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    सुपर एक्सक्लूसिव इंटरव्यू: वर्ल्ड कप 2027 से लेकर ओलंपिक 2028 तक, गौतम गंभीर ने बताया अपना पूरा प्लान

    By Abhishek TripathiEdited By: Praveen Kumar Mishra
    Updated: Tue, 10 Mar 2026 04:00 AM (IST)

    भारत के टी-20 विश्व कप जीतने के बाद मुख्य कोच गौतम गंभीर ने एक विशेष साक्षात्कार में अपनी कोचिंग यात्रा, भविष्य की योजनाओं और टीम की रणनीति पर बात की। ...और पढ़ें

    गौतम गंभीर का सुपर एक्सक्लूसिव इंटरव्यू

    गौतम गंभीर का सुपर एक्सक्लूसिव इंटरव्यू

    HighLights

    1. गंभीर ने ओलंपिक पदक को टी20 विश्व कप से बड़ा बताया

    2. व्यक्तिगत मील के पत्थर से ज्यादा टीम की जीत महत्वपूर्ण है

    3. कोच के रूप में दो आईसीसी ट्रॉफी जीतने वाले पहले भारतीय

    अभिषेक त्रिपाठी, जागरण नई दिल्ली। दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट मैदान नरेन्द्र मोदी स्टेडियम में मेजबान भारत ने न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर टी-20 विश्व कप का खिताब अपने नाम कर लिया। यह भारत का लगातार दूसरा और कुल तीसरा टी-20 विश्व कप खिताब है। फाइनल मुकाबले में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाई। इस सफलता के पीछे भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर की अहम भूमिका भी रही। वह दो आईसीसी ट्रॉफी दिलाने वाले पहले भारतीय कोच बन गए हैं।

    गंभीर ने पहले खिलाड़ी के रूप में भी आईसीसी ट्रॉफी जीती थी और अब कोच के तौर पिछले साल टीम को चैंपियंस ट्रॉफी व अब टी-20 विश्व कप दिलाया। कोच के तौर पर उनका कार्यकाल 2027 वनडे विश्व कप तक है। उन्होंने यह जरूर कहा कि वह 2028 तक का नहीं सोच रहे लेकिन उन्होंने ओलिंपिक पदक को टी-20 विश्व कप से बड़ा बता जरूर बताया है। इस खास मौके पर अभिषेक त्रिपाठी ने गौतम गंभीर से खास बातचीत की। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश।

    गौतम गंभीर का सुपर एक्सक्लूसिव इंटरव्यू

    सवाल: बचपन में आपने खिलाड़ी बनने का सपना देखा होगा। लेकिन कोच बनने के बारे में सोचा था? खिलाड़ी होते समय यात्रा करना आसान है लेकिन कोच के समय परिवार से दूर रहना कितना कठिन है?

    गंभीर: बतौर खिलाड़ी आप युवा होते हो। परिवार में सिर्फ मम्मी-पापा, भाई और बहन होते हैं। उस समय कुछ बनने के सपने होते हैं। जिंदगी में बहुत कुछ हासिल करना चाहते हैं तो त्याग करना आसान होता है। लेकिन बतौर कोच की बात करें तो आपकी पत्नी होती है, बच्चे होते हैं। जो क्रिकेट खेला होता है उसकी पहली पसंद कोच बनना नहीं होता है। उसकी प्राथमिकता खिलाड़ी बनना ही होता है। जब आप खेलने शुरू करते हैं तो आपकी प्राथमिकता बतौर खिलाड़ी ट्रॉफी जीतना चाहते हैं और देश का प्रतिनिधित्व करना चाहते हैं और जब आप संन्यास ले लेते हैं तब आप सोचते हैं कमेंट्री में जाना है या कोचिंग में जाना है। बतौर कोच परिवार से दूर रहना काफी कठिन होता है।

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    सवाल: आपका कार्यकाल वनडे विश्व कप 2027 तक है और आपने दो आईसीसी ट्रॉफी जीत ली है। 2028 में ओलिंपिक में पहली बार क्रिकेट भी होगा। आपके दिमाग में यह बात चल रही है कि ऐसा कोच बनो, जिसके पास आईसीसी ट्रॉफी के साथ ओलिंपिक पदक भी हो?

