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Samudra Manthan Scheme: अब तेल-गैस के लिए खाड़ी देशों के भरोसे नहीं रहेगा भारत, ₹84084 करोड़ में बनाया मास्टर प्लान

Published: Fri, 31 Jul 2026 05:31 PM (IST)Updated: Fri, 31 Jul 2026 06:00 PM (IST)

भारत सरकार ने कच्चे तेल आयात पर निर्भरता कम करने के लिए 'समुद्र मंथन स्कीम' को मंजूरी दी है। इस ...और पढ़ें

समुद्र मंथन स्कीम के लिए भारत खर्च करेगा ₹84084 करोड़

समुद्र मंथन स्कीम के लिए भारत खर्च करेगा ₹84084 करोड़

HighLights

  1. कच्चे तेल आयात निर्भरता घटाने को भारत की नई रणनीति।

  2. 'समुद्र मंथन स्कीम' को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दी मंजूरी।

  3. योजना पर 2030-31 तक 84,084 करोड़ रुपये होंगे खर्च।

नई दिल्ली| भारत सरकार विदेशों से आने किए जाने वाले कच्चे तेल से आयात निर्भरता घटाने के लिए अपनी तैयारी तेज कर दी है। हाल ही में मिडिल ईस्ट में हुए तनाव के चलते ईंधन और ऊर्जा की सप्लाई में आने वाली समस्या से सबक लेते हुए भारत ने अपनी रणनीति मजबूत कर ली है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने समुद्री तेल एवं गैस खोज को बढ़ावा देने के लिए शुक्रवार को राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना ‘समुद्र मंथन स्कीम’ को मंजूरी दी। इस योजना पर वित्त वर्ष 2030-31 तक 84,084 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तहत लागू की जाने वाली यह योजना समुद्री अन्वेषण से जुड़ी पूरी वैल्यू चैन में व्यापक हस्तक्षेपों को शामिल करती है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में लिए गए इस फैसले की जानकारी मीडिया को दी। 

60 करोड़ टन से अधिक तेल गैस के भंडार

भारत सरकार का उद्देश्य क्रूड और गैस के आयात बिल को कम करना और विदेशी निर्भरता को घटाना है। इसके लिए केंद्र सरकार ने समुद्री तेल और गैस की खोज में तेजी दिखाई है। सरकार के मुताबिक, ‘समुद्र मंथन’ योजना से 60 करोड़ टन से ज्यादा तेल एवं गैस के नए भंडार मिलने की उम्मीद है। इससे समुद्री क्षेत्र में खोज गतिविधियों में तेजी आएगी, घरेलू तेल एवं गैस उत्पादन बढ़ेगा और बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होगा।

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निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद

सरकार का मानना है कि समुद्र मंथन स्कीम ना सिर्फ तेल-गैस की आपूर्ति के लिए विदेशी निर्भरता को कम करेगा बल्कि इस योजना से अन्वेषण (exploration) और उत्पादन क्षेत्र में बड़े निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। जिससे उद्योग, नए इनोवेशन और लंबे समय में आर्थिक वृद्धि के लिए अवसर पैदा होंगे।

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