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    28 साल बाद भारत ने कर दिखाया, देशवासियों को दिया सेलिब्रेशन का अनूठा मौका; वो पल कभी नहीं भूल पाएंगे

    Updated: Thu, 02 Apr 2026 03:35 PM (IST)

    आज से ठीक 15 साल पहले 2 अप्रैल 2011 को भारत ने वनडे विश्व कप का खिताब जीता था। भारतीय टीम ने उस दिन 28 साल बाद अपना दूसरा वनडे विश्व कप जीता था। ...और पढ़ें

    स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। 2 अप्रैल 2011 का दिन, जब भारतीय टीम ने इतिहास रचते हुए श्रीलंकाई टीम को हराकर 28 साल बाद वनडे वर्ल्ड कप अपने नाम किया। मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए इस फाइनल में कप्तान एमएस धोनी ने मैच विनिंग पारी खेलकर खुद को हमेशा के लिए अमर कर दिया।

    आज, भारत की इस ऐतिहासिक जीत को हासिल किए हुए 15 साल बीत चुके हैं और इस खास दिन पर महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने भी 2011 वर्ल्ड कप जीत की 15वीं सालगिरह पर उस ऐतिहासिक पल को याद करते हुए भावुक संदेश शेयर किया है।

    जब भारत ने उठाई थी 2011 विश्व कप की ट्रॉफी

    274 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत की शुरुआत बेहद खराब रही थी। वीरेंद्र सहवाग बिना खाता खोले आउट हो गए, जबकि सचिन तेंदुलकर सिर्फ 18 रन बनाकर पवेलियन लौटे। टीम दबाव में थी, लेकिन गौतम गंभीर ने 97 रनों की शानदार पारी खेलकर पारी को संभाला और जीत की नींव रखी थी।

    इस मुकाबले के अहम मोड़ पर कप्तान एमएस धोनी खुद ऊपर बल्लेबाजी करने आए और युवराज सिंह (21) के साथ मिलकर पारी को आगे बढ़ाया। धोनी ने संयम और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन दिखाते हुए नाबाद 91 रन बनाए और मैच का रुख पूरी तरह भारत की ओर मोड़ दिया।

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    सचिन का भावुक कर देने वाला मैसेज

    सचिन ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए अपने संदेश में लिखा,

    'पहली गेंद हमेशा दिल की धड़कन बढ़ा देती है… और उस रात, ये कभी रुकी ही नहीं। 15 साल बाद भी वो एहसास हमारे साथ है। हम सभी एक युवा टीम के रूप में बड़े हुए, एक ही सपना लेकर भारत के लिए वर्ल्ड कप जिताना है। इस सफर का हिस्सा रहे हर खिलाड़ी और हर फैन का धन्यवाद… आपने इसे खास बना दिया। जय हिंद!'

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    सचिन तेंदुलकर

    सचिन के लिए यह जीत बेहद खास थी, क्योंकि अपने आखिरी वर्ल्ड कप में उन्होंने ट्रॉफी उठाने का सपना पूरा किया। वह टूर्नामेंट में भारत के सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज भी रहे।

    धोनी के विजयी छक्के से जीता भारत

    अगर बात करें मैच की तो फाइनल मुकाबले में श्रीलंका ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया था।

    उनकी शुरुआत भले ही धीमी रही, लेकिन अनुभवी बल्लेबाज महेला जयवर्धने ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 88 गेंदों में नाबाद 103 रन बनाए। उनके अलावा कप्तान कुमार संगाकारा ने 48 रन का योगदान दिया, जिसकी बदौलत श्रीलंका ने निर्धारित 50 ओवरों में 6 विकेट के नुकसान पर 274 रन बनाए।

    लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही और उसने जल्दी ही अपने दोनों ओपनर खो दिए। ऐसे मुश्किल समय में विराट कोहली और गौतम गंभीर ने पारी को संभाला। कोहली ने 35 रन बनाकर टीम को स्थिरता दी, जबकि गंभीर ने 97 रन की शानदार पारी खेलकर जीत की मजबूत नींव रखी।

    इसके बाद कप्तान धोनी ने ऊपर नंबर पर बैटिंग करते हुए मैच की पारी को संभाला और मैच को अंत तक लेकर गए। उन्होंने 79 गेंदों में नाबाद 91 रन बनाए और अंत में विजयी छक्का लगाकर भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाई। उनका वो सिक्स आज भी भारतीय क्रिकेट के सबसे यादगार पलों में गिना जाता है।

    इस मैच में धोनी को बेहतरीन परफॉर्मेंस के लिए प्लेयर ऑफ द मैच से नवाजा गया। वहीं, पूरे टूर्नामेंट में शानदार ऑलराउंडर प्रदर्शन के लिए युवराज सिंह को ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ का पुरस्कार मिला।

    युवराज ने टूर्नामेंट में 362 रन बनाने के साथ-साथ 15 विकेट भी लिए थे और भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई थी। भारत की ये दूसरी विश्व कप जीत थी। इससे पहले टीम ने 1983 में कपिल देव की कप्तानी में वेस्टइंडीज को हराकर पहली बार विश्व कप जीता था।

    इसके बाद 2003 में सौरव गांगुली की कप्तानी में टीम फाइनल तक पहुंची, लेकिन रिकी पोंटिंग की अगुवाई वाली ऑस्ट्रेलिया से हार गई। 

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