105 साल पहले 200 नींबुओं से शुरू हुआ था कारोबार, यूरोप-अमेरिका तक जाता है इनका अचार; परचून की दुकान से कैसे बना ग्लोबल ब्रांड?
वी.पी. बेडेकर एंड संस ने मुंबई की एक छोटी किराना दुकान से शुरुआत कर मसालों और अचार के कारोबार में ...और पढ़ें

परचून की दुकान से कैसे बना ग्लोबल ब्रांड? (ai photo)
HighLights
मुंबई में 1910 के आसपास किराना दुकान से हुई शुरुआत।
वासुदेव बेडेकर ने मसालों और अचार के कारोबार का विस्तार किया।
आज बेडेकर उत्पाद महाराष्ट्र से लेकर विदेशों तक पहुँचते हैं।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली: हमारे देश में कई ऐसी पुराने खाने-पीने के ब्रांड हैं, जिनके प्रोडक्ट्स का स्वाद जुबान से कभी नहीं हटता। आज भी यह कंपनीज लोगों की पहली पसंद हैं। ऐसी ही एक कंपनी मुंबई के गिरगांव की एक छोटी-सी किराना दुकान से शुरू हुई और आज मसाले, अचार, पापड़ और इंस्टेंट फूड्स के जरिए देश ही नहीं, विदेशों तक अपनी पहचान बना चुका है।
हम बात कर रहे हैं V.P. Bedekar & Sons की, जिसने 100 साल से ज्यादा लंबे सफर में पारंपरिक स्वाद को कारोबार का आधार बनाया और बदलते वक्त के साथ अपने प्रोडक्ट्स का दायरा भी बढ़ाया। कंपनी की शुरुआत 1910 के आसपास हुई थी।
किराना दुकान से मसालों तक पहुंचा कारोबार
रिकॉर्ड के मुताबिक, विश्वनाथ परशुराम बेडेकर (V.P. Bedekar) ने करीब 1905-1910 के दौर में मुंबई में किराना कारोबार शुरू किया था। उनके बेटे वासुदेव विश्वनाथ बेडेकर भी कम उम्र में कारोबार से जुड़ गए। शुरुआती करीब एक दशक में कारोबार से ज्यादा मुनाफा नहीं हो रहा था। इसके बाद वासुदेव बेडेकर ने कारोबार को नया रास्ता देने की कोशिश की और मसाले तथा अचार बनाने का काम शुरू किया।
जानकारी के मुताबिक, 1917 में मसालों का उत्पादन शुरू हुआ और 1921 में अचार के कारोबार में कदम रखा गया। अलग-अलग समुदायों की पसंद और स्वाद को ध्यान में रखते हुए मसालों के मिश्रण में बदलाव करना भी बेडेकर की रणनीति का हिस्सा रहा। इसी वजह से कारोबार धीरे-धीरे लोगों के बीच अपनी अलग पहचान बनाने लगा।
मुंबई से शुरू हुआ विस्तार
मसाले और अचार की मांग बढ़ने के साथ बेडेकर कारोबार ने मुंबई में अपने आउटलेट्स का विस्तार किया। थाकुरद्वार, परेल, दादर और फोर्ट जैसे इलाकों में दुकानें खुलीं। बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स भी बढ़ाई गईं। 1943 में कारोबार को V.P. Bedekar & Sons Private Limited के रूप में संगठित किया गया।
इस कारोबार की खास बात यह रही कि कंपनी ने सिर्फ पारंपरिक मसालों और अचार तक खुद को सीमित नहीं रखा। समय के साथ पापड़, चटनी, आटा, इंस्टेंट मिक्स और दूसरे फूड प्रोडक्ट्स भी इसके पोर्टफोलियो में शामिल होते गए। कंपनी की अपनी वेबसाइट भी बताती है कि इसका सफर पारंपरिक चटनी और आटे से लेकर फ्रोजन फूड और इंस्टेंट मिक्स तक पहुंचा है।
महाराष्ट्र से विदेशों तक पहुंचा बेडेकर
आज बेडेकर के प्रोडक्ट्स महाराष्ट्र के अलावा गुजरात, कर्नाटक, गोवा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में बिकते हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक कंपनी के प्रोडक्ट्स अमेरिका, कनाडा, मिडिल ईस्ट, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप और कुछ पूर्वी देशों तक भी पहुंच चुके हैं।
यानी जिस कारोबार की शुरुआत एक छोटी किराना दुकान से हुई थी, उसने धीरे-धीरे मसाले और अचार को अपनी पहचान बनाकर चार पीढ़ियों तक बिजनेस को आगे बढ़ाया। आज भी कंपनी परिवार की अगली पीढ़ियों के नेतृत्व में काम कर रही है।
