विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

गहने देने से नहीं खत्म होता बहन का जमीन पर अधिकार, हाई कोर्ट का अहम फैसला

Published: Sat, 17 Oct 2026 09:20 PM (GMT+05:30)

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पिता की मृत्यु 1980 में होने पर भी बेटी को पैतृक संपत्ति से वंचित नहीं किया जा सकता।

गहने देने से नहीं खत्म होता बहन का जमीन पर अधिकार।

गहने देने से नहीं खत्म होता बहन का जमीन पर अधिकार।

HighLights

  1. पिता की मृत्यु 1980 में भी बेटी को संपत्ति का हक।

  2. गहने देने से जमीन पर अधिकार समाप्त नहीं होता।

  3. हाई कोर्ट ने बहन को पैतृक संपत्ति में आधा हिस्सा दिया।

डिजिटल डेस्क, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पिता की मृत्यु 1980 में होने के आधार पर बेटी को पैतृक संपत्ति के हिस्से से वंचित नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति सचिन सिंह राजपूत की एकलपीठ ने भाई की दूसरी अपील खारिज कर बहन को जमीन में आधा हिस्सा और अलग कब्जा देने का सत्र न्यायालय का आदेश बरकरार रखा।

हाई कोर्ट ने कहा कि गहने या अन्य चल संपत्ति देने से जमीन पर अधिकार नहीं छूटता। 12 वर्ष से अधिक खेती करना भी प्रतिकूल कब्जे का पर्याप्त प्रमाण नहीं है। संयुक्त संपत्ति में सह-हिस्सेदार का कब्जा सभी की ओर से माना जाता है।

मामला बेमेतरा जिले की 7.120 हेक्टेयर कृषि भूमि का है, जो याचिकाकर्ता के पिता नानकू साहू के नाम दर्ज थी। उनकी मृत्यु 15 सितंबर 1980 को हुई। इसके बाद बेटे दुलार साहू ने जमीन अपने नाम करा ली। बेटी दुलारा बाई ने 2007 में नामांतरण को चुनौती देकर हिस्सा मांगा और बंटवारे के लिए मुकदमा दायर किया।

भाई ने दावा किया कि बहन को गहने दिए गए, उसने जमीन पर अधिकार छोड़ा और पहले ही बंटवारा हो चुका था। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के विनीता शर्मा बनाम राकेश शर्मा केस का हवाला देते हुए कहा कि संशोधित धारा छह के तहत बेटी को जन्म से बेटे के समान अधिकार है। इसके लिए पिता का नौ सितंबर 2005 को जीवित होना जरूरी नहीं।

 

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।