वेदांता के अनिल अग्रवाल 'इकोजेन' से बदलने जा रहे पूरी इंडस्ट्री का गेम, Tata Steel के साथ खेला बड़ा मास्टरस्ट्रोक!
हिंदुस्तान जिंक ने टाटा स्टील के साथ दो दशक पुरानी साझेदारी मजबूत करते हुए 'इकोजेन' के उपयोग का समझौता किया है। यह एशिया का पहला लो-कार्बन जिंक है, जो ...और पढ़ें
नई दिल्ली। वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल की कंपनी हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड (Hindustan Zinc) ने एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी सस्टेनेबल और ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग की दिशा में काम करने जा रही है। हिंदुस्तान जिंक दुनिया की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड जिंक उत्पादक कंपनी है। अब उसने टाटा स्टील (Tata Steel) के साथ अपनी दो दशक पुरानी साझेदारी को और मजबूत करते हुए एक नया समझौता किया है। इस साझेदारी के तहत टाटा स्टील अपने स्टील निर्माण में हिंदुस्तान जिंक के लो-कार्बन जिंक सॉल्यूशन 'इकोजेन' (EcoZen) का इस्तेमाल करेगी।
क्या है 'इकोजेन' (EcoZen) और इसके फायदे?
'इकोजेन' एशिया का पहला लो-कार्बन (कम कार्बन वाला) जिंक है, जिसे पूरी तरह से रिन्यूएबल एनर्जी (अक्षय ऊर्जा) का उपयोग करके बनाया जाता है। पारंपरिक जिंक के मुकाबले इकोजेन का कार्बन फुटप्रिंट 75% तक कम है। प्रति टन जिंक के उत्पादन में 1 टन से भी कम CO₂ का उत्सर्जन होता है।
गैल्वनाइज्ड स्टील को जंग से बचाने के लिए जिंक का इस्तेमाल होता है। इकोजेन के उपयोग से प्रति टन गैल्वनाइज्ड स्टील पर लगभग 400 किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन को रोका जा सकेगा। यह पहल इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमोटिव और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे सेक्टर्स को अपने डीकार्बोनाइजेशन (कार्बन मुक्तीकरण) लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेगी।
कंपनियों ने क्या कहा?
इस साझेदारी पर हिंदुस्तान जिंक के सीईओ, अरुण मिश्रा ने कहा, "इकोजेन ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग की बदलती जरूरतों के लिए सस्टेनेबल मेटल सॉल्यूशन प्रदान करने के हमारे विजन को दर्शाता है। टाटा स्टील के साथ हमारी यह साझेदारी भारत के औद्योगिक इकोसिस्टम में ग्रीन सप्लाई चेन को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।"
वहीं, टाटा स्टील के चीफ प्रोक्योरमेंट ऑफिसर, रंजन सिन्हा ने कहा, "हम अपने साहिबाबाद प्लांट में पर्यावरण के अनुकूल जिंक मेटल 'इकोजेन' की डिलीवरी के लिए हिंदुस्तान जिंक को बधाई देते हैं। यह सहयोग हमारे सप्लायर इकोसिस्टम के बीच ग्रीन टेक्नोलॉजी और सस्टेनेबल प्रथाओं को आगे बढ़ाने की हमारी साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।"
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हिंदुस्तान जिंक और वेदांता शेयर का क्या रहा हाल?
कंपनी की इस बड़ी घोषणा के बावजूद सोमवार को हिन्दुस्तान जिंक शेयर में स्टॉक मार्केट में हुई भारी बिकवाली के कारण दबाव देखने को मिला। हिंदुस्तान जिंक का शेयर (Hindustan Zinc Share Price) बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी 50 में 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट के कारण एनएसई पर 5.97 प्रतिशत गिरकर ₹484 के इंट्राडे लो पर आ गया। 28 जनवरी 2026 को बनाए गए ₹733 के अपने 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर से यह शेयर अब तक लगभग 40% टूट चुका है।
वहीं वेदांता के शेयर में भी आज 5% की गिरावट दर्ज की गई और यह ₹637 पर ट्रेड कर रहा था, जो 1 फरवरी के बाद का सबसे निचला स्तर है। हालांकि, बाजार की इस गिरावट के बीच 23 मार्च 2026 को वेदांता के बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ₹11 प्रति शेयर के तीसरे अंतरिम डिविडेंड की घोषणा की है। यह स्टॉक 27 मार्च 2026 से एक्स-डिविडेंड के रूप में ट्रेड करेगा।
हिंदुस्तान जिंक क्या काम करती है?
वेदांता ग्रुप की कंपनी हिंदुस्तान जिंक दुनिया की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड जिंक उत्पादक और शीर्ष 5 ग्लोबल सिल्वर उत्पादक कंपनियों में से एक है। भारत के प्राइमरी जिंक मार्केट में इसकी 77% हिस्सेदारी है और यह 40 से अधिक देशों में सप्लाई करती है। S&P ग्लोबल कॉर्पोरेट सस्टेनेबिलिटी असेसमेंट 2025 द्वारा इसे लगातार तीसरे वर्ष मेटल्स और माइनिंग कैटेगरी में दुनिया की सबसे सस्टेनेबल कंपनी के रूप में मान्यता दी गई है।
कंपनी ने 2050 या उससे पहले 'नेट जीरो' (Net Zero) उत्सर्जन हासिल करने का लक्ष्य रखा है और यह एक प्रमाणित 3.32 गुना वाटर-पॉजिटिव (Water-Positive) कंपनी भी है।
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(डिस्क्लेमर: यहां शेयरों को लेकर दी गई जानकारी निवेश की राय नहीं है। चूंकि, स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)