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    क्या आप भी Credit Card EMI के नाम पर भर रहे हैं ज्यादा पैसे? जान लीजिए इन हिडन चार्जेस के नुकसान

    Updated: Fri, 12 Jun 2026 04:53 PM (IST)

    Credit Card EMI Truth: क्रेडिट कार्ड ईएमआई और 'नो-कॉस्ट ईएमआई' में अक्सर छिपे शुल्क होते हैं, जिससे उपभोक्ता को लगता है कि वे ज्यादा पैसे दे रहे हैं। ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. क्रेडिट कार्ड ईएमआई में ब्याज और प्रोसेसिंग फीस छिपी होती है।

    2. 'नो-कॉस्ट ईएमआई' पर भी जीएसटी और अन्य शुल्क लगते हैं।

    3. कुल लागत की गणना करें और नियम व शर्तें ध्यान से पढ़ें।

    नई दिल्ली: क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल आज के समय में बहुत आम हो गया है। जब भी हमें कोई महंगी चीज खरीदनी होती है और जेब में उतने पैसे नहीं होते, तो हमारे दिमाग में सबसे पहला ख्याल आता है— क्रेडिट कार्ड EMI (Equated Monthly Installment)। यह विकल्प हमें बहुत राहत देता है क्योंकि हम एक बड़ा खर्च छोटी-छोटी मासिक किश्तों में बांट देते हैं। ऊपर से जब हमें "नो-कॉस्ट EMI" का ऑफर दिखता है, तो हम बिना सोचे-समझे खरीदारी कर लेते हैं।


    लेकिन क्या सच में यह उपयोग बिल्कुल मुफ्त होती है? इसका जवाब है नहीं.... बैंक अक्सर विज्ञापनों में चमचमाते ऑफर्स तो दिखाते हैं, लेकिन उनके पीछे छिपे खर्चों (Hidden Charges) के बारे में खुलकर नहीं बताते। आइए इस पूरी गणित को बहुत आसानी से समझते हैं ताकि आप अगली बार किसी जाल में ना फंस पाएं।

    भारत में बढ़ता क्रडिट कार्ड का क्रेज

    भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़े बताते हैं कि त्योहारों या सेल के दौरान देश में क्रेडिट कार्ड से होने वाला खर्च लगातार आसमान छू रहा है। कई महीनों में तो यह आंकड़ा 2 लाख करोड़ रुपये के पार चला जाता है। बैंक भी ग्राहकों को लुभाने के लिए तुरंत अप्रूवल और प्री-अप्रूव्ड लिमिट जैसी सुविधाएं दे रहे हैं। लेकिन इस बढ़ते चलन के साथ अपनी क्षमता से अधिक खर्च करने और कर्ज के जाल में फंसने का खतरा भी बढ़ गया है।


    क्रेडिट कार्ड की EMI में छिपे होते हैं चार्जेस

    जब आप किसी सामान को EMI पर लेते हैं, तो आपको केवल वह किश्त नहीं देनी होती जो स्क्रीन पर दिख रही है। उसके साथ कई अन्य चीजें जुड़ जाती हैं:

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    1. ब्याज शुल्क (Interest Charges)

    अगर आप साधारण EMI चुनते हैं, तो बैंक उस पर एक तय सालाना ब्याज (आमतौर पर 13% से 18% तक) वसूलते हैं। यह ब्याज आपकी मूल राशि (Principal Amount) में जुड़ जाता है, जिससे आपके सामान की कुल कीमत काफी बढ़ जाती है।

    2. नो-कॉस्ट EMI (No Cost EMI) का सच

    "नो-कॉस्ट EMI" सुनकर ऐसा लगता है कि इस पर कोई ब्याज नहीं लगेगा, लेकिन हकीकत कुछ और है। इसके काम करने के दो मुख्य तरीके हैं:

    * कीमत में ही ब्याज शामिल: कई बार रिटेलर या ब्रांड पहले ही उत्पाद की कीमत को बढ़ा देते हैं, जिसमें ब्याज का हिस्सा शामिल होता है।

    * डिस्काउंट के रूप में खेल: बैंक आपको ब्याज के बराबर का 'इंटरेस्ट डिस्काउंट' तुरंत दे देता है, लेकिन जब हर महीने किश्त कटती है, तो उस किश्त पर ब्याज जोड़ा जाता है। दिखने में यह बराबर लगता है, लेकिन इस ब्याज पर लगने वाले टैक्स (GST) का भुगतान आपको ही करना पड़ता है।

    3. प्रोसेसिंग फीस (Processing Fee)

    जैसे ही आप किसी ट्रांजैक्शन को EMI में बदलते हैं, बैंक आपसे एक वन-टाइम (एक बार ली जाने वाली) प्रोसेसिंग फीस वसूलते हैं। यह 99 रुपये से लेकर 500 रुपये या उससे अधिक हो सकती है। यह फीस आपकी पहली किश्त के साथ जुड़कर आती है।

    4. फोरक्लोजर या प्री-क्लोजर चार्ज (Foreclosure Charges)

    मान लीजिए आपने 9 महीने की EMI करवाई थी, लेकिन 3 महीने बाद आपके पास कहीं से पैसे आ गए और आप पूरा कर्ज एक साथ चुकाना चाहते हैं। बैंक इसे इतनी आसानी से नहीं छोड़ते। समय से पहले लोन बंद करने पर बैंक फोरक्लोजर फीस (बचे हुए प्रिंसिपल अमाउंट का 2% से 3%) वसूलते हैं।

    5. GST का अतिरिक्त बोझ

    यह सबसे बड़ा साइलेंट किलर है। आपके क्रेडिट कार्ड की EMI पर लगने वाले ब्याज (Interest), प्रोसेसिंग फीस और फोरक्लोजर चार्ज पर 18% का GST लगता है। यानी भले ही आपको 'नो-कॉस्ट EMI' में ब्याज का डिस्काउंट मिल गया हो, लेकिन उस ब्याज पर लगने वाला 18% GST आपको हर महीने अपनी जेब से देना होगा।

    समझदारी से कैसे करें खरीदारी?

    EMI का विकल्प बुरा नहीं है, बशर्ते आप इसे समझदारी से इस्तेमाल करें। अगली बार खरीदारी से पहले इन बातों का ध्यान रखें:

    > चेकलिस्ट
    > टोटल कॉस्ट कैलकुलेट करें: सामान की असली कीमत और EMI के बाद होने वाले कुल भुगतान (किश्त × महीने + प्रोसेसिंग फीस + GST) का अंतर देखें।
    > नियम और शर्तें (Terms & Conditions) पढ़ें: बिना 'Fine Print' या नियम पढ़े 'Proceed' बटन न दबाएं।
    > कीमतों की तुलना करें: कभी-कभी बिना EMI के सीधे कैश या वन-टाइम पेमेंट करने पर ज्यादा अच्छा डिस्काउंट मिल जाता है।

    क्रेडिट कार्ड का नियम सीधा है कि यह एक बेहतरीन टूल है अगर आप इसके छिपे हुए नियमों को समझते हैं, लेकिन अगर असावधानी बरती गई, तो यह आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है।