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प्याज की बुवाई में 37% की भारी गिरावट! कीमतों के बाद सप्लाई की बढ़ेगी टेंशन, अब कम होंगे या बढ़ेंगे दाम?

Published: Wed, 02 Sep 2026 06:12 PM (IST)

प्याज की खरीफ बुवाई में 37% की भारी गिरावट आई है, जिससे आने वाले महीनों में आपूर्ति में कमी और ...और पढ़ें

प्याज की बुवाई के क्षेत्रफल में 37% की कमी

प्याज की बुवाई के क्षेत्रफल में 37% की कमी

HighLights

  1. खरीफ प्याज की बुवाई में 37% की भारी गिरावट दर्ज।

  2. कम बारिश और पानी की कमी से रकबा घटा।

  3. विशेषज्ञों के अनुसार अप्रैल तक आपूर्ति में कमी संभव।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| इन दिनों आम उपभोक्ता प्याज की महंगाई का सामना कर रहे हैं, लेकिन सप्लाई बराबर बनी हुई है। कीमतों में उछाल के बाद भी उपलब्धता बनी हुई है। सरकार की ₹35 प्रति किलो की दर से बेचे जा रहे बफर स्टॉक से अस्थायी राहत मिलने के बावजूद प्याज की कीमतें ऊंची रहने की उम्मीद है। साथ ही प्याज की सप्लाई भी प्रभावित होने की अटकलें तेज हो गई हैं। जिसका कारण खरीफ सीजन में प्याज के रबके में कमी को बताया जा रहा है।

प्याज की बुवाई में बारी गिरावट

इस साल खरीफ सीजन में प्याज की खेती के क्षेत्रफल में काफी गिरावट आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक देश में करीब 1.30 लाख हेक्टेयर के क्षेत्र में खरीफ प्याज की बुवाई हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक ये आंकड़ा 2.06 लाख हेक्टेयर था। खेती के क्षेत्रफल में करीब 37 प्रतिशत की कमी आई है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे प्रमुख प्याज उत्पादक राज्यों में खेती का रकबा पिछले साल के आसपास ही बना हुआ है। महाराष्ट्र में करीब 30,000 हेक्टेयर और मध्य प्रदेश में करीब 12,000 हेक्टेयर में प्याज की खेती हुई है, लेकिन कर्नाटक में देखने को मिली है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस साल कर्नाटक में किसानों ने लगभग 68,000 हेक्टेयर में प्याज की बुवाई की है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह रकबा करीब 90,000 हेक्टेयर था। प्याज की बुवाई का क्षेत्रफल कम होने का कारण कम बारिश और पानी की कमी को बताया जा रहा है।

प्याज की कमी के संकेत?

प्याज विशेषज्ञ और नेशनल हॉर्टिकल्चरल रिसर्च एंड डेवलपमेंट फाउंडेशन (NHRDF) के पूर्व एडिशनल डायरेक्टर सतीश भोंडे ने मीडिया को बताया कि मौजूदा खरीफ सीजन में प्याज की खेती में आई कमी से संकेत मिलता है कि अगले अप्रैल से बाजार में रबी सीजन की प्याज आने तक आपूर्ति में कमी हो सकती है। सामान्य तौर पर, अधिक शेल्फ लाइफ वाली रबी सीजन की प्याज दिवाली तक की मांग को पूरा करती है, जिसके बाद खरीफ सीजन की प्याज बाजार में आती है।

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उन्होंने आगे कहा कि पर्याप्त बारिश न होने के कारण इस साल प्याज की बुवाई और रोपाई में भी देरी हुई है। इसका असर अब बाजार में दिखाई दे रहा है। भोंडे के मुताबिक प्याज की थोक कीमत ₹40 प्रति किलो तक पहुंच गई है।

सप्लाई को लेकर चिंता की बात नहीं

उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे के ने जानकारी दी कि देश में प्याज के स्टॉक को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है, आने वाले महीने में नई प्याज आने लगेगी, जिससे सप्लाई और कीमत को लेकर आम उपभोक्ता को राहत मिलेगी। आंकड़ों के मुताबिक 2025-26 के फसल वर्ष (जून-जुलाई) में प्याज का उत्पादन 30.73 मिलियन टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के 30.76 मिलियन टन के लगभग बराबर ही है। इससे साफ है कि सप्लाई को लेकर चिंता की कोई बात नहीं है।