दिल्ली में 15 सितंबर तक यौन शोषण के 1020 केस, 653 POCSO के मामले; ज्यादातर केस में अपनों ने तोड़ा भरोसा
राजधानी दिल्ली में 15 सितंबर तक यौन शोषण के 1020 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 653 पॉक्सो के केस ...और पढ़ें

दिल्ली में इस साल 15 सितंबर तक यौन शोषण (दुष्कर्म और पॉक्सो) की कुल 1020 घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं।
HighLights
दिल्ली में 15 सितंबर तक 1020 यौन शोषण के मामले दर्ज।
इनमें से 653 मामले पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज हुए।
अधिकतर मामलों में आरोपी पीड़ित के परिचित या करीबी थे।
राकेश कुमार सिंह, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में महिलाओं, किशोरियों और मासूम बच्चियों के खिलाफ होने वाले अपराधों के आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं।
दिल्ली पुलिस द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस साल 15 सितंबर तक यौन शोषण (दुष्कर्म और पॉक्सो) की कुल 1020 घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं।
हालांकि, पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए इनमें से 976 मामलों को सुलझा लिया है। इन कुल मामलों में पॉक्सो के 653 केस शामिल हैं, जिनमें से 634 मामलों का निपटारा किया गया है।
अजनबी नहीं, अपनों ने ही तोड़ा भरोसा
आंकड़ों का सबसे डरावना पहलू यह है कि पीड़ितों पर अत्याचार करने वाले अधिकतर आरोपी कोई बाहरी या अजनबी व्यक्ति नहीं थे, बल्कि वे लोग थे जिन पर पीड़ितों ने सबसे ज्यादा भरोसा किया था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, अधिकांश मामलों में आरोपी पीड़िता के परिचित ही पाए गए हैं।
- दोस्त व पारिवारिक परिचित : 41.7 प्रतिशत मामलों (425 केस) में आरोपी पीड़िता के दोस्त या परिवार के परिचित थे।
- अन्य परिचित : 32.9 प्रतिशत मामलों (336 केस) में अन्य परिचित व्यक्ति आरोपी के रूप में सामने आए।
- सगे-संबंधी व रिश्तेदार : 12.1 प्रतिशत मामलों (123 केस) में सगे-संबंधी या रिश्तेदार ही शोषक निकले।
- पड़ोसी : 10.2 प्रतिशत मामलों (104 केस) में पड़ोसी इस घृणित कृत्य में शामिल पाए गए।
पॉक्सो मामलों का वर्षवार तुलनात्मक विवरण
बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों (पॉक्सो) के आंकड़ों में पिछले वर्षों की तुलना में दर्ज मामलों की संख्या में बदलाव देखा गया है...
- वर्ष 2024: 1013 मामले दर्ज हुए, जिनमें से 993 सुलझाए गए।
- वर्ष 2025 (पूरा वर्ष): दुष्कर्म और पॉक्सो के कुल 1608 केस दर्ज हुए (जिनमें 1567 केस सुलझाए गए)। केवल पॉक्सो के 966 मामले दर्ज हुए थे, जिनमें से 947 सुलझाए गए।
- वर्ष 2025 (15 सितंबर तक): 693 मामले दर्ज हुए थे, जिनमें से 666 सुलझा लिए गए थे।
- वर्ष 2026 (15 सितंबर तक): 653 मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें से 634 मामले सुलझाए जा चुके हैं।
महिला सुरक्षा के लिए पुलिस के मुख्य उपाय व तंत्र
राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए दिल्ली पुलिस द्वारा निम्नलिखित कदम उठाए जा रहे हैं...
- आपातकालीन हेल्पलाइन (112 और 1091): संकट की स्थिति में त्वरित सहायता के लिए 24 घंटे सक्रिय रहने वाला राष्ट्रीय आपातकालीन नंबर 112 और विशेष महिला हेल्पलाइन 1091 उपलब्ध है, जिसके साथ विशेष महिला पुलिस मोबाइल टीमें तैनात रहती हैं।
- हिम्मत प्लस ऐप: यह महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक डिजिटल SOS ऐप है। इसके माध्यम से ऑटो, टैक्सी और कैब के क्यूआर कोड को स्कैन करके यात्रा सुरक्षित की जा सकती है तथा आपात स्थिति में पुलिस को तुरंत अलर्ट भेजा जा सकता है।
- 'शिष्टाचार' एंटी-इव टीजिंग स्क्वाड: सार्वजनिक स्थानों, बाजारों, मेट्रो स्टेशनों, सिनेमाघरों और बस अड्डों पर छेड़छाड़ रोकने के लिए सादे कपड़ों में महिला पुलिसकर्मियों का 'शिष्टाचार' स्क्वाड तैनात रहता है।
- पिंक बूथ व महिला पीसीआर वैन: संवेदनशीलता और पहुंच को आसान बनाने के लिए विशेष 'पिंक बूथ' और 'पिंक पिकेट्स' स्थापित किए गए हैं। साथ ही, प्रमुख मार्गों और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास महिला पीसीआर वैन लगातार गश्त करती हैं।
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