"सोने-तेल का आयात खत्म कर दूंगा", वेदांता वाले अनिल अग्रवाल का मास्टरप्लान; 24 सरकारी कंपनियों पर दिया ये फॉर्मूला
Anil Agarwal on Import Reduction: वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने भारत की आयात निर्भरता कम करने के लिए एक मास्टरप्लान ...और पढ़ें

"भारत से सोने-तेल का आयात खत्म कर दूंगा", अनिल अग्रवाल का मास्टरप्लान; 24 सरकारी कंपनियों पर कह दी बड़ी बात

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नई दिल्ली| "भारत मौजूदा एसेट्स के दम पर ही तेल, सोना, चांदी, कॉपर, फर्टिलाइजर समेत कई संसाधनों के आयात को काफी हद तक खत्म कर सकता है।"
ये कहना है वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल का, जिन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील का समर्थन किया, जिसमें विदेशी मुद्रा बचाने की बात कही गई है।
अनिल अग्रवाल (Anil Agarwal) ने कहा है कि भारत विदेशी आयात पर अपनी निर्भरता तेजी से घटा सकता है और इसके लिए सबसे बड़ा रास्ता देश में ही उत्पादन बढ़ाना है।
"...तो 50% पहुंच सकता है आंकड़ा"
अनिल अग्रवाल के मुताबिक, संकट और अनिश्चितता के इस दौर में भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती तेल और सोने का आयात है। ये दोनों मिलकर देश के कुल आयात का 30% से ज्यादा हिस्सा बनाते हैं। अगर जमीन के नीचे मिलने वाले दूसरे संसाधनों को भी जोड़ दिया जाए, तो यह आंकड़ा करीब 50% तक पहुंच जाता है।
उन्होंने कहा कि, भारत के पास मजबूत भू-संपदा और पहले से मौजूद बड़े एसेट्स हैं, जिनकी मदद से उत्पादन को बहुत तेजी से बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए दो बड़े फैसलों की जरूरत है- सरकारी कंपनियों का निजीकरण और क्लियरेंस प्रक्रिया में सेल्फ-सर्टिफिकेशन।
हिंदुस्तान जिंक और बाल्को पर क्या बोले?
अनिल अग्रवाल ने कहा कि जमीन के नीचे मिलने वाले संसाधनों से जुड़े सेक्टर में 24 सरकारी कंपनियां ऐसी हैं, जिनका निजीकरण किया जा सकता है। इससे उत्पादन कई गुना बढ़ेगा और बड़े स्तर पर रोजगार भी पैदा होंगे। उन्होंने खास तौर पर हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड (HZL) और BALCO का जिक्र करते हुए कहा कि इन कंपनियों में सरकार की हिस्सेदारी पूरी तरह बेचने से उत्पादन में बड़ा उछाल आ सकता है।
यह भी पढ़ें- 'बिना स्पीड ब्रेकर दौड़ेगी इकोनॉमी', वेदांता वाले अनिल अग्रवाल का बड़ा प्लान; बताया इस विजन से कैसे बदलेगा भारत?
"सिल्वर और लेड का उत्पादन शुरू किया"
उन्होंने कहा कि जब वेदांता ने साल 2002 में हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड का अधिग्रहण किया था, तब भारत जिंक के लिए आयात पर निर्भर था। लेकिन आज देश जिंक उत्पादन में आत्मनिर्भर है। उन्होंने दावा किया कि उसी एसेट बेस पर रिसर्च और डेवलपमेंट के जरिए सिल्वर और लेड का उत्पादन शुरू किया गया, जिसकी पहले कल्पना भी नहीं की गई थी। अब कंपनी रेयर अर्थ मिनरल्स पर भी काम कर रही है।
एल्यूमिनियम का उदाहरण देकर क्या बोले?
एल्यूमिनियम सेक्टर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि पहले उत्पादन सिर्फ 1 लाख टन था, जिसे बढ़ाकर अब 60 लाख टन तक ले जाने की प्रक्रिया चल रही है।
अनिल अग्रवाल ने भरोसा जताया कि भारत मौजूदा एसेट्स के दम पर ही तेल, सोना, चांदी, कॉपर, फर्टिलाइजर समेत कई संसाधनों के आयात को काफी हद तक खत्म कर सकता है।
उन्होंने कहा कि सरकार को निजी सेक्टर पर भरोसा करना चाहिए और उद्योग देश को आयात निर्भरता से बाहर निकालने का काम करेगा।
