Budget 2026: वित्त मंत्री ने किया MSME के लिए ₹10 हजार करोड़ का एलान, आत्मनिर्भर फंड से भी मिलेगा फायदा; क्या बोले एक्सपर्ट?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 (Budget 2026) में छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) के लिए ₹10,000 करोड़ के ग्रोथ फंड की घोषणा की। यह फंड MSMEs को ...और पढ़ें
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वित्त मंत्री ने किया MSME के लिए ₹10 हजार करोड़ का एलान

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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार 1 फरवरी, 2026 को बजट भाषण में देश के लाखों छोटे व्यवसायों और उद्यमों को नए प्रोत्साहन देने के मकसद से, छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) के ग्रोथ फंड के लिए ₹10,000 करोड़ के फंड के आवंटन की घोषणा की। यह फंड माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) को सहारा देने में मदद करेगा। इसके अलावा, यह फंड एंटरप्रेन्योर्स को मुश्किल क्रेडिट माहौल में भी फंड प्राप्त करने में मदद करेगा।
किन कंपनियों को मिलेगी मदद?
वित्त मंत्री सीतारमण ने संसद में अपना नौवां बजट पेश करते हुए कहा कि देश में पोटेंशियल वाली कंपनियों की ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए ₹10,000 करोड़ का एसएमई ग्रोथ फंड (SME Growth Fund) बनाया जाएगा। यह राशि बिजनेस के क्लस्टर्स को संभावित वापसी करने में मदद करेगी। यह उन कंपनियों के लिए एक नई लाइफलाइन होगी, जो क्रेडिट स्ट्रेस और पुरानी टेक्नोलॉजी के कारण कमजोर हो गई हैं।
बनाया जाएगा आत्मनिर्भर फंड
सीतारमण ने इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेडेशन और टेक्नोलॉजी बेहतर करके 200 पुराने इंडस्ट्रियल क्लस्टर को फिर से शुरू करने का प्रस्ताव दिया। उनके भाषण में ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम की रफ्तार बनाए रखने के लिए कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग की एक योजना का भी जिक्र किया गया।
इस मकसद के लिए, केंद्र सरकार एक 'आत्मनिर्भर फंड' शुरू करेगी, जिसमें शुरुआत में ₹4,000 करोड़ डाले जाएंगे। उम्मीद जताई जा रही है कि यह कदम ट्रेड फाइनेंस चेन को नई गति देगा और देश में लाखों छोटे उद्यमों को सपोर्ट करेगा, जिन्हें गारंटी वाली क्रेडिट स्कीम की कमी के कारण टिके रहने में मुश्किल होती है।
इसके अलावा यह फंड इंसेंटिव फ्रेमवर्क के साथ काम करेगा, जो प्रोडक्टिविटी, फॉर्मलाइजेशन और एक्सपोर्ट जैसे खास मानदंडों को पूरा करने वाले SMEs को रिवार्ड देगा।
₹7 लाख करोड़ से ज्यादा की रकम पहले ही उपलब्ध
वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDS) के जरिए पहले ही ₹7 लाख करोड़ से ज्यादा की रकम उपलब्ध करा दी है। नए उपायों से केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (PSU) द्वारा MSME खरीद के लिए TReDS को वन-स्टेप प्लेटफॉर्म बनाना अनिवार्य हो जाएगा।
इसके साथ ही, क्रेडिट गारंटी स्कीम सपोर्ट शुरू किया जाएगा और तेज फाइनेंसिंग के लिए गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) को TReDS से जोड़ा जाएगा। इन कदमों से सेकेंडरी मार्केट का विकास होगा और लिक्विडिटी ट्रांजैक्शन बढ़ेंगे।
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"MSME के लिए बहुत अच्छा बजट"
मल्टी-डिसिप्लिनरी पैन इंडिया टैक्सेशन फर्म, टैक्स कनेक्ट एडवाइजरी सर्विसेज के पार्टनर विवेक जालान ने बजट में MSME पर की गई घोषणाओं पर कहा कि, "केंद्रीय बजट 2027 MSMEs, मैन्युफैक्चरिंग और विदेशी फंडिंग के लिए बहुत अच्छा है। MSMEs को कई प्रस्तावों से सपोर्ट मिला है, जिसमें इक्विटी सपोर्ट शामिल है, जिसके तहत कुछ खास मानदंडों के आधार पर SME ग्रोथ के लिए 10000 करोड़ रुपये अलॉट किए गए हैं।"
