कर्नाटक क्रिकेट एसोसिएशन की जिद ने छीना चिन्नास्वामी से IPL 2026 का फाइनल मैच, BCCI सचिव देवजीत सैकिया का बड़ा खुलासा
एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम को आईपीएल 2026 के फाइनल की मेजबानी नहीं मिली है। बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने बताया कि कर्नाटक क्रिकेट संघ द्वारा 10,000 अ ...और पढ़ें

एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। आईपीएल 2026 के फाइनल के लिए एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में को मेजबानी नहीं मिली है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के सचिव देवजीत सैकिया ने इसके पीछे का कारण बताया है। सैकिया का कहना है कि फाइनल मुकाबले के लिए एमएलए और एमएलसी के लिए 10 हजार अतिरिक्त टिकट मांगे गए थे। इस वजह से उन्हें फाइनल की मेजबानी नहीं मिली।
बीसीसीआई ने आईपीएल 2026 के प्लेऑफ और फाइनल मुकाबले का वेन्यू बुधवार को जारी किया था। खिताबी मैच चिन्नास्वामी के बजाय अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला जाएगा। तो वहीं प्लेऑफ मैच धर्मशाला और न्यू चंडीगढ़ में खेला जाएगा। चिन्नास्वामी में फाइनल नहीं होने से हर कोई हैरान है लेकिन बीसीसीआई ने मुफ्त टिकटों की भारी मांग की वजह से इसे अहमदाबाद में कराने का फैसला किया।
देवजीत सैकिया ने किया खुलासा
न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए सैकिया ने कहा, "आईपीएल के प्रोटोकॉल के अनुसार हमें मेजबान क्रिकेट संघ को बैठने की कुल क्षमता का केवल 15 प्रतिशत टिकट कॉम्पिलिमेंट के रूप में देना होता है। यही मानक प्रोटोकॉल है। सभी क्रिकेट संघो को इसी के तहत टिकट उपलब्ध कराए जाते हैं। हमें सूत्रों से जानकारी मिली कि आईपीएल लीग मैचों की मेजबानी के दौरान कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ निर्धारित 15 फीसदी से कहीं अधिक टिकटों की मांग कर रहा था।"
बीसीसीआई सचिव ने आगे कहा, हमने इसके लिए संघ को एक ईमेला भेजा। 2 मई को हमें कर्नाटक क्रिकेट संघ की तरफ से, जो जवाब मिला, उससे हम हैरान रह गए। उस ईमेल में उन्होंने 15 फीसदी कॉम्पिलिमेंट टिकट के अलावा 10000 अतिरिक्त टिकटों की मांग की थी। उन्होंने अपने सदस्यों, संबंद्ध क्लबों और अन्य लोगों के लिए टिकट की मांग की थी। सैकिया के मुताबिक यही कारण था कि बीसीसीआई ने फाइनल को अहमदाबाद में कराने का फैसला किया।
खबरें और भी
विधायकों के लिए भी टिकट की मांग
सैकिया ने कहा, "सबसे आश्चर्यजनक बात ये थी कि उन्होंने अपने विधानसभा सदस्यों और विधान परिषद के सदस्यों के लिए भी टिकट की मांग की थी। इसके अलावा कर्नाटक सरकार से भी 700 टिकटों की मांग की थी। इस हिसाब से वे 15 प्रतिशत टिकटों के अलावा भी 10 हजार टिकट चाहते थे।"