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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 29, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Critical Illness Insurance : हेल्थ इंश्योरेंस से कितना अलग होता है क्रिटिकल इलनेस कवर, इसे लेना क्यों है जरूरी?

    Updated: Fri, 29 Mar 2024 05:43 PM (IST)

    आजकल कई सामान्य बीमारियों के इलाज में लाखों रुपये खर्च हो जाते हैं। ऐसे में अगर कैंसर या हार्ट से जुड़ी बीमारी हो जाए तो ठीकठाक कमाने वालों की सारी जम ...और पढ़ें

    क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस में हार्ट अटैक, स्ट्रोक, कैंसर और लकवा जैसी बीमारियां कवर होती हैं।
    क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस में हार्ट अटैक, स्ट्रोक, कैंसर और लकवा जैसी बीमारियां कवर होती हैं।

    बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। आज के समय में हमारी लाइफस्टाइल काफी उलझी हुई है। खानपान से लेकर सोने-उठने तक हर चीज का सिस्टम बिगड़ा गया है। इसके चलते कई गंभीर बीमारियां भी हमें अपना शिकार बना लेती हैं।

    अगर कोई सामान्य बीमारी हो, तो हमारा हेल्थ इंश्योरेंस उसको कवर कर लेता है। लेकिन, कैंसर और हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियों के वक्त यह काम नहीं आता। ऐसे में जरूरत पड़ती है क्रिटिकल इलनेस कवर (critical illness insurance) की।

    आइए जानते हैं कि क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस क्या होता है और इसके फायदे क्या हैं?

    क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस क्या है?

    आजकल कई सामान्य बीमारियों के इलाज में लाखों रुपये खर्च हो जाते हैं। ऐसे में अगर कैंसर या हार्ट से जुड़ी बीमारी हो जाए, तो ठीकठाक कमाने वालों की सारी जमापूंजी एक झटके में खत्म हो जाती है। इस तरह के हालात में हमारी मदद करता है क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस।

    इसमें हार्ट अटैक, कैंसर, किडनी फेल, पैरालिसिस, ट्यूमर, कोमा और अंग प्रत्‍यारोपण जैसी समस्याओं के इलाज को कवर किया जाता है। ये बीमारियां शरीर के अहम हिस्सों को नुकसान पहुंचाती हैं और इनका इलाज लंबे वक्त तक चलता है।

    क्रिटिकल इलनेस कवर के फायदे?

    इसका सबसे बड़ा फायदा यही है कि इसमें आपको आर्थिक रूप से बेहाल कर देने वाली गंभीर बीमारियों का कवरेज मिल जाता है। इसमें 45 साल की उम्र तक किसी मेडिकल चेक-अप की भी जरूरत नहीं होती।

    अगर गंभीर बीमारी होती है, तो बीमा कंपनी आपको लंपसम (Lumpsum) यानी एकमुश्त भुगतान भी कर सकती है। इससे आप अच्छे अस्पताल में अपना इलाज करा सकते हैं। इसमें सेक्शन 80D के तहत टैक्स छूट भी मिलती है। साथ में इंश्योरेंस क्लेम करने का प्रोसेस भी काफी आसान है।

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    कौन सी बीमारियां होती हैं कवर?

    क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस में हार्ट अटैक, स्ट्रोक, कैंसर, लकवा, अंग प्रत्यारोपण और ब्रेन ट्यूमर जैसी समस्याएं कवर होती हैं। हालांकि, अगर आप क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस पॉलिसी लेने जा रहे हैं, तो अपने परिवार की मेडिकल हिस्ट्री पर अच्छे से गौर कर लें। इससे आपको अंदाजा हो जाएगा कि किन बीमारियों के कवर को ज्यादा तरजीह देनी है।

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