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    Rice Export: चीन ने फिर दिया भारत को झटका, GMO का बहाना बना कर लौटाई चावल की खेप

    Updated: Fri, 01 May 2026 11:30 AM (IST)

    चीन ने भारत के चावल शिपमेंट को GMO अंशों का हवाला देकर लौटा दिया है, जिससे भारतीय निर्यातकों और किसानों को भारी नुकसान हुआ है। भारतीय कंपनियों का दावा ...और पढ़ें

    चीन ने लौटाई भारतीय चावल की खेप

    चीन ने लौटाई भारतीय चावल की खेप

    HighLights

    1. चीन ने GMO अंशों का आरोप लगाकर चावल लौटाया।

    2. भारतीय निर्यातकों को करोड़ों का नुकसान, साख पर सवाल।

    3. भारत में व्यावसायिक GMO चावल खेती को मंजूरी नहीं।

    नई दिल्ली| भारत के चावल निर्यातकों को चीन ने बड़ा झटका दिया है। चीन का कहना है कि भारत के चावल वाले शिपमेंट में GMO (जेनेटिकली मॉडिफाइड) के अंश पाए गए हैं। चीन के इस कदम से भारत के चावल एक्सरपोर्टर्स को नुकसान हुआ है, साथ ही चावल उगाने वाले किसानों की आमदनी को भी चोट पहुंची है।

    निर्यात से पहले मंजूरी मिली थी

    चीन ने भारत (Rice exports to China) की गैर बासमती चावल की करीब 3 खेपों को ये कहकर लौटा दिया है कि भारत की ओर से भेजे गए चावल में जेनेटिकली मॉडिफाइड (GMO Rice) अंश पाए गए हैं। वहीं दूसरी ओर भारतीय कंपनियों का कहना है कि चावल की यह खेप भारत के बंदरगाह से रवाना होने से पहले जांच के सभी जरूरी स्टेप से गुजरी थी और संबंधित एजेंसियों से मंजूरी भी मिली थी। अब चीन के इस कदम ने भारतीय निर्यातकों को परेशान कर दिया है।

    TREACG ने सरकार से लगाई गुहार

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चाइना को भेजे जाने वाले चावल दिल्ली, जयपुर और रायपुर के थे। इस मामले को लेकर द राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ छत्तीसगढ़ (TREACG) के निर्यातकों ने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। TREACG का कहना है कि भारतीय निर्यातक सभी मानकों का पालन करते हैं और लैब में टेस्‍ट होने के बाद ही चावल को बाहर भेजते हैं। उन्होंने कहा कि चीन के इस कदम से लेट चार्ज और ट्रांसपोर्टिंग मिलाकर करोड़ों का नुकसान होगा।

    भारत की साख लगी दांव पर

    चीन के इस फैसलें से भारत की साख को भी नुकसान हो सकता है। चावल उत्पादन के मामले में भारत दुनिया का नंबर 1 देश है, चावल के एक्सपोर्ट के मामले में भारत ग्लोबल मार्केट में धाक रखता है। ऐसे में अगर चीन का मुद्दा नहीं सुलझता तो चीन की ही तरह दूसरे देश भी GMO का मुद्दा बनाकर भारत के एक्सपोर्टर्स को परेशान कर सकते हैं। ग्लोबल मार्केट में अपनी साख बचाने के लिए भारत को तत्काल समाधान की जरूरत है।

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    ICAR ने क्या कहा?

    भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने स्टेटमेंट जारी करते हुए जानकारी दी थी, भारत में व्यवसायिक खेती के लिए GMO चावल को मंजूरी नहीं है साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि ICAR के अंतर्गत किसी भी चावल कार्यक्रम में GMO पर कोई शोध कार्य भी नहीं किया जा रहा है। भारत से निर्यात होने वाला सभी चावल वैरायटी पूरी तरह से NON GMO है।