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Credit Card का APR कैसे बनाता है आपके छोटे से बिल को बड़ा? एक्स्ट्रा ब्याज से खुद को ऐसे बचाएं!

Published: Thu, 13 Aug 2026 03:53 PM (IST)

क्रेडिट कार्ड पर सिर्फ मिनिमम ड्यू चुकाने की आदत आपको कर्ज के जाल में फंसा सकती है, क्योंकि उच्च APR ...और पढ़ें

Credit Card

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HighLights

  1. मिनिमम ड्यू चुकाने से क्रेडिट कार्ड का ग्रेस पीरियड खत्म होता है।

  2. क्रेडिट कार्ड पर चक्रवृद्धि ब्याज और भारी APR लगता है।

  3. कर्ज के जाल से बचने के लिए हमेशा पूरा बिल चुकाएं।

नई दिल्ली: अगर आप भी क्रेडिट कार्ड(Credit Card) का इस्तेमाल करते हैं और समय पर पूरा बिल चुकाने के बजाय सिर्फ 'मिनिमम अमाउंट ड्यू' (Minimum Due) चुकाने की आदत डाल चुके हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। यह समझना बेहद जरूरी है कि क्रेडिट कार्ड का APR (Annual Percentage Rate) क्या होता है और कैसे यह आपके बकाए बिल को कई गुना बढ़ा देता है।

क्या होता है Credit Card APR?

APR का मतलब एनुअल परसेंटेज रेट (Annual Percentage Rate) होता है। सरल शब्दों में कहें तो यह वह सालाना ब्याज दर है जो बैंक या क्रेडिट कार्ड जारी करने वाली वित्तीय संस्था आपके द्वारा बकाया छोड़ी गई राशि पर वसूलती है।

भारत में क्रेडिट कार्ड पर लगने वाला यह APR आमतौर पर बहुत ज्यादा होता है, जो सालाना 36% से लेकर 48% (यानी करीब 3% से 4% प्रति महीना) तक हो सकता है। यह पर्सनल लोन या होम लोन के मुकाबले कई गुना ज्यादा महंगा होता है।

क्यों बढ़ जाता है आपका बकाया बिल?

अक्सर लोग सोचते हैं कि अगर उन्होंने ₹50,000 या ₹1,00000 के बिल में से थोड़ा-बहुत हिस्सा (Minimum Due) चुका दिया है, तो बचा हुआ अमाउंट सेफ है। लेकिन असलियत इसके उलट होती है।

1. जब आप क्रेडिट कार्ड का पूरा बिल समय पर (Payment Due Date तक) चुकाते हैं, तो आपको बैंक की तरफ से 'ग्रेस पीरियड' मिलता है और कोई ब्याज नहीं लगता। लेकिन जैसे ही आप सिर्फ मिनिमम ड्यू चुकाते हैं, यह ग्रेस पीरियड खत्म हो जाता है।

2. एक बार ग्रेस पीरियड खत्म होने पर बैंक आपके नए खर्चों पर भी शुरुआती तारीख से ही भारी-भरकम ब्याज जोड़ना शुरू कर देता है।

3. क्रेडिट कार्ड पर साधारण ब्याज नहीं बल्कि चक्रवृद्धि ब्याज लगता है। यानी आपके बकाए मूलधन पर तो ब्याज लगता ही है, साथ ही पिछले महीने के ब्याज पर भी ब्याज जुड़ता चला जाता है।

4. इस भारी-भरकम ब्याज के ऊपर बैंक 18% की दर से जीएसटी (GST), लेट पेमेंट फीस और अन्य छुपे हुए चार्ज भी लगा देते हैं।

आइए एक उदाहरण से समझते हैं:

मान लीजिए आपका क्रेडिट कार्ड का बिल ₹50,000 है और आप सिर्फ 'मिनिमम ड्यू' चुकाकर बच निकलते हैं। भारी-भरकम APR, चक्रवृद्धि ब्याज, लेट फीस और टैक्स के जाल में फंसकर यह छोटा सा बकाया कुछ ही महीनों में बढ़कर ₹1 लाख या उससे भी ज्यादा तक पहुंच सकता है।

इस 'डेट ट्रैप' (कर्ज के जाल) से कैसे बचें?

हमेशा कोशिश करें कि बिल ड्यू डेट से पहले पूरा (Full Payment) चुकाएं, कभी भी सिर्फ मिनिमम ड्यू के चक्कर में न पड़ें। अगर आप पहले से ही इस जाल में फंस चुके हैं, तो कम ब्याज वाले पर्सनल लोन का सहारा लेकर या क्रेडिट कार्ड बैलेंस ट्रांसफर सुविधा का इस्तेमाल करके हाई-इंटरेस्ट वाले कर्ज को चुका सकते हैं।

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