कैश लेजर में फंसा पैसा, ई-कॉमर्स और छोटे व्यवसायों के लिए क्या है GST का नया नियम? इन व्यापारियों की बढ़ेगी लॉजिस्टिक्स कॉस्ट
जीएसटी काउंसिल ने छोटे कारोबारियों को दूसरे राज्यों में ई-कॉमर्स गोदामों से व्यापार करने की अनुमति दी है, जिससे उन्हें ...और पढ़ें

GST काउंसिल मीटिंग के नए बदलाव (AI image)
HighLights
छोटे कारोबारी अब दूसरे राज्यों में ई-कॉमर्स गोदामों से बेच सकेंगे।
इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर में अतिरिक्त राशि का ऑटोमेटिक रिफंड मिलेगा।
कुछ ई-कॉमर्स कंपनियों की लॉजिस्टिक्स लागत में वृद्धि संभव है।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| 8 अक्टूबर को GST की काउंसिल मीटिंग हुई, इस दौरान कई बड़े फैसले लिए गए। नए जेनरेशन के लिए ईज टू बिजनेस पर जोर दिया गया। नए बदलावों के बाद छोटे कारोबारियों और ऑफलाइन दुकानदारों के लिए दूसरे राज्यों में कारोबार करना आसान हो सकता है। अब तय शर्तों के तहत छोटे विक्रेता ई-कॉमर्स कंपनियों के दूसरे राज्यों में स्थित गोदामों को अपना बिजनेस प्लेस बनाकर वहां से बिक्री कर सकेंगे।
इससे उन्हें दूसरे राज्यों में अलग दुकान, गोदाम या कारोबारी प्रतिष्ठान स्थापित करने पर होने वाले खर्च से राहत मिल सकती है। इसके अलावा, ट्रेडर्स के इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर में जमा एक्स्ट्रा अमाउंट का रिफंड भी ऑटोमेटिक तरीके से देने की व्यवस्था को मंजूरी दी गई है। इससे कारोबारियों की वर्किंग कैपिटल पर दबाव कम होगा।
नई व्यवस्था के बाद क्या बदल जाएगा?
अभी किसी दूसरे राज्य में कारोबार करने के लिए आम तौर पर अलग GST रजिस्ट्रेशन और वहां कारोबारी प्रतिष्ठान की जरूरत पड़ती है। इससे छोटे कारोबारियों को दुकान या गोदाम का किराया, अकाउंटिंग और कंप्लायंस से जुड़े अतिरिक्त खर्च उठाने पड़ते हैं।
नई व्यवस्था के तहत ऐसे ट्रेडर्स, जिनके इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के दावे एक महीने में ₹2.5 लाख तक हैं, निर्धारित शर्तें पूरी करने पर दूसरे राज्य में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के गोदाम को अपना प्रमुख बिजनेस प्लेस बना सकेंगे। इससे छोटे कारोबारियों के लिए दूसरे राज्यों में अपने उत्पाद बेचना और वहां ग्राहकों तक पहुंचना आसान हो सकता है।
किसे मिलेगा बदलाव का फायदा?
नई व्यवस्था का फायदा उन ऑफलाइन दुकानदारों को भी मिल सकता है, जिनके पास पहले से सामान का स्टॉक मौजूद है। वे दूसरे राज्यों में मांग और मुनाफे की संभावना को देखते हुए अपना माल ई-कॉमर्स कंपनियों के गोदामों में रख सकेंगे। इसके लिए उन्हें अपने स्तर पर अलग गोदाम बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
इस फैसले से उन कारोबारियों को खास फायदा हो सकता है, जो अभी तक अपने राज्य तक ही सीमित हैं। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के गोदामों में सामान रखने से वे दूसरे राज्यों के ग्राहकों तक पहुंच बना सकेंगे। इससे उनकी बिक्री बढ़ने और स्टॉक जल्दी बिकने की संभावना भी बढ़ सकती है।
इंडस्ट्री से जुड़े एक अधिकारी के अनुमान के मुताबिक, बड़े ऑनलाइन मार्केटप्लेस पर पहले से मौजूद करीब 50 से 60 प्रतिशत ट्रेडर्स कई राज्यों में कारोबार करते हैं। इनमें से 60 से 70 फीसदी ट्रेडर्स इस सुविधा के जरिए अपने कारोबार का विस्तार और राज्यों में कर सकते हैं।
