बाजार में नहीं पहुंचेगी 10 लाख टन इंपोर्टेड चीनी? दाम गिरने से बिगड़ा संतुलन, सरकार का फिर नया प्लान
घरेलू चीनी की कीमतों में भारी गिरावट के कारण सरकार द्वारा स्वीकृत 10 लाख टन कच्ची चीनी का आयात मुश्किल ...और पढ़ें
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चीनी की डोमेस्टिक प्राइस घटने से इंपोर्टेड चीनी को लेकर चिंता
HighLights
घरेलू चीनी की कीमतें गिरने से आयातित चीनी महंगी हुई।
सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी आयात को मंजूरी दी थी।
नई सरकारी योजना के बावजूद आयातित चीनी की बिक्री मुश्किल।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| मिलों में चीनी की रिकॉर्ड कीमतों के साथ ही इसकी कमी को लेकर भी कई अटकलें लगाई गई थीं। हालांकि सरकार ने किसी तरह की कमी को नकारते हुए 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात को मंजूरी दी थी। अब घरेलू चीनी कीमतों में तेज गिरावट ने केंद्र सरकार द्वारा अनुमति दिए गए 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात को मुश्किल बना दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें मजबूत होने और घरेलू बाजार में भाव गिरने से इंपोर्टेड चीनी स्थानीय चीनी की तुलना में महंगी पड़ रही है, जिससे इंपोर्टर्स और रिफाइनरों के लिए इसे बेच पाना मुश्किल हो गया है।
चीनी के दाम गिरने से आयात मुश्किल
इंडस्ट्री से जुड़े मीडिया सूत्रों के अनुसार, देश की बंदरगाह आधारित रिफाइनरियों ने करीब 2.6 लाख टन कच्ची चीनी आयात करने की प्रतिबद्धता जताई है, लेकिन अब तक केवल कुछ हजार टन चीनी ही घरेलू बाजार में पहुंच पाई है। हाल के हफ्तों में प्रमुख राज्यों में चीनी की एक्स-मिल कीमतें करीब ₹65 रुपये प्रति से गिरकर ₹44-₹50 प्रति किलोग्राम के दायरे में आ गई हैं। इससे आयातित चीनी की लागत और घरेलू कीमतों के बीच संतुलन बिगड़ गया है।
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार एक बड़े चीनी इंपोर्टर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमतें बढ़ी हैं, जबकि घरेलू बाजार में कीमतें गिर गई हैं। ऐसे में आयातित चीनी को घरेलू बाजार में मार्केट कॉम्पटीशन की दरों पर बेचना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि शुरुआती चरण में जो चीनी बेची गई है और जो माल बंदरगाहों पर पहुंच चुका है, वही फिलहाल बाजार में जाएगा।
चीनी को लेकर सरकार की नई योजना
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने सोमवार को चीनी आयातकों के साथ बैठक की और आयात बढ़ाने का आग्रह किया। सरकार ने पिछले सप्ताह एडवांस ऑथराइजेशन योजना के तहत आयातित चीनी के आवेदन की समयसीमा बढ़ाकर उसे एकमुश्त टैरिफ रेट कोटा (TRQ) योजना में बदल दिया था। इसके तहत वे बंदरगाह आधारित रिफाइनरियां, जो आमतौर पर कच्ची चीनी आयात कर उसे प्रोसेस करने के बाद एक्सपोर्ट करती हैं, अब निर्धारित कोटे के भीतर उस चीनी को घरेलू बाजार में भी बेच सकती हैं।
अब आयातित चीनी पड़ रही महंगी
एक अन्य इंपोर्टर ने मीडिया को बताया कि आयातित कच्ची चीनी को प्रोसेस कर तैयार की गई सफेद चीनी की लागत ₹55 प्रति किलोग्राम से अधिक पड़ रही है, जिसमें लॉजिस्टिक्स लागत शामिल नहीं है। दूसरी ओर महाराष्ट्र में एक्स-मिल चीनी कीमतें ₹45-₹46 प्रति किलोग्राम और उत्तर प्रदेश में ₹48-₹50 रुपये प्रति किलोग्राम तक आ गई थीं। ऐसे में बाहर से आने वाली चीनी की बिक्री तभी संभव है जब घरेलू कीमतें आयात लागत के बराबर पहुंचें।
सप्लाई चेन पर दिखा असर
हालांकि सोमवार से फैक्ट्री लेवल पर चीनी की कीमतों में 2-3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) के तहत संभावित सरकारी कार्रवाई और दुकानों पर छापों की आशंका के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इससे बाजार में उपलब्धता पर असर पड़ा और कीमतों में हल्की तेजी देखने को मिली।
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एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि घरेलू चीनी कीमतें आयात लागत के बराबर नहीं पहुंचती हैं तो सरकार के 10 लाख टन आयात के लक्ष्य को हासिल करना कठिन हो सकता है। ऐसे में रिफाइनरियां फिलहाल कीमतों में सुधार का इंतजार कर सकती हैं।
