तो क्या US Fed के बाद अब RBI भी नहीं घटाएगा ब्याज दर? गिरते रुपये और बॉन्ड मार्केट पर ले सकता है बड़े फैसले
यूएस फेडरल रिजर्व द्वारा दरों को अपरिवर्तित रखने के बाद, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी फरवरी की मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट (Repo rate) में कटौती न क ...और पढ़ें

आरबीआई के रेपो रेट में कटौती करने की संभावना कम

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नई दिल्ली। हाल ही में यूएस फेडरल रिजर्व (US Fed) ने दरों में कटौती या बढ़ोतरी न करते हुए, बेंचमार्क फंड रेट को 3.5%-3.75% की रेंज में बरकरार रखा। इस कदम ने लगातार तीन बार रेट में कटौती के सिलसिले को रोक दिया और यह इस बात का संकेत हो सकता है कि सेंट्रल बैंक जल्द ही फिर से राहत देने के मूड में नहीं है। इस बीच ये भी अनुमान लगाया जा रहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) भी रेपो रेट में कटौती नहीं करेगा। अगर ऐसा होता है तो लोन सस्ता होने की संभावना कम हो जाती है। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक 4 से 6 फरवरी के बीच आयोजित होने वाली है। अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, इस बैठक में आरबीआई (RBI) नीतिगत ब्याज दरों में कटौती पर फिलहाल विराम लगाने की उम्मीद है। हालांकि केंद्रीय बैंक लिक्विडिटी, बॉन्ड बाजार की स्थिरता और करेंसी से जुड़े जोखिमों को संभालने के लिए सीधे कदम उठा सकता है।
फिलहाल कितनी है रेपो रेट?
आरबीआई फरवरी 2025 से अब तक रेपो रेट में कुल 125 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर चुका है, जिससे रेपो रेट (Repo Rate) घटकर 5.25 प्रतिशत पर आ गया है। डीबीएस बैंक की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और सीनियर इकोनॉमिस्ट राधिका राव ने कहा कि सरकार अपने फिस्कल कंसोलिडेशन (राजकोषीय घाटा कम करने) के रास्ते पर बनी हुई है, इसलिए मौद्रिक नीति की दिशा में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है।
एमपीसी ने दिसंबर 2025 में ब्याज दरें घटाई थीं, लेकिन फरवरी की बैठक में और कटौती से बचा जा सकता है। राधिका राव ने कहा कि इस तिमाही और अप्रैल-जून 2026 के दौरान आरबीआई बॉन्ड खरीद जारी रख सकता है।
आर्थिक ग्रोथ बरकरार
राव के अनुसार वित्त वर्ष 2027 के बजट में सरकार की उधारी रिकॉर्ड स्तर पर रहने की बात कही गई है, इसलिए आरबीआई मनी मार्केट से जुड़े कदमों में सतर्कता बरतते हुए उधारी की लागत को काबू में रखना चाहेगा। व्यापार से जुड़े तनाव के बावजूद आर्थिक ग्रोथ बनी हुई है, लेकिन महंगाई अब अपने निचले स्तर से ऊपर आ चुकी है।
वहीं, रुपया लगातार दबाव में है और नए निचले स्तर पर पहुंच रहा है। इसके अलावा, बैंकों के लिए डिपॉजिट जुटाना भी एक चुनौती बना हुआ है। अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, यूनियन बजट 2026 अर्थव्यवस्था की स्थिरता बनाए रखता है और नीतियों में निरंतरता दिखाता है। फिस्कल कंसोलिडेशन जारी रहेगा, जिसमें केंद्र सरकार का कर्ज-से-जीडीपी अनुपात करीब 0.5 प्रतिशत घटने और फिस्कल डेफिसिट 4.3 प्रतिशत पर आने का अनुमान है।
"आरबीआई है सतर्क"
राधिका राव ने कहा कि रेवेन्यू डेफिसिट और प्राइमरी डेफिसिट में और सुधार हो सकता है। साथ ही, ब्याज दरों में और कटौती करने से रेट-सेंसिटिव पोर्टफोलियो निवेश (विदेशी निवेश) बाहर जा सकता है, इसलिए आरबीआई सतर्क है।
आरबीआई ने हाल ही में लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए कई उपायों की घोषणा की है, जिसके तहत बैंकिंग सिस्टम में 2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम डाली जाएगी। इसके लिए ओपन मार्केट में बॉन्ड खरीद, फॉरेन एक्सचेंज स्वैप और वेरिएबल रेट रेपो ऑपरेशन का इस्तेमाल किया जाएगा। ये कदम मौजूदा लिक्विडिटी और वित्तीय हालात की समीक्षा के बाद उठाए गए हैं।
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6.6 लाख करोड़ रुपए की लिक्विडिटी डाली
एसबीआई रिसर्च के मुताबिक, आरबीआई ने रेपो रेट में 125 बेसिस प्वाइंट की कटौती की है और चालू वित्त वर्ष में ओएमओ के जरिए 6.6 लाख करोड़ रुपए की लिक्विडिटी डाली है। इसके बावजूद बॉन्ड यील्ड में ज्यादा गिरावट नहीं आई है, क्योंकि लिक्विडिटी का असर बाजार के सभी हिस्सों में बराबर नहीं पड़ा।
एसबीआई रिसर्च का सुझाव है कि आरबीआई को ऐसे बॉन्ड में ओएमओ करना चाहिए जो ज्यादा लिक्विड हों, ताकि यील्ड पर सही असर दिखे। उदाहरण के तौर पर, आरबीआई मौजूदा 10 साल के 6.48 प्रतिशत (2035) बॉन्ड की बजाय 6.33 प्रतिशत (2035) वाले पुराने 10 साल के बॉन्ड में ओएमओ कर सकता है।