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TATA से 132 साल पहले इस शख्स ने बनाई भारत की पहली कंपनी, अंग्रेजों के लिए बनाए जहाज; मालिक का जिन्ना से नाता

Updated: Mon, 24 Aug 2026 07:34 AM (IST)

वाडिया ग्रुप भारत के सबसे पुराने कारोबारी घरानों में से एक है, जिसकी शुरुआत 1736 में जहाज निर्माण से हुई ...और पढ़ें

किसने शुरू की थी भारत की सबसे पुरानी कंपनी? (AI फोटो)

किसने शुरू की थी भारत की सबसे पुरानी कंपनी? (AI फोटो)

HighLights

  1. वाडिया ग्रुप की कारोबारी विरासत 1736 से शुरू हुई

  2. समूह की प्रमुख कंपनियां ब्रिटानिया और बॉम्बे डाइंग हैं

  3. नुस्ली वाडिया, मोहम्मद अली जिन्ना के नाती हैं

नई दिल्ली। भारत में जब सबसे पुराने कारोबारी घरानों की बात होती है तो आमतौर पर लोगों के जहन में टाटा, बिड़ला या बजाज जैसे नाम सामने आते हैं। लेकिन इनसे भी कहीं पुरानी कारोबारी विरासत वाडिया ग्रुप (Wadia Group History) की है। इसकी जड़ें साल 1736 (Oldest Company in India) तक जाती हैं, जब लोवजी नुसरवानजी वाडिया (Lovji Nusserwanjee Wadia) ने सूरत से जहाज निर्माण का कारोबार शुरू किया था।
करीब तीन सदियों बाद भी वाडिया परिवार भारतीय कारोबार की दुनिया में एक्टिव है। खास बात यह है कि इस परिवार का रिश्ता पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना के परिवार से भी जुड़ता है।

1736 में जहाज बनाने से हुई शुरुआत

वाडिया परिवार की कारोबारी कहानी 18वीं सदी के सूरत से शुरू होती है। लोवजी नुसरवानजी वाडिया को जहाज निर्माण में महारत हासिल थी। उन्होंने 1736 में समुद्री जहाज बनाने का काम शुरू किया और आगे चलकर उनका कारोबार ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए जहाज बनाने तक पहुंचा। ये कंपनी टाटा ग्रुप से भी 132 साल पुरानी है, जिसकी शुरुआत 1868 में हुई थी।
वाडिया ग्रुप के मुताबिक, उनकी शुरुआत Marine Construction से हुई थी और उन्होंने भारतीय शिपबिल्डिंग के इतिहास में महत्वपूर्ण जगह बनाई। यह वही दौर था जब मुंबई धीरे-धीरे एक बड़े बंदरगाह और व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित हो रही थी।

आज भी जारी है वाडिया परिवार का कारोबार

वाडिया ग्रुप की पहचान सिर्फ उसके पुराने इतिहास से नहीं है। आज यह समूह एफएमसीजी, रियल एस्टेट, टेक्सटाइल, केमिकल, प्लांटेशन और इंजीनियरिंग जैसे कई क्षेत्रों में मौजूद है। ग्रुप की प्रमुख कंपनियों में ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज, बॉम्बे डाइंग और बॉम्बे बर्मा ट्रेडिंग कॉरपोरेशन शामिल हैं।
वाडिया ग्रुप की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, बॉम्बे बर्मा की शुरुआत 1863 में हुई थी, जबकि बॉम्बे डाइंग और ब्रिटानिया भी एक सदी से ज्यादा पुरानी कारोबारी संस्थाएं हैं। यानी 1736 की विरासत आज अलग-अलग कंपनियों के रूप में आगे बढ़ रही है।

कौन है वाडिया ग्रुप का मालिक?

वाडिया ग्रुप किसी एक व्यक्ति की निजी कंपनी नहीं, बल्कि वाडिया परिवार से जुड़ा कारोबारी ग्रुप है। मौजूदा समय में नुस्ली एन. वाडिया इसके चेयरमैन हैं। उनका नेतृत्व वाडिया परिवार की कई पीढ़ियों से चली आ रही कारोबारी विरासत को आगे बढ़ाता है।
ग्रुप की कंपनियों में अलग-अलग शेयरहोल्डिंग और कॉरपोरेट संरचनाएं हैं, इसलिए पूरे समूह को सीधे किसी एक व्यक्ति की 100 फीसदी निजी संपत्ति नहीं कहा जा सकता। हालांकि वाडिया परिवार इसका प्रमुख नियंत्रक परिवार है।

जिन्ना से कैसे जुड़ा वाडिया परिवार?

वाडिया परिवार की कहानी को खास बनाने वाली सबसे दिलचस्प कड़ी मोहम्मद अली जिन्ना से जुड़ी है। जिन्ना की इकलौती संतान दीना जिन्ना ने पारसी कारोबारी परिवार के सदस्य नेविल वाडिया से शादी की थी। इस तरह दीना जिन्ना, वाडिया परिवार की बहू बनीं और जिन्ना का परिवार वाडिया परिवार से सीधे रिश्ते में आ गया।
यह शादी उस समय काफी चर्चित रही थी, क्योंकि जिन्ना की बेटी ने अपनी पसंद से शादी की थी। विभाजन के बाद भी नेविल और दीना वाडिया ने भारत में रहना चुना और वाडिया परिवार का कारोबार यहीं जारी रहा।

जिन्ना के नाती हैं नुस्ली वाडिया

इस रिश्ते की अगली कड़ी मौजूदा वाडिया चेयरमैन नुस्ली वाडिया तक पहुंचती है। नुस्ली वाडिया, नेविल वाडिया और दीना जिन्ना के बेटे हैं। यानी वे मोहम्मद अली जिन्ना के नाती हैं। यही वजह है कि भारत के पुराने कारोबारी परिवारों में वाडिया परिवार की कहानी इतिहास और कारोबार, दोनों लिहाज से असाधारण बन जाती है।
एक तरफ इसकी कारोबारी जड़ें 1736 के जहाज निर्माण तक जाती हैं, वहीं दूसरी तरफ परिवार का रिश्ता उस शख्स के परिवार से जुड़ा है, जिसने आगे चलकर पाकिस्तान की स्थापना में केंद्रीय भूमिका निभाई। करीब 300 साल की यह कारोबारी यात्रा बताती है कि बदलते राजनीतिक दौर, आजादी और विभाजन के बावजूद वाडिया परिवार ने भारत में अपने कारोबारी अस्तित्व को कायम रखा।

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