भारतीय गणतंत्र के पहले बजट की कहानी, जब 'चार आने-आठ आने' के हिसाब से लगता था इनकम टैक्स, इतनी कमाई वालों को थी छूट
केंद्रीय बजट 2026 (Union Budget 2026) की चर्चा के बीच, यह लेख भारत के गणतंत्र बनने के बाद के पहले बजट, 1950 के बजट पर प्रकाश डालता है। तत्कालीन वित्त ...और पढ़ें

1950 में जॉन मथाई ने पेश किया था बजट

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नई दिल्ली। 1 फरवरी को केंद्रीय बजट (Union Budget 2026) पेश किया जाएगा। उससे पहले ही कयास लगाये जाने लगे हैं कि बजट में क्या-क्या राहत मिल सकती है। पर हम यहां आगामी बजट के बजाय उस साल के बजट पर चर्चा करेंगे, जो भारत के गणतंत्र बनने के बाद देश का पहला बजट था। ये बजट था 1950 का, जिसे तत्कालीन वित्त मंत्री जॉन मथाई (John Matthai) ने पेश किया था। उस बजट में टैक्स को लेकर क्या-क्या राहत दी गयी थी, आइए विस्तार से जानते हैं।
खत्म कर दिया गया था बिजनेस प्रॉफिट टैक्स
1950 के बजट में कंपनियों को राहत देते हुए मथाई ने बिजनेस प्रॉफिट टैक्स (Business Profit Tax) को खत्म करने का एलान किया था, जिसे 1947 में टैक्सेशन के एक अस्थायी उपाय के रूप में एक्सेस प्रॉफिट टैक्स की जगह पेश किया गया था। उन्होंने टैक्स कहा था कि, "यह इक्विटी कैपिटल पर बोझ डालता है, वह कैपिटल जो जोखिम उठाती है"।
'आने' में लगता था टैक्स
मथाई ने बजट स्पीच में कहा था कि, "इनकम-टैक्स के मामले में, मुझे 3 प्रस्ताव रखने हैं। अधिकतम टैक्स रेट को 5 आने से घटाकर चार आने किया जाए। 10,000 से 15,000 रुपये की आय पर लागू टैक्स रेट को साढ़े 3 आने से घटाकर 3 आना किया जाए और अविभाजित परिवार की टैक्स फ्री लिमिट को 5000 रुपये से बढ़ाकर 6 हजार रुपये किया जाना चाहिए।
कॉर्पोरेट टैक्स में की गयी थी बढ़ोतरी
1950 के बजट में कॉर्पोरेट टैक्स में बढ़ोतरी की गयी थी। मथाई ने कॉर्पोरेट टैक्स को दो आने से बढ़ाकर ढाई आने करने का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने कहा था कि, "लेकिन, इसका नतीजा यह होगा कि अधिकतम इनकम-टैक्स दर में कमी के साथ, कंपनियों पर कुल टैक्स दर सात आना से घटकर साढ़े छह आना हो जाएगी। सुपर टैक्स के बारे में दो प्रस्ताव हैं। यह प्रस्ताव है कि कमाई गई और बिना कमाई गई इनकम के बीच के अंतर को खत्म कर दिया जाए और दोनों पर एक समान दर लगाई जाए।"
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सुपर-टैक्स रेट का एलान
मथाई का दूसरा प्रस्ताव था अधिकतम सुपर-टैक्स रेट, जो कमाई गई इनकम के मामले में नौ आना और बिना कमाई गई इनकम के मामले में दस आना था। उसे घटाकर दोनों तरह की इनकम के लिए एक समान दर साढ़े आठ आना कर दिया गया था। यह 1 लाख रुपये से ज्यादा की इनकम पर लागू करने का प्रस्ताव था।
उन्होंने सबसे ऊपरी स्लैब से नीचे के स्लैब पर लागू होने वाली सुपर-टैक्स रेट को घटते क्रम में आठ आना, साढ़े सात आना, सात आना, छह आना, चार आना और तीन आना करने का प्रस्ताव था।