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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 06, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    विश्व बैंक ने घटाया भारत के आर्थिक विकास का अनुमान, कहा- दूसरे देशों के मुकाबले फिर भी बेहतर हैं हालात

    By Siddharth PriyadarshiEdited By:
    Updated: Thu, 06 Oct 2022 08:20 PM (IST)

    विश्व बैंक ने कहा है कि पूरी दुनिया में मंदी का खतरा बढ़ रहा है लेकिन भारत की स्थिति काफी बेहतर है। कोरोना यूक्रेन युद्ध और कमोडिटी की कीमतों से निपटने ...और पढ़ें

    World Bank cuts India's economic growth forecast to 6.5 pc for FY22-23
    World Bank cuts India's economic growth forecast to 6.5 pc for FY22-23

    नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। विश्व बैंक ने खराब वैश्विक परिस्थितियों का हवाला देते हुए गुरुवार को वित्त वर्ष 2022-23 के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर केअनुमान में कटौती करते हुए 6.5 प्रतिशत की वृद्धि दर का अनुमान लगाया है। यह पिछले जून 2022 के अनुमान से एक प्रतिशत कम है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक की वार्षिक बैठक से पहले जारी अपने नवीनतम दक्षिण एशिया आर्थिक फोकस रिपोर्ट में विश्व बैंक ने कहा कि भारत दुनिया के बाकी हिस्सों की तुलना में मजबूत हो रहा है।

    दक्षिण एशिया के विश्व बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री हैंस टिमर ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने दक्षिण एशिया के अन्य देशों की तुलना में अच्छा प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि भारत के पास बाहरी ऋण का अधिक बोझ नहीं है, इस मोर्चे पर कोई समस्या नहीं है और भारत की मौद्रिक नीति भी विवेकपूर्ण है। भारतीय अर्थव्यवस्था ने विशेष रूप से सेवा क्षेत्र और इसके निर्यात में अच्छा प्रदर्शन किया है। पिछले वर्ष भारतीय अर्थव्यवस्था में 8.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

    बिगड़ रहे हैं हालात

    दक्षिण एशिया के लिए विश्व बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री हैंस टिमर ने कहा कि सभी मजबूत पक्षों के बावजूद भी हमने अभी शुरू हुए वित्तीय वर्ष के लिए पूर्वानुमान को घटा दिया है। इसका मुख्य कारण यह है कि भारत सहित सभी देशों के लिए वैश्विक परिस्थितियां तेजी से खराब हो रही हैं। हम इस वर्ष के मध्य में एक तरह का विभाजक बिंदु देख रहे हैं और अर्थव्यवस्था के धीमा होने के संकेत दुनिया भर में पहले से दिखाई दे रहे हैं।

    भारतीय अर्थव्यवस्था में नरमी

    कैलेंडर वर्ष की दूसरी छमाही कई देशों की अर्थव्यवस्था में कमजोर आई है। यह भारत में भी अपेक्षाकृत कमजोर रहेगी। यह मुख्यत: दो कारणों से है। एक तो उच्च आय वाले देशों की वास्तविक अर्थव्यवस्था के विकास की धीमी गति है। दूसरा, मौद्रिक नीतियों में आ रही सख्ती। यह न केवल विकासशील देशों को पूंजी बहिर्वाह की ओर ले जाता है, बल्कि विकासशील देशों में ब्याज दरों और अनिश्चितता को भी बढ़ाता है जिसका निवेश पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

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    अन्य देशों से कहीं बेहतर है भारत की स्थिति

    विश्व बैंक ने कहा है कि भारत का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर है। यह अन्य देशों की तरह कमजोर नहीं है। लेकिन अभी इसे बढ़ती हुई कीमतों से जूझना पड़ रहा है। इसके रास्ते में कई चुनौतियां हैं। भारत में बफर स्टॉक की कमी नहीं है। केंद्रीय बैंक का भंडार भरा हुआ है। फिर भी भारत को कुछ प्रमुख मुद्दों पर ध्यान देने की जरूरत है। भारत में फोकस मौजूदा बड़ी फर्मों और एफडीआई पर है। सामाजिक सुरक्षा पर सरकार का पूरा ध्यान है। यह अच्छा है, लेकिन पर्याप्त नहीं है।

    (एजेंसी इनपुट के साथ)

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