इस व्यवस्था से कारोबारियों को अपने निवेश की रकम जल्दी वापस हासिल करने और इन्वेंट्री यानी बिक्री के लिए रखे सामान का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है। उद्योग से जुड़े अधिकारियों का अनुमान है कि यदि नियम जल्द अधिसूचित हो जाते हैं, तो स्टॉक रखने वाले विक्रेता दिसंबर के अंत तक दूसरे राज्यों में अपना सामान पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।
कैश लेजर में फंसा पैसा जल्दी मिलेगा वापस
जीएसटी काउंसिल ने कारोबारियों के इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर में मौजूद एक्स्ट्रा अमाउंट के रिफंड को ऑटोमैटिक तरीके से जारी करने की व्यवस्था को भी मंजूरी दी है। बता दें कि इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर वह खाता है, जिसमें कारोबारी GST भुगतान के लिए जमा की गई नकदी का रिकॉर्ड रखते हैं। यदि इसमें जरूरत से ज्यादा राशि जमा हो जाती है, तो उसे वापस पाने में लगने वाला समय कारोबारियों की कैपिटल को प्रभावित कर सकता है।
ऑटोमेटिक रिफंड व्यवस्था से अतिरिक्त जमा राशि वापस मिलने की प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद है। इससे छोटे कारोबारियों को रोजमर्रा के खर्च, नया स्टॉक खरीदने और कर्ज की किस्तें चुकाने के लिए उपलब्ध नकदी का बेहतर मैनेजमेंट करने में मदद मिल सकती है।
ई-कॉमर्स कंपनियों की लॉजिस्टिक्स कॉस्ट बढ़ेगी?
GST काउंसिल ने ऑनलाइन ऑर्डर देने वाले ऐसे खरीदारों तक सामान पहुंचाने वाली गुड्स ट्रांसपोर्ट एजेंसियों के लिए उपलब्ध जीएसटी छूट वापस लेने को भी मंजूरी दी है, जो GST में रजिस्टर्ड नहीं हैं। नई व्यवस्था के तहत ऐसी डिलीवरी सर्विसेस पर इनपुट टैक्स क्रेडिट के बिना 5% GST लगेगा।
इस बदलाव का असर उन ई-कॉमर्स कंपनियों पर पड़ सकता है, जिनकी अपनी लॉजिस्टिक्स यूनिट्स अभी इस छूट का लाभ ले रही हैं। इनमें फ्लिपकार्ट की एकार्ट, मीशो की वाल्मो और अमेजन ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज शामिल हैं।
हालांकि, कुछ प्लेटफॉर्म अभी 18 फीसदी जीएसटी का भुगतान इनपुट टैक्स क्रेडिट के साथ करते हैं। ऐसे प्लेटफॉर्म को 5% की नई दर से फायदा मिल सकता है, लेकिन इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिलने के कारण वास्तविक बचत सीमित हो सकती है।
ये भी पढ़ें: बिना लाइसेंस भूलकर भी न शुरू करें ये 3 बिजनेस! छोटे व्यापारी खासतौर पर दें ध्यान नहीं तो होगी कार्रवाई
AKM Global में इनडायरेक्ट टैक्स डिपार्टमेंट के प्रमुख इकेश नागपाल के मुताबिक, नई व्यवस्था का लागत पर असर अलग-अलग ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए अलग हो सकता है। कुछ कंपनियां नए नियमों में बदलाव के लिए अधिक समय देने की मांग करने पर विचार कर रही हैं।
प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी और नियमों पर भी रहेगी नजर
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दूसरे राज्यों में ई-कॉमर्स गोदामों के इस्तेमाल की सुविधा कितनी सफल होगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि प्लेटफॉर्म अपने गोदाम ट्रेडर्स के लिए किस हद तक उपलब्ध कराते हैं। साथ ही, अंतिम नियमों में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि विक्रेता की ओर से टैक्स नियमों का उल्लंघन होने पर प्लेटफॉर्म की क्या जिम्मेदारी होगी।
कुल मिलाकर, GST काउंसिल के इन फैसलों से छोटे कारोबारियों को दूसरे राज्यों में बिक्री बढ़ाने और नकदी प्रबंधन में मदद मिल सकती है। वहीं, लॉजिस्टिक्स सेवाओं पर जीएसटी छूट हटने से कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की लागत बढ़ सकती है। इन बदलावों का वास्तविक असर सरकार की अधिसूचना और अंतिम नियम लागू होने के बाद स्पष्ट होगा।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।