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    सुनील गावस्कर का कॉलम: सीमित ओवरों की क्रिकेट में सर्वश्रेष्ठ टीम है भारत, तीसरी बार जीता टी20 विश्‍व कप

    Updated: Sun, 15 Mar 2026 05:00 AM (GMT+05:30)

    टी20 विश्‍व कप 2026 के फाइनल में रविवार को भारतीय टीम ने न्‍यूजीलैंड को 96 रन से हराकर तीसरी बार खिताब पर कब्‍जा जमाया था। अब दिग्‍गज क्रिकेटर सुनील ग ...और पढ़ें

    भारतीय टीम ने जीता तीसरा खिताब

    भारतीय टीम ने जीता तीसरा खिताब

    HighLights

    1. भारत ने फाइनल में न्‍यूजीलैंड को हराया

    2. अहमदाबाद में खेला गया फाइनल मैच 

    3. भारत ने बैक टू बैक खिताब अपने नाम किया

    सुनील गावस्कर का कॉलम: आईसीसी टी-20 विश्व कप के सुपर आठ चरण के पहले मैच में दक्षिण अफ्रीका से भारत की हार उस तरह की चेतावनी का बेहतरीन उदाहरण है, जिसकी चैंपियन टीमों को कभी-कभी जरूरत होती है, ताकि वे किसी भी तरह की ढिलाई को दूर कर अपने खेल को अगले दौर के लिए और मजबूत कर सकें।

    ऐसा व्यक्तिगत खेलों में भी होता है, जहां ऊंची रैंकिंग वाला खिलाड़ी किसी कम रैंक वाले और अपेक्षाकृत अनजान खिलाड़ी के विरुद्ध सहज होकर खेलता है और अचानक पाता है कि मैच उसके हाथ से फिसल रहा है। तब वह अपना 'ए' गेम सामने लाता है और पूरा जोर लगाकर उस मुकाबले को जीतता है, जो उसके अनुमान से कहीं ज्यादा लंबा चल जाता है।

    भारत के मामले में हार का अंतर ज्यादा खलने वाला रहा, क्योंकि इसी प्रतिद्वंद्वी को उन्होंने कुछ साल पहले इसी टूर्नामेंट के फाइनल में हराया था। जो भी हो, यह हार टीम के लिए एक तरह से नई ऊर्जा देने वाली साबित हुई। इसके बाद टीम ने शानदार क्रिकेट खेला और पुराने क्रिकेट शक्तियों के आलोचकों तक के मन में यह संदेह नहीं छोड़ा कि भारत इस समय सीमित ओवरों की क्रिकेट में सर्वश्रेष्ठ टीम है।

    इस टीम का हर पहलू में प्रदर्शन बेहतरीन रहा। उससे भी ज्यादा सुखद यह देखना था कि पूरे टूर्नामेंट के दौरान मैच के बाद मीडिया से बात करने वाले खिलाड़ियों में विनम्रता साफ नजर आई। आम तौर पर मैच के बाद मीडिया से वही खिलाड़ी मिलता है जिसने खेल में निर्णायक भूमिका निभाई हो।
    चाहे कप्तान सूर्यकुमार यादव हों, जिनकी बातचीत में रोहित शर्मा जैसी हाजिर जवाबी दिखी या अक्षर पटेल, जिनके जवाब सादगी और विनम्रता से भरे थे या संजू सैमसन, जिन्होंने अंतिम एकादश में वापसी का धैर्य और ईश्वर के प्रति कृतज्ञता दोनों दिखाई या जसप्रीत बुमराह, जिन्होंने अपने साथी गेंदबाजों को श्रेय दिया या ईशान किशन, जिन्होंने दो साल तक टीम से बाहर रहने की कठिनाई को स्वीकार कर सबका दिल जीत लिया या वरुण चक्रवर्ती, जिन्होंने कभी बहाने नहीं बनाए और विनम्रता की मिसाल बने रहे। इन सभी ने दिखाया कि विजेता होने के लिए अहंकारी होना जरूरी नहीं है।

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    उन्होंने यह भी साबित किया कि आप कड़ा और प्रतिस्पर्धी खेल खेल सकते हैं, बिना किसी अनावश्यक बयानबाजी के और सबसे अच्छा यही है कि बल्ला और गेंद ही आपकी ओर से बोलें। अगर कोई उभरते हुए क्रिकेटर यह देख रहे हों तो उम्मीद है कि उन्होंने यह सीखा होगा कि सम्मान प्रदर्शन से मिलता है, दिखावे से नहीं।
    आप जीतकर भी विनम्र रह सकते हैं, जैसा कि इस शानदार भारतीय टीम ने दिखाया है। ट्रॉफी जीतना यह टीम आगे भी जारी रखेगी, लेकिन इन जीतों के बाद जिस विनम्रता के साथ खिलाड़ी व्यवहार कर रहे हैं, उससे वे और भी ज्यादा दिल और प्रशंसक जीत रहे हैं। हम जैसे पुराने खिलाड़ियों के लिए, जिन्होंने उस दौर में क्रिकेट खेली जब मैदान के अंदर और बाहर ज्यादा बातें नहीं होती थीं।

    हाल की भारतीय जीतों का सबसे खास पहलू यही रहा है और उम्मीद है कि यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। द हंड्रेड में किसी भारतीय मालिक वाली फ्रेंचाइजी द्वारा एक पाकिस्तानी खिलाड़ी को खरीदने पर जो विवाद पैदा हुआ है, वह बिल्कुल आश्चर्यजनक नहीं है। नवंबर 2008 के मुंबई हमलों के बाद से भारतीय फ्रेंचाइजी मालिकों ने आईपीएल में पाकिस्तानी खिलाड़ियों को पूरी तरह नजरअंदाज किया है।
    भले ही देर से सही, लेकिन यह समझ अब स्पष्ट हो रही है कि किसी पाकिस्तानी खिलाड़ी को दी जाने वाली फीस अंतत: उसके देश की सरकार को टैक्स के रूप में जाती है, जो हथियार और सैन्य सामग्री खरीदती है और अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय सैनिकों और नागरिकों की मौतों में योगदान देती है।

    चाहे भुगतान किसी भारतीय संस्था द्वारा किया जाए या उसकी विदेशी शाखा द्वारा, यदि मालिक भारतीय है तो वह इस तरह से भारतीय हताहतों में अप्रत्यक्ष योगदान दे रहा है। बात इतनी ही सरल है। न्यूजीलैंड के रहने वाले और द हंड्रेड में टीम के कोच डेनियल विटोरी शायद इस जटिलता को पूरी तरह न समझ पाएं और इसलिए उन्होंने अपनी टीम में पाकिस्तानी खिलाड़ियों को लेने की इच्छा जताई हो, लेकिन मालिक को स्थिति की गंभीरता समझते हुए इस खरीद को हतोत्साहित करना चाहिए था। क्या ऐसे प्रारूप का टूर्नामेंट जीतना, जिसे दुनिया का कोई और देश नहीं खेलता, भारतीय लोगों की जान से ज्यादा महत्वपूर्ण है?