Explainer: दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार होकर भी भारत क्यों तय नहीं करता सोने का दाम, क्या है वजह?
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना खरीदार होने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजारों से सोने का दाम तय करता है, जिससे वह 'प्राइस टेकर' कहलाता है। देश में स ...और पढ़ें

HighLights
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना खरीदार है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार तय करते हैं भारत में सोने का दाम।
सरकार एक समान गोल्ड बेंचमार्क लागू करने का प्रयास कर रही है।
Gold Price: सोने से हमारे देश का इतिहास जुड़ा हुआ है। मसलन एक समय ऐसा था, जब भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था। आज भी भारत,चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार (Indian Gold Import) है। भारत में अधिकतर सोना आयात किया जाता है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार भारत हर साल 700-800 टन सोने का आयात करता है, जिसका मूल्य लगभग 70-95 अरब अमेरिकी डॉलर है। इसका आयात इसे दुनिया का सबसे बड़े सोना उपभोक्ताओं में से एक बनाता है। हाल ही में वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने एक रिपोर्ट साझा की। इस रिपोर्ट के अनुसार भारत की महिलाओं के पास दुनिया का 11 फीसदी सोना है। गोल्ड होल्डिंग के मामले में तमिलनाडु की महिलाएं सबसे आगे हैं। गोल्ड इंडस्ट्री में भारत के कई बड़े योगदान है, इसके बावजूद भी हमारा देश आज भी प्राइस टेकर है।
क्या है Price Taker का अर्थ?
प्राइस टेकर का अर्थ है कि भारत में जो सोने का भाव चलता है वह इंटरनेशनल कमोडिटी मार्केट से लिया जाता है। इनमें लंदन का LBMA और न्यूयॉर्क का कॉमेक्स शामिल हैं। प्राइस टेकर होने की वजह यह इसकी विश्व गोल्ड मार्केट में स्थिति को भी दर्शाता है। यह प्राइस मेकर इसलिए भी नहीं है क्योंकि देश का अधिकतर गोल्ड आयात होकर आता है।
फिर सोने का दाम कैसे होता है तय?
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मौजूदा समय में भारत में गोल्ड को लेकर दो बेंचमार्क, एमसीएक्स और IBJA शामिल हैं। हालांकि इसे हर कोई फॉलो नहीं कर रहा है। क्योंकि इसे लेकर सख्त नियम नहीं बनाए गए हैं। आमतौर हमारे देश में सोने की कीमत इंटरनेशनल मार्केट में चल रहे भाव के हिसाब से ही तय की जाती है।
खबरें और भी
- इसमें एक्सपोर्ट ड्यूटी
- जीएसटी
- डॉलर रुपया एक्सचेंज रेट
- ट्रांसपोर्ट खर्च
- इत्यादि जोड़ा जाता है।
वहीं आपको मीडिया रिपोर्ट में जो कीमत बताई जाती है। वह ज्यादातर एमसीएक्स और IBJA से लिया जाता है। इसके अलावा कई मीडिया रिपोर्ट में कॉमेक्स से भी भाव लेते है।
तो कौन-सी कीमत है सही?
शादी के समय जब फिजिकल गोल्ड लेने जाते हैं। तब एक समस्या आती है कि अलग-अलग ज्वैलर आपको अलग-अलग कीमत बताएंगे। इनमें जीएसटी और मेकिंग चार्ज शामिल नहीं होगा। लेकिन फिर भी यह भाव अलग-अलग ही होंगे।
इसका कारण यह है कि हमारे देश में आज भी सोने-चांदी को लेकर कोई एक बेंचमार्क फॉलो नहीं किया जा रहा है। यहां तक कि हर ज्वैलर की अपनी पर्सनल ऐप होगी, जहां से वह अक्सर आपको कीमत बताते हैं। यह कीमत अक्सर एमसीएक्स और IBJA से अलग ही होती है।
कहां होना चाहिए सुधार?
अब भारतीय सरकार यह कोशिश कर रही है कि हमारे देश में एक ही बेंचमार्क को सख्ती से फॉलो किया जाए। ताकि कीमतों में आने वाला अंतर कम हो।