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    Tata Group News: एन चंद्रशेखरन छोड़ सकते हैं टाटा संस का चेयरमन पद, क्यों नहीं थम रहा टाटा ग्रुप में मचा घमासान?

    Updated: Wed, 12 Aug 2026 08:37 AM (IST)

    टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन 18 अगस्त की सालाना आम बैठक से पहले पद छोड़ने पर विचार कर रहे हैं, क्योंकि उनके दोबारा डायरेक्टर बनने पर अनिश्चितता ...और पढ़ें

    एन चंद्रशेखरन छोड़ सकते हैं टाटा संस

    एन चंद्रशेखरन छोड़ सकते हैं टाटा संस

    HighLights

    1. चंद्रशेखरन 18 अगस्त की एजीएम से पहले पद छोड़ सकते हैं

    2. नोएल टाटा चेयरमैन के बने रहने के विरोधी माने जा रहे हैं

    3. समूह में नेतृत्व बदलाव और अनिश्चितता का दौर जारी है

    नई दिल्ली। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने अपने करीबी सहयोगियों के साथ 18 अगस्त को होने वाली सालाना आम बैठक (AGM) के नतीजों का सामना करने के बजाय पद छोड़ने की संभावना पर चर्चा की है। AGM में अब एक हफ़्ते से भी कम समय बचा है, लेकिन कई अहम सवालों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिसमें यह सवाल भी शामिल है कि क्या बैठक हो भी पाएगी या नहीं।
    यह बैठक चंद्रशेखरन के लिए बहुत अहम होने जा रही है क्योंकि भले ही चेयरमैन के तौर पर उनका कार्यकाल फरवरी 2027 तक है, लेकिन तब तक बने रहने के लिए उन्हें टाटा संस के बोर्ड में डायरेक्टर के तौर पर फिर से नियुक्त होना जरूरी है।

    नोएल टाटा हैं विरोधी?

    टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा को चंद्रशेखरन के बने रहने का विरोधी माना जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एजीएम से पहले ही चंद्रशेखरन पद से इस्तीफा दे सकते हैं। साथ ही, इस गुरुवार को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में AGM में वोटिंग को लेकर ट्रस्ट कैसे वोट करेंगे, इस पर स्पष्टता नहीं है और सर रतन टाटा ट्रस्ट का भविष्य भी अनिश्चित है।
    ऐसे में AGM के नतीजों को तय करने वाले कई कारक हैं जो लगातार बदल रहे हैं और किसी एक संस्था के नियंत्रण में नहीं हैं। सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) को फिलहाल महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने सभी तरह के फैसले लेने से रोक रखा है।

    क्या टाटा ग्रुप में होगा बदलाव?

    अगर 18 अगस्त को बैठक होती है और नतीजा चंद्रशेखरन के पक्ष में नहीं रहता है, तो उनकी चेयरमैनशिप अचानक और कड़वाहट भरे तरीके से खत्म हो सकती है। इससे भारत का सबसे बड़ा बिजनेस ग्रुप अचानक और बिना किसी योजना के लीडरशिप बदलाव के दौर में चला जाएगा।
    कानून के मुताबिक, अगर AGM नहीं हो पाती है, तो कंपनी इसे छह महीने के लिए टालने की मांग कर सकती है। लेकिन कई कॉर्पोरेट कानून विशेषज्ञों के अनुसार, क्या कोई डायरेक्टर जिसे शेयरहोल्डर्स द्वारा फिर से नियुक्त किया जाना है, वह इस बीच पद पर बना रह सकता है या नहीं, यह रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज की मर्जी और कंपनी के 'आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन' (AoA) के प्रावधानों पर निर्भर करता है।

    रिअपॉइंटमेंट के लिए लगी थी मुहर

    चंद्रशेखरन के मामले में जिस संभावना पर विचार किया जा रहा है, वह घटनाओं का एक अनचाहा नतीजा हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि नोएल टाटा समेत सभी ट्रस्टियों ने लगभग एक साल पहले ही सर्वसम्मति से उनके लिए अगले पांच साल के कार्यकाल की सिफारिश करने का फैसला किया था।
    इस साल 24 फरवरी को टाटा संस बोर्ड ने उनकी दोबारा नियुक्ति के फैसले को टाल दिया था, क्योंकि टाटा ने नए बिजनेस के परफॉर्मेंस को लेकर कुछ चिंताएं जताई थीं। टाटा, चंद्रशेखरन के लिए दो साल के एग्जीक्यूटिव कार्यकाल के पक्ष में भी थे, जो एग्जीक्यूटिव भूमिकाओं के लिए ग्रुप की 65 साल की रिटायरमेंट उम्र के अनुरूप होता।

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    रतन टाटा के बाद मची है उथल-पुथल

    चेयरमैन की डायरेक्टर के तौर पर दोबारा नियुक्ति को लेकर बनी अनिश्चितता, उन उथल-पुथल भरी घटनाओं की कड़ी में एक और घटना है, जिनका सामना ग्रुप को 2024 के आखिर में ग्रुप के लंबे समय तक मुखिया रहे रतन टाटा के निधन के बाद से करना पड़ रहा है।
    तब से, ट्रस्टियों के बीच आपसी मतभेद, कई ट्रस्टियों का ग्रुप छोड़ना, और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ बैठकें जैसी कई घटनाएं हुई हैं। इन अधिकारियों ने ट्रस्टियों से कहा था कि वे ग्रुप के बिजनेस ऑपरेशन्स को अपने आपसी मतभेदों से दूर रखें।

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