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    क्या भारत में आने वाला है प्लास्टिक नोटों का दौर? RBI गर्वनर के बयान के क्या हैं मायने; समझिए

    Updated: Fri, 05 Jun 2026 06:45 PM (IST)

    भारतीय रिजर्व बैंक भारत में प्लास्टिक नोट लाने पर विचार कर रहा है, जो वर्तमान कागजी नोटों की तुलना में अधिक टिकाऊ और सुरक्षित होंगे। यह पहल नोटों की उ ...और पढ़ें

    RBI भारत में प्लास्टिक नोट लाने पर कर रहा विचार

    RBI भारत में प्लास्टिक नोट लाने पर कर रहा विचार

    HighLights

    1. RBI भारत में प्लास्टिक नोट लाने पर कर रहा विचार।

    2. पॉलीमर नोट कागजी नोटों से अधिक मजबूत और सुरक्षित होते हैं।

    3. नकली नोटों पर अंकुश लगाने में मिलेगी मदद।

    नई दिल्ली। भारत में जल्द ही करेंसी नोटों का स्वरूप बदल सकता है। हो सकता है कि आने वाले समय में आप कागज की बजाए प्लास्टिक की नोट को देखें। वो भी भारत में। क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक भी भारत में प्लास्टिक नोट लाने की तैयारी में है। प्लास्टिक की नोटों को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा (RBI Governor Sanjay Malhotra) ने संकेत दिए हैं कि देश में पॉलीमर यानी प्लास्टिक (Plastic Note in India) से बने नोटों को लेकर विचार किया जा रहा है।

    हालांकि उन्होंने साफ किया है कि प्लास्टिक के नोटों का यह प्रस्ताव अभी शुरुआती चरण में है और इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर पॉलीमर नोट क्या होते हैं और RBI इन्हें क्यों लाने पर विचार कर रहा है।

    क्या होते हैं पॉलीमर नोट?

    वर्तमान में भारत में इस्तेमाल होने वाले नोट मुख्य रूप से कपास आधारित विशेष कागज से बनाए जाते हैं। वहीं पॉलीमर नोट एक खास प्रकार की प्लास्टिक सामग्री से तैयार किए जाते हैं। इन नोटों की शुरुआत सबसे पहले Australia में हुई थी और बाद में Canada, United Kingdom, New Zealand और Singapore जैसे कई देशों ने भी इन्हें अपनाया।

    इन नोटों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये सामान्य कागजी नोटों की तुलना में अधिक मजबूत होते हैं। पानी, नमी, धूल और बार-बार इस्तेमाल का इन पर कम असर पड़ता है, जिससे इनकी उम्र काफी बढ़ जाती है।

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    RBI क्यों कर रहा है प्लास्टिक नोट लाने का विचार?

    भारत जैसे विशाल देश में करेंसी नोटों का इस्तेमाल बहुत अधिक होता है। लगातार हाथों में आने-जाने और अलग-अलग मौसम की वजह से नोट जल्दी खराब हो जाते हैं। हर साल बड़ी संख्या में फटे, गंदे और क्षतिग्रस्त नोटों को बाजार से हटाकर नष्ट करना पड़ता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार पॉलीमर नोट सामान्य कागजी नोटों की तुलना में कम से कम दोगुना और कई मामलों में पांच गुना तक अधिक समय तक चल सकते हैं। इससे नए नोट छापने और पुराने नोटों को बदलने की लागत में भी कमी आ सकती है। लंबे समय में यह RBI के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद साबित हो सकता है।

    पॉलीमर नोटों का एक और बड़ा फायदा उनकी उन्नत सुरक्षा व्यवस्था है। इनमें पारदर्शी विंडो, होलोग्राम, रंग बदलने वाले तत्व और कई आधुनिक सुरक्षा फीचर्स जोड़े जा सकते हैं। इन्हें नकली बनाना पारंपरिक नोटों की तुलना में कहीं ज्यादा कठिन माना जाता है।

    भारत में समय-समय पर नकली करेंसी, विशेषकर 500 रुपये के नोटों को लेकर चिंता जताई जाती रही है। ऐसे में पॉलीमर नोट नकली नोटों की समस्या को कम करने में मददगार साबित हो सकते हैं।

    2007 में पॉलीमर नोटो को लेकर RBI ने की थी पहल

    भारत में पॉलीमर नोटों को लेकर चर्चा पहली बार नहीं हो रही है। RBI ने वर्ष 2007 में इस दिशा में पहल की थी। इसके बाद जयपुर, शिमला, भुवनेश्वर, मैसूर और कोच्चि जैसे शहरों में 10 रुपये के पॉलीमर नोटों के परीक्षण की योजना भी बनाई गई थी। हालांकि विभिन्न अध्ययन और तैयारियों के बावजूद यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी।

    बीते वर्षों में RBI ने नोटों की मजबूती बढ़ाने के लिए वार्निश कोटिंग वाले नोटों पर भी प्रयोग किया है, लेकिन अब एक बार फिर पॉलीमर नोटों की चर्चा तेज हो गई है।

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