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अनिल अंबानी को फिर लगा बड़ा झटका, दिवालिया कंपनी RCOM की ₹581 करोड़ की संपत्ति होगी कुर्क

Updated: Wed, 26 Aug 2026 07:15 PM (IST)

अनिल अंबानी की दिवालिया कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) को बड़ा झटका लगा है। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ...और पढ़ें

RCOM की ₹581.65 करोड़ की संपत्ति होगी कुर्क।

RCOM की ₹581.65 करोड़ की संपत्ति होगी कुर्क।

HighLights

  1. RCOM की ₹581.65 करोड़ की संपत्ति होगी कुर्क।

  2. मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED के आदेश की पुष्टि।

  3. कंपनी के पास अपील करने का विकल्प मौजूद।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। एक समय भारत के सबसे अमीर व्यक्ति रहे अनिल अंबानी पर आए दिन नई आफत आती रहती है। उनकी एक कंपनी जो दिवालिया प्रक्रिया के तहत गुजर रही है, उसे लेकर खबर आई है। हम अनिल अंबानी की जिस कंपनी की बात कर रहे हैं उसका नाम रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCOM) है।

अनिल अंबानी की इस कंपनी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अब कंपनी की करीब ₹581.65 करोड़ की चल और अचल संपत्तियों को कुर्क होगी। दरअसल, प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत गठित एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी (Adjudicating Authority) ने कंपनी की ₹581.65 करोड़ की चल और अचल संपत्तियों को कुर्क (Attach) करने के प्रवर्तन निदेशालय (ED) के आदेश की पुष्टि कर दी है।

क्या है अनिल अंबानी की RCOM को लेकर पूरा विवाद?

दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही रिलायंस कम्युनिकेशंस ने ने बताया कि उसे 25 अगस्त, 2026 को एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी से एक आदेश प्राप्त हुआ है। यह आदेश ED द्वारा 11 मार्च, 2026 को जारी किए गए प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (PAO) के संदर्भ में है। अथॉरिटी ने अब इस कुर्की को सही ठहराते हुए इसे मंजूरी दे दी है। यानी अब अनिल अंबानी की कंपनी की संपत्ति को कुर्क किया जाएगा।

RCOM पर क्या है आरोप?

आरोप है कि रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) से फंड को डायवर्ट किया गया था। जांच में सामने आया कि लगभग ₹1,182 करोड़ की राशि रिलायंस कम्युनिकेशंस को भेजी गई थी, जिसका इस्तेमाल कंपनी ने चीन के बैंकों (जैसे चाइना डेवलपमेंट बैंक और एग्जिम बैंक ऑफ चाइना) के विदेशी कमर्शियल लोन (ECB) को चुकाने के लिए किया था।

कंपनी आदेश को दे सकती है चुनौती?

संपत्ति और समय सीमा अथॉरिटी के आदेश के अनुसार, कुर्क की गई संपत्तियों का कुल मूल्य ₹581.65 करोड़ है। यह अटैचमेंट जांच जारी रहने तक, अधिकतम 365 दिनों की अवधि या विशेष अदालत में कार्यवाही पूरी होने तक प्रभावी रहेगा। हालांकि, कंपनी के पास इस आदेश के खिलाफ 45 दिनों के भीतर अपीलीय न्यायाधिकरण (Appellate Tribunal) में अपील करने का विकल्प मौजूद है।

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(डिस्क्लेमर: यहां शेयर बाजार की जानकारी दी गयी है, निवेश की सलाह नहीं। जागरण बिजनेस निवेश की सलाह नहीं दे रहा है। स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है, इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)