किताब के पन्ने पलटकर पिता ने सिखाया क्रिकेट, बेटे ने बल्ले से बनाई अलग पहचान; जानिए कुमार कुशाग्र की जुनून वाली कहानी
जमशेदपुर के कुमार कुशाग्र ने ऑस्ट्रेलिया-ए के खिलाफ 113 रन बनाकर अपनी प्रतिभा फिर साबित की। यह कहानी उनके पिता ...और पढ़ें


समय कम है?
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जागरण, रांची : झारखंड के जमशेदपुर के रहने वाले कुमार कुशाग्र ने घरेलू क्रिकेट में एक और शानदार पारी खेली है। दलीप ट्रॉफी के फाइनल में चमकने के बाद कुशाग्र ने ऑस्ट्रेलिया-ए के खिलाफ खेले जा रहे अनऑफिशियल टेस्ट मैच में 113 रनों की पारी खेल फिर अपनी प्रतिभा दिखाई है। उनकी कहानी पिता के सपने और बेटे के जुनून की कहानी है। कुशाग्र जब सिर्फ 2-3 साल के थे, तभी उनके पिता शशिकांत सिंह जो खुद क्रिकेटर बनना चाहते थे, उन्हें अकादमी की बाउंड्री पर बैठाकर मैच दिखाते थे। झारखंड में तब न अच्छे ग्राउंड थे, न अकादमी।
पिता के पास कोचिंग की डिग्री नहीं थी, तो वे अखबार से सचिन-द्रविड़ की तकनीक की पेपर कटिंग काटकर किताब में चिपकाते और बेटे को समझाते। उनका दिन सुबह 5:30 बजे शुरू होता था। पहले घर के लॉन में एक घंटे प्रैक्टिस, फिर स्कूल, फिर शाम तीन बजे अकादमी, और रात 8 से 11 बजे तक घर में लगी लाइट में फिर अभ्यास।
जमकर किया संघर्ष
संघर्ष यहीं खत्म नहीं हुआ। 2019 में वो बीनू मांकड़ ट्रॉफी में 537 रन बनाकर टाप स्कोरर बने और इंडिया अंडर-19 वर्ल्ड कप 2020 के लिए चुने गए, पर वहां ध्रुव जुरेल के कारण सिर्फ एक ही मैच खेलने को मिला। 2021 में रणजी डेब्यू से पहले टखना मुड़ गया। जिस कारण वे क्रिकेट से कुछ समय के लिए दूर हो गए, लेकिन कुमार कुशाग्र की असली वापसी 2022 में हुई। नागालैंड के खिलाफ रणजी प्री-क्वार्टर में उन्होंने 266 रन (269 गेंद) ठोक दिए और पाकिस्तान के जावेद मियांदाद का 47 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़कर फर्स्ट क्लास में 250+ बनाने वाले सबसे युवा खिलाड़ी (17 साल 141 दिन) बन गए।
टीम को दिलाया खिताब
इसके बाद आईपीएल 2024 में दिल्ली कैपिटल्स ने उन्हें 7.2 करोड़ रुपये में खरीदा। फिर 2025-26 में उन्होंने ईशान किशन के साथ मिलकर फाइनल में 81 रन की पारी खेलकर झारखंड को उसका पहला सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी का खिताब जिताया।
