोच-समझकर रखा था। औपनिवेशिक काल (colonial Era) में सशस्त्र बलों द्वारा अपनी ड्यूटी के बाद पहने जाने वाले कैजुअल और आरामदायक कपड़ों को 'मुफ्ती' कहा जाता था। कमल एक ऐसा ब्रांड बनाना चाहते थे जो पारंपरिक फॉर्मल वियर और बोरिंग कपड़ों की 'यूनिफॉर्म' से युवाओं को आजादी दिलाए और उन्हें एक 'एजी' (Edgy) और स्टाइलिश कैजुअल लुक दे।

डेनिम मार्केट में एंट्री

शर्ट्स में सफलता मिलने के बाद कमल ने समझ लिया था कि युवाओं को कुछ नया चाहिए। 2000 के दशक की शुरुआत में मुफ्ती ने डेनिम (Jeans) मार्केट में कदम रखा। मुफ्ती की जींस अपनी खास फिटिंग, इनोवेटिव डिजाइन और पॉकेट फ्रेंडली होने के कारण युवाओं के बीच रातों-रात हिट हो गई। इसने Levis और Pepe जैसे स्थापित ब्रांड्स को कड़ी टक्कर दी और अपना एक अलग और लॉयल कस्टमर बेस तैयार कर लिया।

आज कितना बड़ा है मुफ्ती का कारोबार?

मई 2025 के आखिर तक, पूरे भारत में मुफ्ती का नेटवर्क 1,773 टचपॉइंट्स तक फैल चुका था, जिसमें 379 एक्सक्लूसिव ब्रांड आउटलेट्स (EBOs), 89 लार्ज फॉर्मेट स्टोर्स (LFSs) और 1,305 मल्टी-ब्रांड आउटलेट्स (MBOs) शामिल थे। वित्तीय नजरिए से, कंपनी का रेवेन्यू ₹618.2 करोड़ रुपये तक पहुंच गया और उसे ₹90.5 करोड़ रुपये का शानदार नेट प्रॉफिट हुआ।

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