    गंभीर: खेलते हुए भी मैंने कभी इतनी दूर तक का नहीं सोचा है। यह अभी बहुत दूर है। मेरे लिए हर सीरीज महत्व रखती है। जब तक अच्छा कर पाऊंगा, तब तक करुंगा। अगली सीरीज अफगानिस्तान से है फिर श्रीलंका दौरे पर जाएंगे। उसी पर पूरा फोकस होगा। सच बताऊं तो मैंने वनडे विश्व कप के बारे में भी नहीं सोचा है। उसके लिए अभी डेढ़ साल है। उसके बाद ओलिंपिक होना है। मुझसे बेहतर कोई इंसान होगा जो भारतीय टीम को जीता सकेगा तो उसको कोचिंग करनी चाहिए। अगर मैं बेहतर हूं तो मुझे करना चाहिए।

    सवाल: व्यक्तिगत तौर पर देखा जाए तो ओलिंपिक पदक काफी मायने रखता है। आपको क्या लगता है?

    गंभीर: सही कहा। मुझे लगता है कि ओलिंपिक पदक टी-20 विश्व कप जितना ही महत्वपूर्ण है। शायद उससे भी बड़ा। मेरा मानना है कि ओलिंपिक में पूरी दुनिया हिस्सा लेती है और टी-20 में 20 टीमें हिस्सा लेती है लेकिन ओिंलपिक में उतना ही सम्मान है, जितना विश्व कप जीतना।

    सवाल: टेस्ट और टी-20 टीम में बदलाव हो चुके हैं। नए लड़कों ने सीनियर की जगह भर दी है। अब आप वनडे विश्व कप को लेकर टीम को कैसे देखते हैं?

    गंभीर: अभी दो से तीन महीने हैं। ऐसा तो नहीं है कि हमे तुरंत किसी बारे में सोचना है। अभी वनडे विश्व कप के लिए डेढ़ साल है। आईपीएल खत्म होने वाला होगा तब मुख्य कोच, मुख्य चयनकर्ता बैठकर बात करेंगे कि किस जगह पर कौन सा संयोजन बनाना है और किस संयोजन के साथ दक्षिण अफ्रीका में खेलना है, क्योंकि वहां की परिस्थितियां भारत जैसी नहीं रहने वाली हैं। दक्षिण अफ्रीका की परिस्थितियां भारत से बहुत अलग होंगी। क्या अंतिम एकादश और क्या संयोजन होना चाहिए उसके हिसाब से टीम तैयार करेंगे। सच्चाई यही है कि हम ज्यादा वनडे नहीं खेलते हैं।

    अगले वनडे विश्व कप से पहले 25 से 30 वनडे होंगे। उस 30 वनडे में हमको विश्व कप की तैयारी करनी है। कुछ टूर्नामेंट में तीन वनडे होंगे, कुछ में ही पांच मैच होंगे। टी-20 में हम आईपीएल भी खेलते हैं और उसके के तीन-तीन और पांच-पांच मैच की सीरीज भी खेलते हैं। अगर वनडे सीरीज उठाकर देखेंगे तो बहुत कम ही सीरीज होती हैं, जिसमें पांच मैच होते हैं। जो भी तैयारी करनी है वह आइपीएल के खत्म होने के बाद से शुरू होगी।

    सवाल: विश्व कप जीतने के बाद आपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में व्यक्तिगत माइलस्टोन की बात की। पहले भी आप कई बार व्यक्तिगत माइलस्टोन की बात कर चुके हैं तो ऐसे में कोई टीम सदस्य माइलस्टोन के लिए खेलता है तो बतौर कोच आपका खून खौलता है?

