Sunil Gavaskar Column: कई बार गलतफहमी का शिकार हो जाते हैं 'मुख्य चयनकर्ता', किसी और का दोष सहना पड़ता है
रिपोर्टों की मानें तो न्यूजीलैंड दौरे के लिए टीमों का चयन नए मुख्य चयनकर्ता के नेतृत्व में होगा। सुनील गावस्कर ने मुख्य चयनकर्ता के बारे में महत्वपूर्ण बात बताई।

सुनील गावस्कर और अजीत अगरकर
HighLights
सुनील गावस्कर ने मुख्य चयनकर्ता की भूमिका पर दी राय
गावस्कर ने कहा कि चयनकर्ता कभी गलतफहमी का शिकार होते हैं
गावस्कर ने कहा कि चयनकर्ता को दूसरे का दोष झेलना पड़ता है
सुनील गावस्कर कॉलम। बीसीसीआई में अभी तक पांचों जोन से एक-एक चयनकर्ता चुनने की परंपरा है इसलिए ये चुनाव वेस्ट जोन से ही होगा। रणजी ट्रॉफी से जोनल सिस्टम भले कल की बात हो गई हो, लेकिन पांचों जोन से चयनकर्ताओं की नियुक्ति अब भी होती है।
निश्चित तौर पर मुख्य चयनकर्ता चुना जाना गर्व की बात है, लेकिन इससे आप निशाने पर भी आ जाते हैं। अंपायर, विकेटकीपिंग और अब कमेंट्री की तरह ही नौ अच्छी चीजें भुला दी जाती हैं, लेकिन तथाकथित गलती को हजार बार गिनाते हुए उस पर बार-बार चर्चा की जाती है।
किसी ओर की गलती झेलनी पड़ती है
एक अहम बात जिससे ज्यादातर लोग अवगत नहीं होते हैं कि कई बार मुख्य चयनकर्ता को कोई फैसला बाकी चयनकर्ताओं के दबाव में आकर भी लेना पड़ता है, लेकिन चूंकि मीडिया के सामने वही रहते हैं इसलिए सारा दोष उन्हीं पर आ जाता है।
इसलिए, अगर गलती किसी और चयनकर्ता से भी हो तो भी मुख्य चयनकर्ता को ही सुनना पड़ता है। पता नहीं आजकल कप्तान चयन समिति की बैठक में शामिल होते हैं या नहीं, लेकिन पहले तो कप्तान की इसमें अहम भूमिका रहती थी, हालांकि उन्हें वोट करने का अधिकार नहीं था।
कप्तान भी झेलता था दोष
उस वक्त चयनकर्ताओं के लिए ये आम बात थी कि वह मीटिंग के बाद अपने पसंदीदा मीडियाकर्मियों के पास आकर किसी के चुने या ना चुने जाने का दोष कप्तान पर डाल देते थे। मेरे साथ ये कई बार हुआ और ये बिल्कुल भी मजाक की बात नहीं है, ये साथियों के साथ आपकी मित्रता खराब कर सकती है।
हालांकि ऐसा हुआ नहीं क्योंकि मैं ज्यादातर साथियों से आमने-सामने बात कर लेता था और मीडिया से पहले उन्हें पता होता था। गुंडप्पा विश्वनाथ को मुख्य चयनकर्ता के रूप में कई बार साथी चयनकर्ताओं के फैसलों पर सुनना पड़ता था। वोट के आधार पर उन्हें मजबूर होने के बाद बाहर आकर मीडिया के सामने किसी के चुने जाने या ना चुने जाने पर सफाई भी देनी पड़ती थी।
कमियां ज्यादा जुड़ेंगी
चयनसमिति का अगला प्रमुख जो भी बने और अपने खेलने के दिनों में वो कितना भी महान या लोकप्रिय खिलाड़ी क्यों न रहा हो, जब वो अपना कार्यकाल पूरा करके रिटायर होगा, तो उन्हें एहसास होगा कि उनके नाम के साथ अच्छाइयों की तुलना में कमियां (भले ही वे गलतफहमी पर आधारित हों) ज्यादा जुड़ी हुई हैं।
