अनिल अग्रवाल का बड़ा प्लान, धरती में 1000 मीटर गहरा छेद कर सोना निकालेगी Vedanta; इस राज्य में उतारी देश की पहली मशीन!
Vedanta gold exploration: अनिल अग्रवाल की वेदांता ने भारत में सोने और महत्वपूर्ण खनिजों की खोज के लिए देश की पहली हाई-स्पीड पोर्टेबल रिग लॉन्च की है, जो 1000 मीटर तक गहराई में ड्रिल कर सकती है।
-1787591120011_m.webp)
अनिल अग्रवाल की वेदांता ने उतारी देश की पहली 1000 मीटर गहरी सोना और खनिज खोज रिग

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| अनिल अग्रवाल की कंपनी ने भारत में सोने (Vedanta gold exploration) और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की खोज के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। ग्लोबल मार्केट में बढ़ती भारी डिमांड और खनिजों के आयात पर भारत की निर्भरता को खत्म करने के इरादे से वेदांता ने देश की पहली हाई-स्पीड हाइड्रोस्टैटिक पोर्टेबल रिग लॉन्च कर दी है। यह अत्याधुनिक मशीन दुर्गम और पहाड़ी इलाकों में भी जमीन के अंदर 1000 मीटर तक गहराई में जाकर तेजी से सोने और क्रिटिकल मिनरल्स का पता लगा सकती है।
छत्तीसगढ़ से हुई शुरुआत, निशाने पर है 'सोना'
इस हाई-टेक ड्रिलिंग मशीन को फिलहाल छत्तीसगढ़ में वेदांता के दो प्रमुख एक्सप्लोरेशन प्रोजेक्ट्स (gold exploration in Chhattisgarh) में काम पर लगाया गया है। इस मिशन का मुख्य टारगेट सोने के अलावा निकेल, क्रोमियम और प्लैटिनम ग्रुप के तत्वों (PGE) की खोज करना है।
क्या है रिग की खासियत? आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली माइनिंग रिग्स सिर्फ 300 से 400 मीटर तक ही ड्रिल कर पाती हैं, लेकिन वेदांता की यह नई पोर्टेबल मशीन 1,000 मीटर की गहराई तक आसानी से जा सकती है।
समय और लागत की बचत: इसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाना काफी आसान है, जिससे खनिजों की खोज में लगने वाले समय की भारी बचत होती है। देश में एक्सप्लोरेशन के क्षेत्र में यह अपनी तरह की पहली पहल है।
वेदांता के पास हैं सबसे ज्यादा मिनरल ब्लॉक्स
भारत में क्रिटिकल मिनरल्स की खोज में अनिल अग्रवाल की वेदांता ने खुद को सबसे आगे कर लिया है। आज वेदांता देश की इकलौती ऐसी कंपनी है, जिसने सबसे ज्यादा 10 महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉक हासिल किए हैं। इन ब्लॉक्स में सोना, तांबा (Copper), मैंगनीज, टंगस्टन, ग्रेफाइट, वैनेडियम, रेयर अर्थ एलिमेंट्स और पोटाश जैसे बहुमूल्य खनिज शामिल हैं। कंपनी ने तेजी दिखाते हुए इनमें से 5 ब्लॉक्स में काम भी शुरू कर दिया है।
हाल ही में, वेदांता ने आंध्र प्रदेश के पुन्नम में एक बड़ा मैंगनीज ब्लॉक भी सफलतापूर्वक हासिल किया है।
क्यों जरूरी है यह कदम और क्या है 'वेदांता 2.0'?
सरकारी अनुमानों के मुताबिक,
भारत की धरती के नीचे मौजूद करीब 80% खनिज संसाधनों की अभी तक खोज ही नहीं हो पाई है। सोना जहां मेडिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री के लिए जरूरी है, वहीं तांबा और निकेल एआई (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर, इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EVs), डिफेंस और रिन्यूएबल एनर्जी की रीढ़ हैं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के मुताबिक, 2030 तक दुनिया भर में इन खनिजों की मांग तीन गुना और 2040 तक चार गुना (करीब 4 करोड़ टन सालाना) बढ़ने वाली है।"
इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कंपनी वेदांता 2.0 विजन पर काम कर रही है। इसका फोकस नई टेक्नोलॉजी और सस्टेनेबल माइनिंग पर है। वेदांता उन चुनिंदा भारतीय कंपनियों में से है, जिनका माइनिंग नेटवर्क भारत के अलावा दक्षिण अफ्रीका, नामीबिया, लाइबेरिया और जाम्बिया तक फैला है। यह नई पोर्टेबल रिग न सिर्फ वेदांता के लिए, बल्कि भारत के माइनिंग सेक्टर के लिए एक गेमचेंजर साबित होगी, जो देश को सोने और क्रिटिकल मिनरल्स के मामले में आत्मनिर्भर बनाएगी।
यह भी पढ़ें- धीरूभाई अंबानी के हाथ आकर भी कैसे निकल गई L&T? बनाना चाहते थे रिलायंस की सबसे बड़ी कंपनी; एलएडंटी की पूरी कहानी
