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मिडिल ईस्ट तनाव ले डूबा भारतीय चावल का व्यापार! निर्यात घटने से मंडियों की खरीद में कमी, किसानों पर सीधा असर

Published: Mon, 21 Sep 2026 12:24 PM (IST)Updated: Mon, 21 Sep 2026 12:26 PM (IST)

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण भारत के बासमती चावल निर्यात पर बुरा असर पड़ा है। निर्यात में कमी ...और पढ़ें

बासमती की शिपमेंट में समस्या से निर्यातकों और मिलर्स ने घटाई खरीद

बासमती की शिपमेंट में समस्या से निर्यातकों और मिलर्स ने घटाई खरीद

HighLights

  1. मिडिल ईस्ट तनाव से बासमती निर्यात में भारी गिरावट।

  2. माल ढुलाई लागत 10 गुना बढ़ी, शिपिंग रूट बदले।

  3. मिलर्स की खरीद घटने से किसानों पर दबाव बढ़ा।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव से ईंधन की सप्लाई ही नहीं बल्कि भारत का व्यापार भी बड़े पैमाने पर प्रभावित हुआ है। इसमें बासमती का कारोबार प्रमुख है। शिपिंग रूट प्रभावित होने, माल ढुलाई का खर्च बढ़ने और विदेशी बाजारों में चल रही उथल-पुथल के कारण निर्यातकों ने और मिलर्स ने ऑर्डर और शिपमेंट की चिंताओं के बीच मंडियों से बासमती चावल की खरीद कम कर दी है।

वहीं पंजाब की मंडियों में अब बासमती की नई फसल भी आनी शुरू हो गई है जिसके चलते मिलर्स के पास स्टोरेज की भी बड़ी चिंता बन गई है। निर्यात में कमी और मंडियों में बढ़ती आवक के बीच किसानों के ऊपर खरीद और भंडारण की समस्या बढ़ सकती है।

हर महीने 5 लाख टन का कारोबार

बासमती एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन पंजाब के अध्यक्ष बल कृष्ण गर्ग ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि भारत हर महीने करीब 5 लाख टन बासमती चावल का एक्सपोर्ट करता है, इसमें पंजाब की हिस्सेदारी करीब एक-तिहाई है। उन्होंने आगे कहा कि मिडिल-ईस्ट में में तनाव और युद्ध शुरू होने से पहले पंजाब के निर्यातक हर महीने लगभग 1.6 लाख टन बासमती चावल का एक्सपोर्ट करते थे, जिसमें अब इसमें काफी गिरावट आई है।

फ्रेट की लागत में 10 गुना बढ़ोतरी

बल कृष्ण गर्ग ने जानकारी देते हुए बताया कि, तनाव बढ़ने के बाद कई शिपिंग कंपनियों ने अपनी सर्विसेज को सीमित कर दिया है। इसके चलते माल ढुलाई यानी फ्रेट की लागत पहले के मुकाबले करीब 10 गुना बढ़ गई है। बढ़ती कॉस्ट से न सिर्फ एक्सपोर्टर्स की लागत बढ़ी है बल्कि विदेशी बाजारों को लेकर अनिश्चितता भी बनी हुई है। इस स्थिति का असर बासमती की खरीद पर भी पड़ रहा है। एक्सपोर्टर्स और मिलर्स मंडियों से पहले की तुलना में बासमती चावल की खरीद कम कर रहे हैं, जिससे पंजाब की बासमती फसल के बाजार पर दबाव बढ़ सकता है।

बदल रहा शिपमेंट का रूट

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गर्ग ने बताया कि पहले दुबई तक एक कंटेनर भेजने में करीब 500 डॉलर खर्च होते थे, अब यही खर्च बढ़कर 5,000 डॉलर से ज्यादा हो गया है। इसके अलावा सऊदी अरब भारतीय बासमती चावल के बड़े खरीदारों में शामिल है, और वहां भी अनिश्चितता देखने को मिली। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब भेजी जाने वाली बासमती की खेप दम्माम पोर्ट के रास्ते जाती थी लेकिन तनाव के चलते अब दम्माम तक माल भेजना मुश्किल हो गया है, इसलिए निर्यातक खेप को लाल सागर की तरफ स्थित जेद्दा पोर्ट के रास्ते भेज रहे हैं, इससे न सिर्फ ट्रांसपोर्टिंग कॉस्ट बढ़ रही है, बल्कि निर्यात में भी गिरावट आई है।

किसानों पर भी बढ़ सकता है दबाव

बल कृष्ण गर्ग ने कहा कि कम समय में बासमती की स्टोरेट कैपासिटी बढ़ाना संभव नहीं है, ऐसी स्थिति में अगर एक्सपोर्ट लंबे समय तक कमजोर रहता है तो मिलर्स के पास ज्यादा मात्रा में धान रखने की जगह नहीं होगी, जिसके चलते उन्हें मंडियों से बासमती की खरीद कम करनी पड़ सकती है। इससे किसानों पर भी दबाव बढ़ सकता है।

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इसके अलावा मोगा स्थित GG Agrotech के रॉबिन गोयल ने कहा है कि उनकी कंपनी का बासमती निर्यात फरवरी से पहले के मुकाबले घटकर करीब आधा रह गया है। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी वेस्ट एशिया के देशों को बासमती चावल का निर्यात करती है, कंपनी ने पिछले साल मंडियों से करीब 80,000 मीट्रिक टन बासमती खरीदा था लेकिन इस साल कंपनी ने अधिकतम 50,000 मीट्रिक टन खरीदने की योजना बनाई है।