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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 18, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Jagran Expert Column: विफलता से शुरू होती है सफलता, निवेशकों के पोर्टफोलियो भी इसके अपवाद नहीं

    By Siddharth PriyadarshiEdited By:
    Updated: Sun, 18 Sep 2022 12:24 PM (GMT+05:30)

    Stock Investment सफलता हमेशा फेलियर (विफलता) से शुरू होती है। आमतौर पर आपको किसी अनुमान से भी शुरुआत करनी पड़ती है। पिछले दो वर्षों के दौरान कुछ घटनाओ ...और पढ़ें

    Stock Investment: Success begins with failure, investors' portfolios are no exception
    Stock Investment: Success begins with failure, investors' portfolios are no exception

    नई दिल्ली, धीरेंद्र कुमार। कई दशक पहले किशोरावस्था के दौरान मैं परिवार के साथ पुश्तैनी गांव गया। हम अपने साथ एक पोर्टेबल टीवी भी ले गए। टीवी घर के बाहर लगाया जाता। जल्द ही हमारा घर हर शाम लोगों के इकट्ठा होने का अड्डा हो गया।

    यह 80 का दशक था और टीवी पर हम केवल दूरदर्शन देख सकते थे। हर रात अनाउंसर पूरी औपचारिकता से दर्शकों से विदा लेते और टीवी का सिग्नल बंद हो जाता। उन दिनों जल्दी सो जाना और जल्दी उठना, रोजमर्रा का नियम हुआ करता था। कम-से-कम ग्रामीण भारत में तो ऐसा ही था। हालांकि एक काफी बुजुर्ग व्यक्ति थे जो रोज वहां आते और चाहे सभी लोग चले जाएं पर वो ट्रांसमिशन पूरा खत्म होने तक टीवी के सामने अकेले डटे रहते।

    एक दिन हमने पूछा कि वो ऐसा क्यों करते हैं। पहले तो वो शर्माए, फिर बताया कि टीवी पर आने वाली महिला उन्हें ही नमस्ते कहती है। दरअसल, वो समझते थे कि चाहे वो अकेले ही क्यों न हों, टीवी पर आने वाली महिला नमस्ते जरूर कहती है। इसलिए हो-न-हो वो उन्हें ही नमस्ते कहती है। क्योंकि उनके लिए अकेले होने पर भी नमस्ते कहना इस बात का सुबूत है कि नमस्ते खासतौर पर उनके लिए है।

    वैश्विक परिस्थितियों से बिगड़े हालात

    मीडिया के असर के लिहाज से, और अब सोशल मीडिया के भी, चीजें उस सरल-सहज दौर से काफी आगे निकल आई हैं। पिछले कई वर्षों में, मैंने बचत करने वालों और निवेशकों पर बड़े तौर पर न्यूज और मीडिया के असर के बारे में कई बार लिखा है। पिछले दो वर्षों के दौरान कुछ घटनाओं जैसे- चीनी वायरस, यूक्रेन युद्ध, ताइवान संकट और यूरोप का आर्थिक संकट ने हर चीज बिगाड़ दी है।

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    गलत फीडबैक की समस्या

    कोरोना महामारी के दौरान मैंने अंडरकवर इकनोमिस्ट के लेखक टिम हार्फर्ड की एक जबरदस्त किताब दोबारा पढ़ी। इस किताब को पढ़ते हुए एहसास हुआ कि बहुत ज्यादा न्यूज की समस्या, असल में गलत फीडबैक लूप की समस्या है। हो सकता है ये कुछ अजीब लगा हो पर आप एक बार सुनें। बात चाहे आपके निवेश की हो, गाड़ी चलाने की या किसी बीमारी को रोकने के लिए सही पालिसी के फैसले की, किसी भी प्रक्रिया में सफलता तब मिलती है जब कोशिशों के इनपुट का तालमेल बनाया जाता है।

    सफलता हमेशा विफलता से शुरू होती है

    आपकी पहली कोशिश बिरले ही सही होती है। जैसा हार्फर्ड अपनी किताब के सब-टाइटल में कहते हैं- सफलता हमेशा फेलियर (विफलता) से शुरू होती है। आमतौर पर आपको किसी अनुमान से भी शुरुआत करनी पड़ती है। फिर, आपको देखना होता है कि इसका क्या असर हो रहा है और असर को देख कर आप अपनी रणनीति में बदलाव करते हैं। हो सकता है ये बदलाव अच्छा हो, या शायद ना भी हो। दोनों ही स्थितियों में इसी को दोहराना होता है। ये होता है फीडबैक लूप यानी उपलब्ध जानकारी। ठीक वैसा, जैसा इंजीनियर हर तरह के सिस्टम में इस्तेमाल करते हैं।

    फीडबैक लूप एकदम सही होना चाहिए। ये बात हर इंजीनियर बखूबी समझता है। अगर ये बहुत तेज होंगे या बहुत मजबूत होंगे तो इनसे बेकार के एक्शन होंगे जिनका कोई आधार नहीं होगा। अगर ये बहुत धीमे और कमजोर हुए तो बेअसर होंगे या देर से होंगे। कोविड पालिसी बनाए जाने के दौरान तेजी से होने वाले फीडबैक लूप काफी देखने को मिले। इसको ऐसे और बेहतर तरीके से समझा जा सकता है कि यही बात निवेशकों के पोर्टफोलियो मैनेज करने में भी नजर आती है।

    सही फैसले करना जरूरी

    जब वो मीडिया और सोशल मीडिया से प्रभावित होते हैं, तो फीडबैक लूप तेज और तेज होते जाते हैं। हमेशा ये संदेश दिया जाता है कि शार्ट-टर्म की घटनाएं हर निवेशक के लिए अहम हैं। और अगर आप निवेशक हैं, तो आपको मिनट-दर-मिनट घटनाओं की खबर होनी चाहिए है और मिनटों के नोटिस पर रिएक्शन के लिए तैयार रहना चाहिए। मगर ये सच नहीं है। कई लोग निवेश सलाह के लिए ई-मेल लिखते हैं और अपनी मुश्किलों के हल पूछते हैं।

    मैंने हमेशा देखा है कि ज्यादातर मुश्किलें तब शुरू होती हैं, जब कोई कुछ करता है या फिर महीनों और वर्षों तक कुछ नहीं करता। इसी तरह इन मुश्किलों को सही करने का मतलब है ऐसा फैसला लेना जो महीनों या वर्षों तक कायम रह सके।

    (लेखक वैल्यू रिसर्च आनलाइन डॉट काम के सीईओ हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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