    गंभीर: मुझे नहीं लगता है कि टी-20 टीम में ऐसा कोई खिलाड़ी है जिसने पिछले डेढ़-दो साल में माइलस्टोन के लिए क्रिकेट खेला हो। अगर खेला होता तो शायद बहुत खिलाड़ियों ने शतक बनाए होते और उससे भी ज्यादा रन बनाए होते। आप देख सकते हैं कि जब वे माइलस्टोन के पास होते हैं तो किस तरह की बल्लेबाजी करते हैं। ईशान किशन ने भी तिरुवनंतपुरम में 100 बनाया तो छक्का मारकर बनाया। आप किसी को भी उठाकर देख लीजिए। मैंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोला था कि आप माइलस्टोन के पास होते हैं तो आप तीन या चार गेंद कैसे खेलते हैं तो तय करता है कि आप बड़े टूर्नामेंट जीतोगे या नहीं। क्योंकि अगर आप इस प्रक्रिया में तीन गेंदें लेते हो और 100 रन बनाने के लिए और उन तीन गेंदों में छक्के मार सकते हो तो आप टीम के 15 रन कम करते हो। वही 15 रन हार और जीत में अंतर लाता है। मेरा मानना है कि माइलस्टोन से ज्यादा टीम को जिताना महत्वपूर्ण होना चाहिए। वह हमारा फोकस रहना चाहिए। हम ड्रेसिंग रूम में माइलस्टोन पर बात भी नहीं करना चाहते हैं। हमारा सिंपल एजेंडा रहता है कि हम हर गेंद पर कितना प्रभाव डालते हैं। उस तरह से खेलें। हमारे यहां बहुत समय तक माइलस्टोन प्रशंसा की जाती है, तभी हमें इतना समय लगता है ट्रॉफी जीतने में।

    सवाल: वनडे विश्व कप में भी यह फार्मूला लागू होगा?

    गंभीर: मेरी विचारधारा बड़ी साफ है कि व्यक्तिगत माइलस्टोन से ज्यादा टीम महत्वपूर्ण है। अगर टी-20 में 20 ओवर में 275 रन बना सकते हैं तो आप उम्मीद करो कि अगर उसी तरह से 50 ओवर का प्रारूप खेलते हैं तो किस तरह की बल्लेबाजी करनी होगी। जिसमें पांच खिलाड़ी 30 गज के अंदर रहते हैं। जब हम टी-20 में इतना अच्छा खेल सकते हैं तो 50 ओवर में भी उसी तरह से क्रिकेट खेलनी चाहिए। अगर हमारे खिलाड़ियों में क्षमता और योग्यता है तो फिर क्यों रुकना चाहिए।

    सवाल: एक समस्या देखने को मिली है कि स्पिन खेलने में भारतीय खिलाड़ियों को दिक्कत आ रही है। उसको आप कैसे देखते हैं?

    गंभीर: हम उस तरह की विकेट पर खेलते नहीं हैं। ऐसा तो है नहीं कि आप पूरे साल एक विकेट पर खेलो और अचानक स्पिन होने लगे तो उसके हिसाब से आप ढल जाओ। पहले के खिलाड़ी प्रैक्टिस भी करते थे तो ट्रनिंग ट्रैक पर करते थे। आज अगर आप देखो तो हमारी नेट विकेट भी इतनी पाटा होती है कि जैसे टी-20 की विकेट हो। अगर आप पाटा विकेट पर खेलोगे तो टर्निंग विकेट पर खेलने में दिक्कत तो आएगी ही। इसलिए मेरा मानना है कि सबसे महत्वपूर्ण किस तरह की तैयारी करते हैं, विशेषकर टेस्ट मैचों में। पिछले दिनों जो दो टेस्ट सीरीज हमने खेली हैं, उस बारे में किसी ने बात नहीं की और उसके बारे में कोई बात भी नहीं करेगा। हम एशिया कप के दो दिन बाद वेस्टइंडीज के विरुद्ध टेस्ट मैच खेल रहे थे। हमको दो दिन तैयारी के लिए मिले। हम ऑस्ट्रेलिया से आए तो तीन दिन बाद दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध टेस्ट सीरीज थी। आप जब सफेद गेंद से लाल गेंद में आते हैं तो कम से कम सात से आठ दिन का कैंप होना चाहिए, जहां हम टर्निंग ट्रैक पर खेल सकें। वह ज्यादा महत्वपूर्ण है। अगर यह नहीं करेंगे तो लाल गेंद में जूझते रहेंगे। आगे आने वाले समय में अच्छी चीज होने वाली है कि हम हर टेस्ट सीरीज से पहले सात से आठ दिन की तैयारी कर सकें। मेरे कार्यकाल में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड छोड़ कर किसी सीरीज के लिए समय ही नहीं मिल पाया है कि हम तैयारी कर पाए।

    सवाल: आपको क्या लगता है कि भारतीय टीम का कार्यक्रम बनाए जाने से पहले कोच से बात करनी चाहिए?

