सर्च करे
Home
फोकस
विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

2 साल के हाई लेवल पर पहुंचा चावल का दाम, भारत में उत्पादन भी कम! अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ेगी सप्लाई की टेंशन?

Published: Thu, 05 Nov 2026 12:25 PM (IST)

चावल की कीमतें दो साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं, जिसका मुख्य कारण अल नीनो और वैश्विक उत्पादन ...और पढ़ें

ग्लोबल मार्केट में चावल की कीमतें बढ़ीं

ग्लोबल मार्केट में चावल की कीमतें बढ़ीं

HighLights

  1. चावल की कीमतें दो साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचीं।

  2. अल नीनो के कारण वैश्विक उत्पादन में कमी की आशंका।

  3. भारत का चावल उत्पादन 4.6 प्रतिशत घटने का अनुमान।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| जियोपॉलिटिक्स, कई देशों में चल रहे तनाव और मौसम की अनियमितता के कारण पहले ही सप्लाई और महंगाई का असर दुनिया ने देख लिया है। इसमें ऊर्जा और खाद्यान्न उत्पादों का व्यापार सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। अब वैश्विक बाजार में चालू तिमाही और 2027 की पहली तिमाही में चावल की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं। इसकी वजह अल नीनो के कारण चावल उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की एग्रीकल्चरल मार्केट इंफॉर्मेशन सिस्टम (AMIS) के मुताबिक, अल नीनो के दौरान दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में बारिश कम होती है। दुनिया के चावल उत्पादन का बड़ा हिस्सा इन्हीं क्षेत्रों में होता है, इसलिए यह फसल अल नीनो से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाली फसलों में शामिल है।

दो साल के हाई लेवल पर पहुंचे दाम

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फिच सॉल्यूशंस की रिसर्च एजेंसी BMI ने 2026 के लिए चावल के औसत सालाना भाव का अनुमान 12.9 डॉलर प्रति हंड्रेडवेट से बढ़ाकर 14 डॉलर कर दिया है। एजेंसी के मुताबिक, तीसरी तिमाही में कीमतें उम्मीद से ज्यादा बढ़ीं। चौथी तिमाही में भाव औसतन 17.5 डॉलर और 2027 की पहली तिमाही में 7.2 डॉलर प्रति हंड्रेडवेट रहने का अनुमान है। हालांकि, एशियाई मानसून की फसल की स्थिति साफ होने और अमेरिका में कटाई आगे बढ़ने के साथ मौजूदा ऊंचे स्तर से कीमतों में गिरावट की गुंजाइश भी है।

फिलहाल चावल की कीमतें करीब दो साल के हाई लेवल पर हैं। जुलाई के बाद से भारत और पाकिस्तान के निर्यात भाव में 20 डॉलर प्रति टन, जबकि थाईलैंड और वियतनाम के भाव में 30 डॉलर प्रति टन की बढ़ोतरी हुई है। AMIS ने 2026-27 सीजन में वैश्विक चावल उत्पादन 2.4 प्रतिशत घटकर 552.47 मिलियन टन रहने का अनुमान लगाया है।

भारत का उत्पादन 4.6% घटने का अनुमान

अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) ने भारत का चावल उत्पादन 4.6 प्रतिशत घटकर 147 मिलियन टन रहने का अनुमान दिया है। यह पहले के 150 मिलियन टन के अनुमान से भी कम है। सितंबर से इस अनुमान से बाजार में कीमतों में उछाल देखने को मिला था। थाईलैंड में भी उत्पादन 1.9 प्रतिशत घटकर 20.3 मिलियन टन रहने की संभावना है। इसकी वजह कम बुवाई और पानी की उपलब्धता घटने की आशंका के बीच सरकार की ओर से रकबा कम करने के प्रयास हैं।

AMIS के मुताबिक, 2020 से 2024 के औसत उत्पादन को आधार मानें तो अल नीनो वाले वर्षों में धान उत्पादन में औसतन करीब 9.6 मिलियन टन की कमी देखी गई है। यह अनुमानित वैश्विक उत्पादन का लगभग 1.2 प्रतिशत है। हालांकि, संगठन ने स्पष्ट किया है कि चावल उत्पादन को प्रभावित करने वाला अल नीनो अकेला कारण नहीं है।

वायदा बाजार में तेजी, लेकिन सप्लाई की स्थिति स्थिर

BMI के अनुसार, तीसरी तिमाही में चावल का औसत भाव 15 डॉलर प्रति हंड्रेडवेट रहा। अक्टूबर में यह बढ़कर 17.8 डॉलर के 29 महीने के हाई लेवल पर पहुंच गया। एजेंसी का कहना है कि वायदा बाजार (Futures Market) में तेजी के बावजूद ग्लोबल फिजिकल मार्केट में अभी किसी बड़े सप्लाई संकट के स्पष्ट संकेत नहीं हैं। वायदा कीमतों और वास्तविक निर्यात कीमतों के बीच बढ़ता अंतर बताता है कि बाजार में संभावित सप्लाई जोखिम को लेकर ज्यादा प्रीमियम जुड़ रहा है।

वहीं, थाईलैंड में बाढ़ से चावल के परिवहन पर असर पड़ा है। इससे बुवाई में देरी और फसल नुकसान की आशंका बढ़ी है। माल ढुलाई और बीमा की लागत बढ़ने के साथ अफ्रीकी देशों से मजबूत मांग भी वैश्विक बाजार पर दबाव डाल रही है। हालांकि, BMI के मुताबिक भारत और थाईलैंड जैसे प्रमुख निर्यातक देशों में मानसूनी फसलों की कटाई शुरू होने या करीब आने से अल नीनो के कारण आगे उत्पादन प्रभावित होने का जोखिम धीरे-धीरे कम हो रहा है।

 

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।