यूरोप से हुई डील, मगर US के बाद अब ये BRICS देश भारत पर लगा सकता है टैरिफ; मगर क्यों?
भारत और ईयू ने फ्री-ट्रेड एग्रीमेंट पूरा करने की घोषणा की, जिसे 'मदर ऑफ डील्स' कहा जा रहा है। इससे दोनों पक्ष उत्पादों पर टैरिफ कम करेंगे। हालांकि, इस ...और पढ़ें

साउथ अफ्रीका लगा सकता है भारतीय वाहनों पर टैरिफ

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नई दिल्ली। भारत और यूरोपीय यूनियन (ईयू) ने 27 जनवरी को फ्री-ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) के लिए बातचीत पूरी करने का एलान कर दिया। इस एफटीए को ''मदर ऑफ डील्स'' यानी सबसे बड़ा ट्रेड समझौता कहा जा रहा है। इस समझौते के तहत भारत यूरोप से आने वाले कई उत्पादों पर टैक्स (टैरिफ) कम या खत्म करेगा। यही काम यूरोपीय देश भारतीय उत्पादों के लिए करेंगे। ये भारत के विभिन्न सेक्टरों के लिए अच्छी खबर है। मगर इसी बीच एक बुरी खबर भी आई है। एक और देश भारतीय उत्पादों पर टैरिफ लगा सकता है। ये देश BRICS समूह का हिस्सा है।
साउथ अफ्रीका लगा सकता है टैरिफ
ये देश है साउथ अफ्रीका, जो चीन के साथ-साथ भारत से आने वाली गाड़ियों पर 50% तक टैरिफ लगाने पर विचार कर रहा है। ऐसा ये अपने ऑटोमोटिव इंडस्ट्री को आयातित वाहनों से बचाने के लिए करने की सोच रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार देश का ट्रेड, इंडस्ट्री और कॉम्पिटिशन डिपार्टमेंट एक इंटरनल रिव्यू कर रहा है ताकि आने वाले शिपमेंट को रोकने के लिए संभावित उपायों का आकलन किया जा सके।
इन शिपमेंट्स के बारे में पॉलिसीमेकर्स का कहना है कि वे लोकल मैन्युफैक्चरिंग को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
भारत से कितना होता है निर्यात?
चीन, भारत और दक्षिण अफ्रीका विकासशील देशों वाले BRICS ग्रुप का हिस्सा हैं, जो सदस्य देशों के बीच व्यापार संबंधों को गहरा करने की दिशा में काम कर रहा है। मगर साउथ अफ्रीका की नई योजना इसके विपरीत मानी जा रही है। बता दें कि चीन और भारत (जिन्हें दुनिया के दो सबसे बड़े मैन्युफैक्चरिंग हब कहा जाता है) से साउथ अफ्रीका निर्यात होने वाले वाहनों का हिस्सा 2024 में देश के कुल वाहन आयात में क्रमशः 53% और 22% रहा।
वाहनों की संख्या में बढ़ोतरी
डेटा के अनुसार पिछले चार सालों में चीन से साउथ अफ्रीका भेजे गए वाहनों की संख्या में 368% और भारत से 135% की बढ़ोतरी हुई है। मार्केट के एंट्री-लेवल सेगमेंट में मुकाबला सबसे ज्यादा कड़ा रहा है, जिसमें कम कीमत वाले इंपोर्ट्स ने घरेलू प्रोड्यूसर्स के लिए मार्जिन कम कर दिया है।
ट्रेड डिपार्टमेंट संभावित टैक्स उपायों पर नेशनल ट्रेजरी से बातचीत कर सकता है, जिसमें नई लग्जरी कारों पर एक्साइज ड्यूटी लगाना और रिबेट क्रेडिट सर्टिफिकेट कैसे काम करते हैं, इसकी समीक्षा करना शामिल है।