    गंभीर: सफेद गेंद में उतना मायने नहीं करता है। वैसे ही सफेद गेंद का क्रिकेट हम ज्यादा खेलते हैं। टी-20 के बाद वनडे सीरीज में खेलने से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है, लेकिन सफेद गेंद से लाल गेंद में आना बहुत फर्क है। इसमें आपको अलग माइंडसेट चाहिए और अलग जोन में आना जरूरी है। अगर हमको दो-दो, तीन-तीन दिन का समय मिलेगा तो कई बार कोच के अलावा खिलाड़ी के लिए भी सही नहीं है। मुझे उम्मीद है कि आने वाले समय में तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिलेंगे।

    सवाल: टूर्नामेंट के दौरान रिंकू के पिता का देहांत हो गया और फाइनल से पहले ईशान की चचेरी बहन का निधन हो गया। इसके अलावा अभिषेक की तबीयत खराब हो गई। बाहर आपकी छवि थोड़ी सख्त बनी हुई है। बतौर कोच इसको आप कैसे संभालते हैं?

    गंभीर: ड्रेसिंग रूम में लड़के मेरे बारे में क्या सोचते हैं और मैं लड़कों से क्या बात करता हूं, यह मेरे और लड़कों के बीच में है। मेरे बारे में वे लोग क्या सोचते हैं जो मुझसे कभी मिले नहीं हैं, उससे फर्क नहीं पड़ता। तो सच्चाई यह है कि उन खिलाड़ियों से क्या बात करता हूं और खिलाड़ियों के लिए मेरा क्या इमोशन है, वह मेरे और खिलाड़ी के बीच में रहना चाहिए। हर चीज में कैमरे में कैद नहीं करवाना चाहता हूं। खिलाड़ी मेरे बारे में क्या सोचते हैं यह मैटर करता है।

    सवाल: अभिषेक फॉर्म में नहीं थे तो बस में आप उनको समझा रहे थे। एयरपोर्ट पर भी बुमराह से बात कर रहे थे। इस मोटिवेशन के बारे में आप कुछ बताएंगे?

    गंभीर: मेरा लड़कों के साथ बहुत ही इनफॉर्मल रिलेशन हैं। जरूरी नहीं है कि मीटिंग में ही बातें की जाएं। बहुत ऐसी जगह हैं, जहां क्रिकेट की बात की जा सके। छोटी-छोटी चीजों के बारे में बात की जा सकें। शायद वही कारण है कि इस टीम का माहौल देखोगे तो फार्मेलिटी नहीं है। जितना फार्मेलिटी रखेंगे उतना ही आप खिलाड़ियों को बांधते जाते हो। कोच और खिलाड़ियों के बीच में इनफॉर्मल रिलेशन होना चाहिए। जहां कई बार डांटो भी, कई बार प्यार भी करो, कई बार कंधे पर हाथ भी रखो और कई बार मजाक भी करो। ऐसा रिश्ता मेरा लड़कों के साथ है। तभी आपने देखा होगा कि चाहे वह एयरपोर्ट हो या चाहे बस हो। अलग-अलग जगहों पर क्रिकेट की बातें होते रहती है।

    सवाल: आपकी आईसीसी चेयरमैन जय शाह और मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर के साथ कैसी बॉडिंग है?

    गंभीर: अगरकर की बात है, अच्छी चीज है कि हम एक साथ खेले हैं। जब आप एक साथ, एक जगह खेले होते हैं, ड्रेसिंग रूम शेयर किए होते हैं तो चीजें आसान होती चली जाती है। आप एक दूसरे की विचारधारा को जानते भी हैं। जहां तक पूर्व बीसीसीआई सचिव जय शाह की बात है तो न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका से टेस्ट में हार के बाद मुझे किसी ने भी फोन किया तो वह जय शाह जी ने ही किया था और उनको पता था कि मैं उस समय कितना परेशान होऊंगा। ऐसे समय में अगर आपको कोई फोन करता है तो आप उन बातों को कभी भूलते नहीं हैं। दूसरी चीज जिस समय मुझे इस पद का प्रस्ताव मिला तब तक मैंने कभी, कहीं कोचिंग नहीं की थी। मै किसी फ्रेंचाइजी का हेड कोच नहीं था। तीन साल मैं मेंटोर जरूर था और उसके बाद बावजूद भारतीय टीम के तीनों प्रारूप के कोच की जिम्मेदारी मिली। यह विश्वास ही है। जय शाह ने भारतीय क्रिकेट के साथ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए बहुत कुछ किया है। मेरे खराब समय में उनका साथ मिला मैं उसके लिए शुक्रगुजार हूं।

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