जालान ने कहा कि, "TReDS को खरीद, इनवॉइस डिस्काउंटिंग और रिसीवेबल्स को बढ़ावा देने के लिए एक प्लेटफॉर्म के तौर पर मजबूत किया गया है। माइक्रो एंटरप्राइजेज के कंप्लायंस को आसान बनाने के लिए ICAI, ICMAI, ICSI जैसे प्रोफेशनल संगठन "कॉर्पोरेट मित्र" डेवलप करेंगे जो कंप्लायंस में मदद करेंगे।"
"पहली बार मिड साइज के एंटरप्राइजेज पर फोकस"
FISME के जनरल सेक्रेटरी अनिल भारद्वाज ने कहा कि, "मेरे हिसाब से यूनियन बजट 2026–27 स्ट्रक्चर के हिसाब से ग्रोथ को बढ़ावा देने वाला, आर्थिक रूप से समझदारी वाला और सुधारों पर फोकस करने वाला है, जिसमें MSMEs के लिए कई दूरदर्शी इनिशिएटिव्स फायदेमंद हैं। हालांकि, यह MSME की मजबूती के बजाय स्केल, कॉम्पिटिशन और सिस्टम की एफिशिएंसी को ज्यादा प्राथमिकता देता है, खासकर उन माइक्रो और छोटे एंटरप्राइज के लिए जो बाहरी झटकों, लागत के दबाव और कंप्लायंस के बोझ का सामना कर रहे हैं।"
भारद्वाज के अनुसार, "जहां तक MSME से जुड़े खास एलान की बात है, तो इक्विटी सपोर्ट के लिए ₹10,000 करोड़ के SME ग्रोथ फंड से समर्थित "चैंपियन MSMEs" बनाने की पहल सबसे खास है। पहली बार मीडियम साइज के एंटरप्राइजेज पर पॉलिसी का ध्यान गया है। आत्मनिर्भर भारत फंड में ₹2,000 करोड़ का टॉप-अप भी स्वागत योग्य है।"
"छोटे व्यवसायों के लिए लोन मिलना जरूरी प्राथमिकताएं"
लीगलविज के फाउंडर श्रीजय शेठ ने कहा कि, "यूनियन बजट 2026 उद्यमियों के लिए एक कंटिन्यूएशन बजट है – इसमें नए नारों पर कम और क्रेडिट और कंप्लायंस आर्किटेक्चर को मजबूत करने पर ज्यादा ध्यान दिया गया है, जिस पर स्टार्टअप और MSME पहले से ही निर्भर हैं। बेहतर क्रेडिट गारंटी फ्रेमवर्क को बनाए रखकर, ₹10,000 करोड़ के SME ग्रोथ फंड जैसे इंस्ट्रूमेंट्स शुरू करके, और TReDS और उद्यम जैसे फॉर्मल प्लेटफॉर्म को बढ़ावा देकर, सरकार यह संकेत दे रही है कि छोटे व्यवसायों के लिए बैंक से लोन मिलने की सुविधा और समय पर कैश फ्लो अब साइड-स्कीम नहीं, बल्कि जरूरी प्राथमिकताएं हैं।"
शेठ के अनुसार "DPIIT से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप के लिए मुख्य टैक्स प्रावधानों में स्थिरता और छोटे टैक्सपेयर्स के लिए चल रही GST राहत फाउंडर्स को लंबी अवधि की योजना बनाने के लिए बहुत जरूरी पॉलिसी की निश्चितता देती है। भारत के स्टार्टअप और MSME इकोसिस्टम के लिए, यह बजट किसी बड़े बदलाव जैसा कम और नट-बोल्ट को कसने जैसा ज्यादा लगेगा। यह उद्यमियों को फॉर्मलाइजेशन, बेहतर कंप्लायंस और मजबूत बैलेंस शीट की ओर प्रेरित करेगा, जबकि भारत को ग्लोबल कैपिटल की नजर में आर्थिक रूप से भरोसेमंद बनाए रखेगा।"
"मजबूत ग्रोथ सुनिश्चित करने के लिए एक साहसिक कदम"
ईवाई इंडिया के टैक्स पार्टनर सौरभ अग्रवाल के मुताबिक, "बजट 2026 भारत का फोकस एक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग पावरहाउस बनने की ओर ले जाता है। ISM 2.0 जैसी योजनाएं, ECMS में बजट बढ़ाना, बायो-फार्मा, भारी कंस्ट्रक्शन मशीनरी और देश में बने सी-प्लेन के लिए VGF महत्वपूर्ण डिमांड पैदा करते हैं। इस बीच, 200 इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स को फिर से जिंदा करने से MSMEs के लिए जरूरी रुकावटें दूर होती हैं। केमिकल्स और रेयर अर्थ्स में अपस्ट्रीम सप्लाई चेन को सुरक्षित करके और इन सेक्टर्स के लिए क्लस्टर/कॉरिडोर डेवलप करके, सरकार 'रणनीतिक अनिवार्यता' बनाने की कोशिश कर रही है। यह निवेशकों को हाई-प्रिसिशन मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाने के लिए जरूरी पॉलिसी निश्चितता देता है। यह लंबे समय तक ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस और मजबूत ग्रोथ सुनिश्चित करने के लिए एक साहसिक कदम है।"