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Tata Sons में चंद्रशेखरन की तीसरी पारी पर कानूनी मुहर, नोएल टाटा के क्लेम को किसने किया रिजेक्ट; अब क्या होगा?

Published: Thu, 24 Sep 2026 10:44 PM (IST)Updated: Thu, 24 Sep 2026 10:47 PM (IST)

टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच एन चंद्रशेखरन की तीसरी बार चेयरमैन पद पर नियुक्ति को लेकर विवाद गहरा ...और पढ़ें

TATA Sons ने नोएल टाटा के क्लेम को किया रिजेक्ट

TATA Sons ने नोएल टाटा के क्लेम को किया रिजेक्ट

HighLights

  1. टाटा संस ने चंद्रशेखरन की नियुक्ति पर कानूनी राय दी।

  2. नोएल टाटा के विरोध को टाटा संस ने कानूनी आधार पर नकारा।

  3. पूर्व जजों ने चेयरमैन के कास्टिंग वोट को नियमों के अनुरूप बताया।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच विवाद और भी गहराता जा रहा है। टाटा संस ने एन चंद्रशेखरन को तीसरी बार चेयरमैन के तौर पर फिर से नियुक्त करने के खिलाफ नोएल टाटा के विरोध को खारिज कर दिया है। टाटा संस ने 17 सितंबर को हुई बोर्ड मीटिंग में पास हुए प्रस्ताव पर अपने रुख को सही ठहराने के लिए तीन कानूनी राय भेजी हैं। यह कदम टाटा ट्रस्ट्स की ओर से पिछले हफ्ते हुई हंगामेदार बोर्ड मीटिंग के बाद पूछे गए सवालों के जवाब में उठाया गया है।

इन कानूनी रायों में बोर्ड द्वारा 17 सितंबर 2026 को लिए गए फैसले को कंपनी के Articles of Association यानी कंपनी के आंतरिक नियमों के अनुरूप बताया गया है।

पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस बी. एन. श्रीकृष्ण और जस्टिस उदय यू. ललित ने भी चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति से जुड़े बोर्ड के फैसले और चेयरमैन के कास्टिंग वोट को नियमों के तहत उचित माना है।

कास्टिंग वोट को लेकर क्या है विवाद?

यह विवाद आर्टिकल 121 से जुड़ा है। इसके तहत, बोर्ड के जिन फैसलों को डायरेक्टर्स के बहुमत से लिया जाता है, उनमें आर्टिकल 104B (जो टाटा ट्रस्ट्स के नॉमिनी से जुड़ा प्रावधान है) के तहत नियुक्त डायरेक्टर्स के बहुमत की सहमति भी जरूरी होती है। आर्टिकल 121 में यह भी प्रावधान है कि "वोट बराबर होने की स्थिति में" चेयरमैन के पास कास्टिंग वोट का अधिकार होगा।

चंद्रशेखरन ने अपनी दोबारा नियुक्ति के लिए जिन पांच डायरेक्टरों ने वोट दिया, उनमें से चार ने प्रस्ताव का समर्थन किया - इनमें ट्रस्ट के नॉमिनी वेणु श्रीनिवासन भी शामिल थे - जबकि ट्रस्ट के दूसरे नॉमिनी नोएल टाटा ने इसका विरोध किया। मीटिंग की अध्यक्षता कर रहे हरीश मनवानी ने, दोनों नॉमिनी के बीच वोट बंटने (एक-एक वोट मिलने) के बाद, कास्टिंग वोट का इस्तेमाल किया।

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टाटा संस के पास सीनियर एडवोकेट सुदीप्तो सरकार की एक पुरानी राय भी है, जिसमें AoA के तहत चेयरमैन के कास्टिंग वोट के दायरे और नए चेयरमैन को चुनने की प्रक्रिया के बारे में बताया गया है।

जस्टिस उदय यू. ललित के अनुसार, Articles of Association के आर्टिकल 104B के तहत नियुक्त निदेशकों के बीच वोट बराबर होने की स्थिति में चेयरमैन के पास कास्टिंग वोट इस्तेमाल करने का आधार मौजूद था।

सिलेक्शन कमेटी की जरूरत पर भी सवाल

इस मामले में एक अहम सवाल यह था कि क्या चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के लिए सिलेक्शन कमेटी की प्रक्रिया जरूरी थी। वरिष्ठ अधिवक्ता सुदीप्तो सरकार की राय के मुताबिक, आर्टिकल 118 में सिलेक्शन कमेटी का प्रावधान एक नए चेयरमैन के चयन से संबंधित है। इसलिए किसी मौजूदा चेयरमैन को एक और कार्यकाल देने के मामले में इस प्रावधान को लागू करना जरूरी नहीं माना जा सकता।

गौरतलब है कि चंद्रशेखरन को 2022 में भी दूसरे पांच साल के कार्यकाल के लिए बोर्ड के प्रस्ताव के जरिए दोबारा चेयरमैन बनाया गया था। उस समय भी सिलेक्शन कमेटी के जरिए नई नियुक्ति नहीं हुई थी।

जस्टिस बी. एन. श्रीकृष्ण ने निदेशकों की जिम्मेदारी को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उनके अनुसार, किसी संस्था द्वारा नामित निदेशक की कंपनी के प्रति कानूनी जिम्मेदारी होती है। साथ ही, नामित करने वाली संस्था के प्रति भी उसकी कुछ जिम्मेदारियां हो सकती हैं।

अगर इन दोनों जिम्मेदारियों में टकराव होता है, तो कंपनी के प्रति कानूनी जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसी आधार पर जस्टिस बी. एन. श्रीकृष्ण ने वेनु श्रीनिवासन के चंद्रशेखरन के पक्ष में मतदान को उचित बताया।

टाटा ट्रस्ट्स की अलग राय

हालांकि, टाटा ट्रस्ट्स ने बोर्ड के इस फैसले पर आपत्ति जताई है। ट्रस्ट्स का कहना है कि उनके नामित निदेशकों के समर्थन से जुड़ी शर्त पूरी नहीं हुई और चेयरमैन का कास्टिंग वोट उस आवश्यकता को खत्म नहीं कर सकता।

इस तरह विवाद का मुख्य मुद्दा अब सिलेक्शन कमेटी की भूमिका, ट्रस्ट्स के नामित निदेशकों के वोट और चेयरमैन के कास्टिंग वोट की वैधता पर केंद्रित है। टाटा संस के पक्ष में आई कानूनी रायों ने कंपनी के रुख को स्पष्ट किया है, जबकि टाटा ट्रस्ट्स ने इस मामले पर अपनी अलग कानूनी स्थिति बरकरार रखी है।

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