₹15.76 लाख करोड़ रिफंड करेगा US! 3 लाख से ज्यादा आयातकों को वापस मिलेगा पैसा; ट्रंप प्रशासन के लिए टेंशन
US कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए अवैध टैरिफ का रिफंड 11 मई के आसपास शुरू करने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने IEEPA के तह ...और पढ़ें

अमेरिका शुरू करेगा रिफंड

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नई दिल्ली। US कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में मंगलवार को दायर एक आदेश के अनुसार, संभावना जताई जा रही है कि ट्रंप प्रशासन 11 मई के आस-पास उन टैरिफ का पहला रिफंड देना शुरू कर देगा, जिन्हें US सुप्रीम कोर्ट ने गैर-कानूनी करार दिया था। जज रिचर्ड ईटन, जो रिफंड प्रोसेस की देखरेख कर रहे हैं, ने कहा कि प्रभावित इंपोर्ट एंट्रीज का एक हिस्सा पहले ही रीपेमेंट स्टेज में पहुँच चुका है।
अब तक कहां पहुंची रिफंड प्रोसेस?
इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए टैरिफ के दायरे में आने वाली लगभग 3% एंट्रीज को 'कंसोलिडेटेड एडमिनिस्ट्रेशन एंड प्रोसेसिंग ऑफ एंट्रीज' (CAPE) नाम के एक नए सिस्टम के जरिए निपटा दिया गया है। अब ये एंट्रीज रिफंड फेज में हैं, जिसमें US ट्रेजरी द्वारा पेमेंट किया जाना शामिल है।
फाइलिंग में बताया गया है कि CAPE प्रोसेस के तहत ड्यूटी हटाने के लिए लगभग 21% एंट्रीज स्वीकार कर ली गई हैं। 26 अप्रैल तक, लगभग 1.74 मिलियन स्वीकार की गई एंट्रीज का निपटारा कर दिया गया और इन्हें रिफंड दिया जा रहा था।
कितना टैरिफ गया है वसूला?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार रिफंड बहुत बड़े पैमाने पर हो सकता है। कोर्ट के दस्तावेजों से पता चलता है कि इस प्रोसेस में लगभग 53 मिलियन एंट्रीज के जरिए 330,000 से अधिक इंपोर्टर्स से वसूले गए लगभग $166 बिलियन (15.76 लाख करोड़ रुपये) के शुल्क शामिल हो सकते हैं।
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सुप्रीम कोर्ट के 20 फरवरी के फैसले के बाद रिफंड का मैकेनिज्म क्लियर नहीं है। कोर्ट के फैसले में कहा गया था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास IEEPA के तहत टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है, जिससे उन बिजनेस के लिए अनिश्चितता पैदा हो गई थी जो अपने पैसे वापस मिलने का इंतजार कर रहे थे।
US सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से ट्रंप के आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करके बड़े पैमाने पर टैरिफ लगाने के फैसले के खिलाफ़ फैसला सुनाया। इसे उनके प्रशासन की ट्रेड पॉलिसी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
कानून का हुआ दुरुपयोग
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि राष्ट्रपति ने IEEPA के तहत अपनी अधिकार सीमा का उल्लंघन किया है। यह 1977 का एक कानून है जिसका इस्तेमाल पारंपरिक रूप से प्रतिबंध लगाने और संपत्ति जब्त करने के लिए किया जाता रहा है, न कि बड़े पैमाने पर आयात शुल्क लगाने के लिए।