NSE IPO के लिए 10 साल का इंतजार होगा खत्म; अगले हफ्ते SEBI के पास अर्जी, LIC-SBI को भी होगा बंपर फायदा?
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का बहुप्रतीक्षित आईपीओ अगले सप्ताह सेबी के पास शुरुआती दस्तावेज दाखिल कर सकता है, जिससे एक ...और पढ़ें

एनएसई का बहुप्रतीक्षितआईपीओ अगले सप्ताह एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच सकता है।
HighLights
एनएसई आईपीओ के दस्तावेज अगले हफ्ते सेबी में दाखिल होंगे।
यह आईपीओ पूरी तरह बिक्री पेशकश (ओएफएस) पर आधारित होगा।
को-लोकेशन विवाद के निपटारे से आईपीओ का रास्ता साफ हुआ।
नई दिल्ली। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का बहुप्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) अगले सप्ताह एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच सकता है। मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, एनएसई 15 या 16 जून को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास आईपीओ के लिए शुरुआती दस्तावेज दाखिल कर सकता है।
एनएसई के निदेशक मंडल ने छह फरवरी को प्रस्तावित आईपीओ को मंजूरी दी थी। यह मंजूरी सेबी से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) मिलने के बाद दी गई थी। न्यूज एजेंसी भाषा के सूत्रों के मुताबिक, यह आईपीओ पूरी तरह बिक्री पेशकश (ओएफएस) पर आधारित होगा, यानी इसमें देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज की ओर से कोई नया शेयर जारी नहीं किया जाएगा। मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे।
विदेशी निवेशकों में टेमासेक की अनुषगी अरांदा इन्वेस्टमेंट्स और कनाडा के पेंशन योजना निवेश बोर्ड (सीपीपीआईबी) की भी उल्लेखनीय हिस्सेदारी है। एनएसई की सूचीबद्धता की योजना लगभग एक दशक से विभिन्न नियामकीय कारणों, विशेष रूप से ‘को-लोकेशन’ विवाद के चलते अटकी हुई थी।
LIC एनएसई की सबसे बड़ी शेयरधारक
एनएसई के शेयरधारकों में घरेलू वित्तीय संस्थान, बीमा कंपनियां, विदेशी निवेशक और व्यक्तिगत निवेशक शामिल हैं। देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) 10.72 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ एनएसई की सबसे बड़ी शेयरधारक है। वहीं भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और उसकी अनुषंगी एसबीआई कैपिटल मार्केट्स की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 7.5 प्रतिशत है।
एक्सचेंज के 1.8 लाख शेयरधारक
जनवरी में सेबी द्वारा एनओसी दिए जाने के बाद आईपीओ प्रक्रिया को फिर से गति मिली। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, यह भारत के पूंजी बाजार के सबसे बड़े आईपीओ में से एक हो सकता है। गैर-सूचीबद्ध (अनलिस्टेड) बाजार में एनएसई का मूल्यांकन पांच लाख करोड़ रुपये से अधिक आंका जा रहा है। एक्सचेंज के लगभग 1.8 लाख शेयरधारक हैं। गौरतलब है कि एनएसई ने पहली बार 2016 में लगभग 10,000 करोड़ रुपये जुटाने के लिए आईपीओ दस्तावेज दाखिल किए थे, लेकिन सेबी ने कामकाज के संचालन और को-लोकेशन मामले से जुड़ी चिंताओं के कारण मंजूरी रोक दी थी।

20 मर्चेंट बैंकर्स की नियुक्ति
आईपीओ की तैयारी के तहत एनएसई ने 20 मर्चेंट बैंकर के अलावा कानूनी सलाहकारों और अन्य मध्यस्थों की नियुक्ति की है। को-लोकेशन मामले में एनएसई ने जून, 2025 में सेबी के समक्ष निपटान आवेदन दायर किया था। इस मामले में कुछ ब्रोकर पर एक्सचेंज की ट्रेडिंग प्रणाली तक विशेष पहुंच प्राप्त करने का आरोप था। वर्षों तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद एनएसई ने 2025 में मामले के निपटारे के लिए 1,388 करोड़ रुपये का भुगतान करने की पेशकश की थी, जिससे उसकी सूचीबद्धता की राह आसान हुई। विश्लेषकों का मानना है कि दस्तावेज दाखिल होने के बाद एनएसई के आईपीओ की समयसीमा और आकार को लेकर अधिक स्पष्टता सामने आएगी।
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(डिस्क्लेमर: यहां IPO को लेकर दी गई जानकारी निवेश की राय नहीं है। चूंकि, स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)
