सर्च करे
Home
फोकस

Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    ये 7 भारतीय CEO होंगे डोनाल्ड ट्रंप के रिसेप्शन में शामिल, जानें कौन कितनी बड़ी कंपनी को रहा संभाल

    Updated: Wed, 21 Jan 2026 01:06 PM (IST)

    दावोस समिट (Davos Summit 2026) में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) भारतीय बिजनेस लीडर्स की मेजबानी करेंगे। टाटा संस, भारती एंटरप्राइजे ...और पढ़ें

    दावोस 2026 समिट में 7 भारतीय CEO होंगे शामिल

    दावोस 2026 समिट में 7 भारतीय CEO होंगे शामिल

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    नई दिल्ली। दुनिया के बड़े पॉलिटिकल और बिजनेस लीडर्स दावोस समिट 2026 (Davos Summit 2026) में इकट्ठा हो रहे हैं। इनमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी शामिल हैं। ट्रंप बुधवार को एक हाई-लेवल रिसेप्शन होस्ट करने से पहले एक भाषण देंगे। जिन लोगों को इसके लिए इनवाइट किया गया है, उनमें भारत के सात प्रभावशाली बिजनेस लीडर्स शामिल हैं। आइए जानते हैं कि इन 7 लीडर्स में सबसे अमीर कौन है।

    रिसेप्शन में शामिल होने वाले भारतीय एग्जीक्यूटिव्स

    1. टाटा संस के चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन
    2. भारती एंटरप्राइजेज के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल
    3. विप्रो के CEO श्रीनि पल्लिया
    4. इंफोसिस के CEO सलिल एस पारेख
    5. बजाज फिनसर्व के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर संजीव बजाज
    6. महिंद्रा ग्रुप के ग्रुप चीफ एग्जीक्यूटिव अनीश शाह
    7. जुबिलेंट भारतीय ग्रुप के फाउंडर और को-चेयरमैन हरि एस भारतीय

    किसके पास कितनी दौलत?

    चेयरमैन/सीईओ/चीफ एग्जीक्यूटिव कंपनी मार्केट कैपिटल (करोड़ रुपये)
    नटराजन चंद्रशेखरन टाटा संस 328 लाख
    सुनील भारती मित्तल एयरटेल 11,37,998

    सलिल एस पारेख

    इंफोसिस 6,86,372
    अनीश शाह महिंद्रा ग्रुप 6.70 लाख
    संजीव बजाज बजाज फिनसर्व

    3,13,850

    श्रीनि पल्लिया विप्रो 2,50,951
    हरि एस भरतिया जुबिलेंट भारतीय ग्रुप 65000

    भारतीय CEO का जाना महत्वपूर्ण क्यों?

    भारतीय CEO का दावोस जाना ग्लोबल इकॉनमी में देश की बढ़ती भूमिका माना जा रहा है, क्योंकि कंपनियां और सरकारें तेजी से बदलते इंटरनेशनल माहौल के जवाब में सप्लाई चेन, टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप और इन्वेस्टमेंट फ्लो को रिव्यू कर रही हैं। अमेरिका और भारत के बीच एक नए ट्रेड फ्रेमवर्क पर बातचीत चल रही है। ऐसे में ट्रंप के दावोस कार्यक्रम में भारतीय मौजूदगी पर पॉलिसी बनाने वाले और इन्वेस्टर दोनों की नजर है।
    ट्रंप 6 साल बाद दावोस जा रहे हैं और वे ऐसे समय पर जब जियोपॉलिटिकल तनाव काफी बढ़ा हुआ है। हाल के हफ्तों में, वॉशिंगटन ने वेनेजुएला में एक बड़ा मिलिट्री ऑपरेशन शुरू किया, जिससे लैटिन अमेरिका में राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ गई है। वहीं ग्रीनलैंड को अमेरिकी कंट्रोल में लाने की ट्रंप की कोशिश ने पूरे यूरोप में खलबली मचा दी है। ऐसे में दावोस समिट से कुछ बड़े पहलू निकल सकते हैं।

    ये भी पढ़ें - डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक निचले लेवल पर फिसला रुपया, 91 के बाद अब कहां पहुंचा?