सर्च करे
Home
फोकस
विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 07, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

MSME के लिए नया क्रेडिट मूल्यांकन मॉडल, जानिए लोन प्रोसेस पर क्या होगा असर

Published: Fri, 07 Mar 2025 01:32 PM (IST)

MSME को लोन देने के लिए बैंक अब थर्ड पार्टी या टर्नओवर डेटा पर निर्भर नहीं रहेंगे। नया क्रेडिट मूल्यांकन ...और पढ़ें

इस मॉडल को अपनाने से लोन के लिए MSME को बैंक में या कहीं भी जाने की जरूरत नहीं होगी।
इस मॉडल को अपनाने से लोन के लिए MSME को बैंक में या कहीं भी जाने की जरूरत नहीं होगी।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। Micro, Small and Medium Enterprises (MSME) को लोन देने के लिए बैंक अब किसी थर्ड पार्टी या उनके टर्नओवर की जानकारी पर निर्भर नहीं रहेंगे। बैंक बाहरी मूल्यांकन पर निर्भरता के बजाय अपनी आंतरिक क्षमता विकसित करेंगे। यह पूरी तरह से डिजिटल और डेटाबेस पर आधारित होगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने गुरुवार को नया क्रेडिट मूल्यांकन मॉडल लॉन्च किया। चालू वित्त वर्ष 2024-25 के लिए पिछले साल जुलाई में पेश बजट में इस प्रकार के मॉडल को अपनाने की घोषणा की गई थी।

इस मॉडल को अपनाने से लोन के लिए MSME को बैंक में या कहीं भी जाने की जरूरत नहीं होगी। वे इस मॉडल से कहीं से भी लोन के लिए आवेदन कर सकते हैं और किसी प्रकार की कागजी कार्रवाई भी नहीं करनी होगी। इस माध्यम को अपनाने का यह भी फायदा होगा कि डिजिटल माध्यम से लोन की तत्काल सैद्धांतिक मंजूरी मिलेगी।

ऋण प्रस्तावों को बिना किसी बाधा के आगे बढ़ाया जा सकेगा, परिचालन व सेवा प्रदान करने में कम समय लगेगा और डाटा के आधार पर निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से लोन दिए जा सकेंगे। क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज के अंतर्गत लोन के लिए कोई जमानत देने की भी आवश्यकता नहीं होगी। नए मॉडल के तहत आवेदनकर्ता का डिजिटल और सत्यापन योग्य उपलब्ध डेटा का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे एमएसएमई से जुड़े नए उद्यमियों को भी लोन लेने में आसानी होगी।

नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड के उपयोग से नाम और पैन का सत्यापन किया जाएगा, ओटीपी की मदद से ई-मेल और फोन नंबर का सत्यापन होगा, इनकम टैक्स रिटर्न, बैंक स्टेटमेंट से वित्तीय विश्लेषण होगा। एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (एपीआई) की मदद से आवेदक की कमर्शियल व उपभोक्ता जानकारी ली जाएगी। डिजिटल डेटा की मदद से आवेदक की छवि की जांच कर ली जाएगी।

यह भी पढ़ें : दलहन संकट: दाल का भंडार खाली, सरकार की बढ़ी चिंता; क्या अब कीमतों में आएगा उछाल?