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ये है 'शुगर बाउल ऑफ इंडिया'! मुजफ्फरनगर से दुबई और तंजानिया तक; सात समंदर पार पहुंच रही यूपी की चीनी

Updated: Sun, 16 Aug 2026 10:45 AM (IST)

पश्चिमी उत्तर प्रदेश का मुजफ्फरनगर 'भारत का शुगर बाउल' कहलाता है, जहाँ 11 चीनी मिलें और दुनिया का सबसे बड़ा गुड़ बाजार है। यह जिला गन्ना, चीनी, गुड़ और इथेनॉल उत्पादन में अग्रणी है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है।

ये है भारत का सबसे बड़ा चीनी उत्पादन क्षेत्र (AI फोटो)

ये है भारत का सबसे बड़ा चीनी उत्पादन क्षेत्र (AI फोटो)

HighLights

  1. मुजफ्फरनगर 'भारत का शुगर बाउल' और प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्र

  2. जिले में 11 चीनी मिलें और दुनिया का सबसे बड़ा गुड़ बाजार

  3. गन्ना, चीनी, गुड़, इथेनॉल उत्पादन स्थानीय अर्थव्यवस्था का आधार

नई दिल्ली। पश्चिमी उत्तर प्रदेश का मुजफ्फरनगर देश के प्रमुख गन्ना और चीनी उत्पादक क्षेत्रों में गिना जाता है। इसे आधिकारिक रूप से “शुगर बाउल ऑफ इंडिया” यानी “भारत का शुगर बाउल (कटोरा)” कहा जाता है। हालांकि चीनी उत्पादन के आंकड़े आम तौर पर शहर नहीं, पूरे मुजफ्फरनगर जिले के लिए जारी किए जाते हैं।
उपजाऊ गंगा-यमुना दोआब, पर्याप्त सिंचाई, गन्ने की बड़े पैमाने पर खेती और आसपास मौजूद चीनी मिलों ने इस क्षेत्र को चीनी उद्योग का बड़ा केंद्र बनाया है। जिले की अर्थव्यवस्था में कृषि और खास तौर पर गन्ने की महत्वपूर्ण भूमिका है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जिला प्रशासन के मुताबिक यहां 11 चीनी मिलें हैं, जो मुजफ्फरनगर और आसपास के इलाकों से गन्ना खरीदती हैं।

कितना गन्ना और चीनी उत्पादन?

मुजफ्फरनगर की चीनी अर्थव्यवस्था का पैमाना समझने के लिए 2024-25 का आंकड़ा महत्वपूर्ण है। इस सीजन में जिले की चीनी मिलों ने लगभग 94.7 लाख टन गन्ने की पेराई की और उससे करीब 9.6 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ।
यानी लगभग हर 100 टन गन्ने से करीब 10 टन चीनी की औसत प्राप्ति हुई। वहीं उत्तर प्रदेश के कृषि आंकड़ों के अनुसार 2024-25 में मुजफ्फरनगर जिले में लगभग 1.64 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती दर्ज की गई और गन्ने का उत्पादन करीब 1.51 करोड़ टन रहा।
इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिले में गन्ना केवल चीनी मिलों के लिए कच्चा माल नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, किसानों की आय, परिवहन और स्थानीय व्यापार का आधार भी है।

मुजफ्फरनगर में कितनी चीनी मिलें हैं?

जिले में चीनी उद्योग का नेटवर्क काफी बड़ा है। जिला प्रशासन की वर्तमान वेबसाइट के अनुसार यहां 11 चीनी मिलें हैं। इनमें टीकौला, आईपीएल, टिटावी, त्रिवेणी की खतौली इकाई, मंसूरपुर, उत्तम की खैखेड़ी इकाई, भैसाना और मोरना जैसी मिलें शामिल हैं।
इन मिलों के साथ डिस्टिलरी, एथेनॉल, बिजली उत्पादन और शीरे जैसे सह-उत्पादों का कारोबार भी जुड़ा है। उदाहरण के लिए टीकौला मिल के रिकॉर्ड में गन्ना पेराई, चीनी उत्पादन, शीरा और एथेनॉल उत्पादन की सुविधाओं का उल्लेख मिलता है।


मुजफ्फरनगर में गन्ना कहां-कहां से आता है?

मुजफ्फरनगर की चीनी मिलों को गन्ना केवल शहर के आसपास के खेतों से ही नहीं मिलता, बल्कि जिले के ग्रामीण क्षेत्रों और आसपास के जिलों से भी आपूर्ति होती है। 2025-26 के लिए गन्ना आवंटन की रिपोर्ट के अनुसार मुजफ्फरनगर की मिलों को मेरठ, शामली और बागपत के किसानों से भी गन्ना मिलने वाला है।
यह व्यवस्था इसलिए जरूरी है क्योंकि बड़ी मिलों की पेराई क्षमता के लिए विशाल मात्रा में गन्ने की जरूरत होती है। जिले के प्रमुख गन्ना क्षेत्र खतौली, बुढ़ाना, टिटावी, मंसूरपुर, मोरना और आसपास के ग्रामीण इलाकों में फैले हैं।
गन्ने की खरीद के लिए मिलों की ओर से विभिन्न क्रय केंद्र बनाए जाते हैं, जहां किसान अपनी फसल पहुंचाते हैं और वहां से गन्ना मिल तक भेजा जाता है।

चीनी और गुड़ का कारोबार

मुजफ्फरनगर की पहचान केवल आधुनिक चीनी मिलों तक सीमित नहीं है। यह क्षेत्र भारत के सबसे बड़े गुड़ व्यापार केंद्रों में भी शामिल है। जिला प्रशासन मुजफ्फरनगर के गुड़ बाजार को दुनिया का सबसे बड़ा गुड़ बाजार बताता है। यहां गन्ने से चीनी के साथ-साथ गुड़, खांडसारी, शीरा और एथेनॉल जैसे उत्पाद भी तैयार होते हैं।
इसका मतलब है कि एक ही गन्ने की फसल से किसानों और उद्योगों के लिए कई तरह के आर्थिक अवसर पैदा होते हैं। जिले के आसपास गन्ने की खेती का विस्तार, चीनी मिलों का नेटवर्क और गुड़ की मंडियां मिलकर एक ऐसा कृषि-औद्योगिक तंत्र बनाती हैं, जिसमें किसान से लेकर ट्रांसपोर्टर, मिल कर्मचारी, व्यापारी और निर्यातक तक जुड़े हुए हैं।


कहां होता है निर्यात?

मुजफ्फरनगर उत्तर प्रदेश के उस बड़े चीनी उद्योग का हिस्सा है, जिसकी चीनी निर्यात के जरिए विदेशों तक पहुंचती है। 2024 में भारत ने कच्ची गन्ना चीनी का निर्यात मुख्य रूप से तंजानिया, जिबूती, केन्या, थाईलैंड और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों को किया।
व्यापक चीनी श्रेणी में लीबिया, सूडान, सोमालिया, श्रीलंका, बांग्लादेश, मलेशिया और यूएई भी प्रमुख बाजार रहे। इस तरह मुजफ्फरनगर का महत्व केवल घरेलू चीनी आपूर्ति तक सीमित नहीं है। इसकी मिलें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विशाल गन्ना क्षेत्र से जुड़कर भारत की चीनी अर्थव्यवस्था और वैश्विक व्यापार में योगदान देती हैं।

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