भारत की मदद से भूटान चला इतिहास बनाने! 7 साल से अटके 1200 MW के सबसे बड़े हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट पर लगी मुहर
भारत और भूटान के द्विपक्षीय ऊर्जा सहयोग में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। भूटान की 1,200 मेगावाट की पुनात्सांगछू-1 ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
भाषानई दिल्ली। भारत और भूटान के द्विपक्षीय संबंधों और ऊर्जा सहयोग की दिशा में एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। भूटान की प्रतिष्ठित 1,200 मेगावाट क्षमता वाली 'पुनात्सांगछू-1' (Punatsangchhu-1) जलविद्युत परियोजना पर सात साल के लंबे निलंबन के बाद काम फिर से शुरू हो गया है। भारत के ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने 10 अप्रैल को अपनी भूटान यात्रा के दौरान इस परियोजना स्थल का दौरा किया और कंक्रीट डालने के समारोह में शामिल होकर बांध निर्माण की औपचारिक शुरुआत की।
7 साल से क्यों अटका हुआ था इस महाप्रोजेक्ट का काम?
इस अहम परियोजना का काम साल 2019 से ही भूगर्भीय चुनौतियों (Geological challenges) के कारण रोक दिया गया था। जमीन और पहाड़ों की भौगोलिक स्थिति से जुड़ी तकनीकी दिक्कतों को सुलझाने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के बाद, अब इस पर दोबारा काम शुरू किया गया है। सात साल बाद निर्माण कार्य का फिर से शुरू होना दोनों देशों के द्विपक्षीय ऊर्जा सहयोग में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।
भारत-भूटान के रिश्तों के लिए यह परियोजना इतनी महत्वपूर्ण क्यों है?
यह प्रोजेक्ट भारत और भूटान के बीच अब तक का सबसे बड़ा संयुक्त जलविद्युत उपक्रम है, जिसे पूरी तरह से भारत द्वारा वित्तपोषित (Fund) किया जा रहा है। ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने समारोह के दौरान कहा कि यह परियोजना भारत-भूटान के मजबूत और गहरे ऊर्जा संबंधों का एक शानदार उदाहरण है। उन्होंने भारत के वित्तीय व तकनीकी सहयोग और निर्माण कार्य को सुरक्षित रूप से आगे बढ़ाने के दोनों देशों के संयुक्त प्रयासों की सराहना की।
कब तक बनकर तैयार होगा यह बांध और क्या होगा फायदा?
सुरक्षित रूप से निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने की नई रणनीति के तहत, इस विशाल बांध के अगले पांच वर्षों के भीतर पूरी तरह से बनकर तैयार होने की उम्मीद है। 1,200 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता वाला यह प्रोजेक्ट पूरा होने पर भूटान की जलविद्युत क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि करेगा। इससे न केवल भूटान की अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलेगी, बल्कि दक्षिण एशिया में स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) के विकास में भी यह एक अहम भूमिका निभाएगा।
