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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 31, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    मुफ्त की योजनाओं का अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है प्रतिकूल असर, विशेषज्ञ बोले- रेवड़ी कल्चर को परिभाषित करना जरूरी

    By Krishna Bihari SinghEdited By:
    Updated: Wed, 31 Aug 2022 08:56 PM (IST)

    Freebies Effected Economy विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि लापरवाह तरीके से चलाई जाने वाली मुफ्त की योजनाओं का अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। ...और पढ़ें

    विशेषज्ञों का कहना है कि मुफ्त की योजनाओं का अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
    विशेषज्ञों का कहना है कि मुफ्त की योजनाओं का अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

    नई दिल्ली, एजेंसी। विशेषज्ञों का कहना है कि लापरवाह तरीके से चलाई जाने वाली मुफ्त की योजनाओं का अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। श्रीलंका के ताजा आर्थिक हालात इसकी बानगी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि रेवड़ी कल्चर को परिभाषित करना ना केवल जरूरी है बल्कि यह भी बताया जाना चाहिए कि यह कल्याणकारी योजनाओं में खर्च किए जाने वाले फंड से कैसे अलग है।

    हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि करदाताओं के पैसे की कीमत पर रेवड़ी बांटना देश को दिवालियापन की ओर धकेल सकता है। आर्थिक थिंक टैंक आइसीआरआइईआर के चेयरमैन प्रमोद भसीन ने कहा कि राजनीतिक मजबूरियों के चलते अधिकांश राजनेता इस तरह की घोषणाएं करते हैं। अगर इन पर रोक लगती है तो यह एक स्वगात योग्य कदम होगा, लेकिन इस पर अंतिम निर्णय निर्वाचित प्रतिनिधि को लेना होगा।

    उन्होंने रेवड़ी कल्चर को परिभाषित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। इसी तरह के विचार व्यक्त करते हुए इंस्टीट्यूट फार स्टडीज इन इंडस्टि्रयल डेवलपमेंट (आइएसआइडी) के डायरेक्टर नागेश कुमार ने कहा कि राज्य सरकारों को राजकोषीय प्रबंधन के मुद्दे पर जिम्मेदार होना होगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों द्वारा घोषित की जाने वाली मुफ्त की योजनाएं प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर डाल सकती हैं।

    ताजा उदाहरण श्रीलंका का है, जो यह बताता है कि राजकोषीय अनुशासनहीनता हमेशा आपदा की ओर ले जाती है। बीआर अंबेडकर स्कूल आफ इकोनमिक्स (बेस) के कुलपति एनआर भानुमूर्ति ने कहा कि किसी भी तरह का नीतिगत हस्तक्षेप जो मध्यम से लंबी अवधि के बीच उत्पादन और उत्पादकता में शुद्ध वृद्धि सुनिश्चित नहीं करता है उसे रेवड़ी माना जा सकता है।

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    उन्होंने यह भी कहा है कि अगर इस तरह की घोषणाओं का एलान जारी रहता है तो कई राज्यों में पहले से बिगड़ी अर्थव्यवस्था और खराब हो सकती है। देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति पर भसीन ने कहा कि दुनियाभर में मंदी के डर के बीच भारत की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है।