'संविधान हाथ में लेकर घूमने से कुछ नहीं होता, आचरण भी संवैधानिक होना चाहिए', SIR पर शाह की राहुल को खुली चुनौती
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नवा रायपुर में कांग्रेस और राहुल गांधी पर संविधान विरोधियों व माओवादियों का समर्थन करने का आरोप लगाया।

SIR पर शाह की राहुल को खुली चुनौती।
HighLights
शाह ने कांग्रेस पर माओवादियों के समर्थन का आरोप लगाया।
राहुल गांधी को संसद में बहस की खुली चुनौती दी।
कहा, संविधान हाथ में लेने से नहीं, आचरण से समर्थन।
डिजिटल डेस्क, रायपुर। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को नवा रायपुर में छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के अलंकरण समारोह में कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और विपक्षी दल संविधान विरोधियों तथा माओवादियों के समर्थक रहे हैं।
शाह ने कहा कि राहुल गांधी संसद में माओवाद का समर्थन करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि गैर-संवैधानिक सरकारों का समर्थन करने वालों ने नकली संसद बनाकर संसद का मजाक बनाया।
शाह ने 2010 में पी. चिदंबरम के उस कथन का उल्लेख किया, जिसमें माओवादियों से हथियार डालने की अपेक्षा बातचीत करने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने माओवादियों से हथियार डालकर आत्मसमर्पण करने को कहा और उन्हें मुख्यधारा में लाने का भरोसा दिया।
शाह के अनुसार, केवल 10 प्रतिशत माओवादी मारे गए, जबकि 90 प्रतिशत मुख्यधारा में आए और देश माओवादी हिंसा से मुक्त हुआ।
मानवाधिकार पर बोले शाह
मानवाधिकार के मुद्दे पर शाह ने कहा कि बंदूक के माध्यम से विकास रोकना मानवाधिकार नहीं है। गरीब आदिवासियों के अधिकारों की भी चिंता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक गलियारे की जगह रेड कॉरिडोर बना, जंगलों में बारूदी सुरंगें बिछीं, बच्चों को स्कूल से अगवा कर बंदूकें थमाई गईं और स्कूलों व सड़कों को उड़ा दिया गया।
एसआईआर पर विपक्ष को खुली चुनौती
एसआईआर पर चर्चा के लिए विशेष सत्र लाने की बात कहते हुए शाह ने राहुल गांधी को संसद में बहस की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि संविधान हाथ में लेकर घूमने से उसका समर्थन सिद्ध नहीं होता, आचरण भी संवैधानिक होना चाहिए।
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