कौन खरीदेगा ₹90 हजार करोड़ के कर्ज वाली Videocon, SC में हुई सुनवाई; JP Associates से पहले हुई थी दिवालिया
सुप्रीम कोर्ट ने वीडियोकॉन के संस्थापक वेणुगोपाल धूत की याचिका स्वीकार कर ली है, जिसमें NCLAT के उस आदेश को चुनौती दी गई है जो वीडियोकॉन की दो कंपनियो ...और पढ़ें

वीडियोकॉन की दो कंपनियों के दिवाला पर सुनवाई।
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने वेणुगोपाल धूत की याचिका स्वीकार की।
वीडियोकॉन की दो कंपनियों के दिवाला पर सुनवाई।
₹90,000 करोड़ के कर्ज का मामला सुप्रीम कोर्ट में।
नई दिल्ली। जिस तरह से जयप्रकाश गौड़ की जेपी एसोसिएट्स (JP Associates) दिवालिया होकर बिक चुकी है, ठीक उसी प्रकार वीडियोकॉन को लेकर दिवालिया प्रक्रिया चल रही है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। आज सुप्रीम कोर्ट ने वीडियोकॉन के फाउंडर वेणुगोपाल धूत की याचिका पर सुनवाई की और उसे स्वीकार कर लिया।
आपको बताते चलें कि जेपी एसोसिएट्स वीडियोकॉन के बाद दिवालिया हुई और बिक भी चुकि है। JP Associates को अदाणी ग्रुप ने खरीदा है। लेकिन अभी तक वीडियोकॉन को नया मालिक नहीं मिल सका। 2018 से ही उसकी दिवाला प्रक्रिया चल रही है, जो अब तक पूरी नहीं हो सकी है।
अब आपके मन में एक सवाल होगा कि आखिर पूरा मामला है क्या? आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर वीडियोकॉन की दिवालिया प्रक्रिया का मामला कहां अटका हुआ है।
वेणुगोपाल धूत ने NCLAT के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में किया है चैलेंज
वीडियोकॉन के फाउंडर वेणुगोपाल धूत ने NCLAT के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है जिसमें वीडियोकॉन ग्रुप (Videocon) की दो कंपनियों वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज लिमिटेड और वीडियोकॉन ऑयल वेंचर्स लिमिटेड के लिए अलग-अलग इनसॉल्वेंसी कार्यवाही को सही ठहराया था। लेकिन फाउंडर वेणुगोपाल धूत ने दोनों कंपनियों की दिवालिया प्रक्रिया एकसाथ चलाने के पक्ष में थे। इसके लिए उन्होंने तर्क भी दिया था।
वेणुगोपाल धूत पर आज सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने सुनवाई की। और नोटिस जारी कर मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त के लिए तय की।
नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने 14 मई के अपने आदेश में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के उस पहले के आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें दोनों मामलों को एक साथ जोड़ने का निर्देश दिया गया था। इसी के खिलाफ धूत सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं।
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बर्बाद हो चुकी वीडियोकॉन का दिवालिया प्रक्रिया का पूरा मामला क्या है?
बैंकक्रप्ट हो चुकी वीडियोकॉन की दो कंपनियों वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज लिमिटेड (VIL) और वीडियोकॉन ऑयल वेंचर्स लिमिटेड (VOVL) के खिलाफ दिवालिया प्रकिया शुरू होना है। अब इन दोनों को एकसाथ क्लब किया जाए या फिर अलग-अलग किया जाए। इसका निर्णय सुप्रीम कोर्ट करेगा।
इस पूरे मामले की शुरुआत फरवरी 2020 में हुई। फाउंडर वेणुगोपाल धूत ने वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज लिमिटेड की कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) में वीडियोकॉन ऑयल वेंचर लिमिटेड (VOVL) और उसकी विदेशी सब्सिडियरी कंपनियों की विदेशी तेल और गैस संपत्तियों को शामिल करने की मांग की।
धूत की इस याचिका को NCLT की मुंबई बेंच ने मंजूरी दी और निर्देश दिया कि वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज लिमिटेड की कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) में वीडियोकॉन ऑयल वेंचर लिमिटेड (VOVL) और उसकी विदेशी सब्सिडियरी कंपनियों की विदेशी तेल और गैस संपत्तियों को शामिल किया जाए।
NCLT के इस फैसले के खिलाफ स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और अन्य लेंडर्स (लोन देने वाले) ने फिर अपील की और इन कंपनियों के लिए अलग-अलग दिवाला प्रक्रिया शुरू करने की मांग की। लेंडर्स का तर्क था कि दोनों कंपनियों की कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) अलग-अलग चलें, क्योंकि उनके कारोबार अलग-अलग तरह के हैं और उनके लिए एक खास तरह के समाधान की जरूरत है। फिर NCLT ने लेंडर्स की बात मानी और अपने आदेश को बदल दिया।
NCLT के फैसले वेणुगोपाल धूत NCLAT पहुंचे। और नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल ने उनकी अपील खारिज कर दी। और 14 मई NCLT के पहले आदेश को जिसमें अलग-अलग दिवाला प्रक्रिया की बात कही गई थी रद कर दिया गया। इसी के खिलाफ धूत सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम पहुंचे हैं, जिस याचिका पर आज सुनवई हुई और आगे की सुनवाई के लिए इसे स्वीकार कर लिया गया।
वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज पर 90 हजार करोड़ का कर्ज
NCLT की मुंबई बेंच ने Videocon Industries Limited (VIL) से भारी बकाया राशि वसूलने के लिए कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) शुरू करने की अर्जी 2018 में स्वीकार की था। वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज और इसकी ग्रुप कंपनियों पर कुल लगभग 90 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है।
वीडियोकॉन के बिजनेस आपस में इतने जुड़े हुए थे कि NCLT ने वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज और ग्रुप की 12 अन्य कंपनियों की दिवालियापन की कार्यवाही को एक साथ करने का आदेश दिया।
NCLT ने ट्विन स्टार टेक्नोलॉजीज़ (जिसे वेदांता के अनिल अग्रवाल ने प्रमोट किया है) के रिजॉल्यूशन प्लान को मंज़ूरी दे दी। हालांकि, इस प्लान में लगभग ₹90 हजार करोड़ के स्वीकार किए गए दावों के बदले सिर्फ ₹2,962 करोड़ की पेशकश की गई थी।
भारी 'हेयरकट' (कर्ज में बड़ी कटौती) और लिक्विडेशन वैल्यू से जुड़ी गोपनीयता के उल्लंघन की चिंताओं को लेकर असहमति जताने वाले लेनदारों की अपील के बाद, नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने ट्विन स्टार रिजॉल्यूशन प्लान पर रोक लगा दी और आखिरकार उसे रद कर दिया।
2018 में शुरू होने के बावजूद, इसका समाधान अभी भी कानूनी विवादों में फंसा हुआ है। विवाद इस बात को लेकर है कि क्या इसकी अलग-अलग तरह की संपत्तियों (जैसे विदेशी तेल क्षेत्र और घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स) को एक साथ बेचा जाए या अलग-अलग हिस्सों में। अब मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है।